श्री जिन कुशल सूरी सेवाश्रम ट्रस्ट : कुशल वाटिका

श्री जिन कुशल सूरी सेवाश्रम ट्रस्ट : कुशल वाटिका

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राजस्थान की पुण्यधरा पर बाड़मेर नगर के समीप बाड़मेर – अहमदाबाद राष्ट्रीय महामार्ग पर स्थित जैन तीर्थ ‘कुशल वाटिका’ विश्व भर में अपने आप में अद्भुत व अनोखष तीर्थ है। जिसकी सरंचना 53 एकड़ विस्तृत क्षेत्र में जैन दर्शन पर आधारित है, परमात्मा ने जो जीवन शैली हमें बताई है उस परिकल्पना को इस ‘कुशल वाटिकाÓ के रूप में आपके समक्ष रखने का प्रयास मात्र है। इसकी परिकल्पना में वास्तुपुरुष मुख्य आकर्षण है जिसके ह्रदय पटल पर मुलनायक परमात्मा श्री मुनिसुव्रत स्वामी भगवान की विशाल प्रतिमा, नव गृह आधारित परमात्मा की प्रतिमाये, अधिष्ठायक देव- देवियाँ व दादावाडी में चारो दादा गुरुदेव व आचार्य गुरु भगवन्तो की प्रतिमाये कुल 9 मंदिरों में विराजित है। परम पुज्य खरतरगच्छाधिपति आचार्य श्री मणिप्रभ सुरिश्वरजी म.सा. इस सम्पूर्ण संकल्पना के आधारस्तम्भ मार्गदर्शक है, जिनके ज्ञान भंडार का ज्ञान रस से ‘कुशल वाटिकाÓ का कोना कोना महक रहा है। आप श्री के मार्गदर्शन में जहाज मंदिर, गज मंदिर, मयूर मंदिर एवं सुघोष घंट मंदिर आदि निर्मित है। परम पुज्या साध्वी बहिन मा. डॉ विद्युतप्रभा श्री जी प्रेरणा से प्रमोद श्री विद्यापीठ के तत्वाधान में ‘कुशल वाटिकाÓ में शैक्षणिक संकुल का निर्माण हुआ है। यात्रिओं की सुविधा के लिए 55 कक्षीय यात्रिक भवन, जलगृह, 9000 वर्ग फीट की भोजनशाला, आयम्बिल शाला, 11000 वर्ग फीट का प्रवचन हाल, साधू एवं साध्वी भगवंत के लिए अलग-अलग उपाश्रय, जैन दर्शन उद्यान व भव्य मुख्यद्वार आदि का निर्माण किया जा चूका है। धार्मिक व् शैक्षणिक ज्ञान के लिए प्राथमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालय का निर्माण किया गया है, जिसमे अभी तकरीबन 850 विद्यार्थी अध्यन कर रहे है। साथ ही इस साल 78 कमरों के छात्रावास का भी निर्माण किया गया है जिसमे छात्रों के रहने की उत्तम व्यवस्था सुचारू रुप से होगी। उच्चतर शिक्षा के लिए महाविद्यालय का निर्माण निकट भविष्य में किया जाना है। वृध्दावस्था में मनुष्य को परमात्मा की भक्ति का अवसर प्राप्त हो उस उद्देश्य से भक्ति विहार का भी निर्माण जल्द ही किया जाना है। साथ ही जैन भाइयो के लिए इस परिसर में 200 परिवारों के लिए आवास योजना का भी प्रावधान है जिससे नित्य सेवा पूजा का लाभ उन्हें प्राप्त हो सके।

‘कुशल वाटिकाÓ के अध्यक्ष भंवरलाल छाजेड एवं ट्रस्ट मंडल के अथक प्रयासों से ‘कुशल वाटिकाÓ आज एक भव्य तीर्थ का रूप ले चूका है, इस तीर्थ की भव्यता को चार चंद लगाने के लिए दादा जिनकुशलसूरी गुरुदेव की 52 फीट 4 इंच ऊंचाई की बैठी प्रतिमा 56 फीट के समवसरण पर विराजित होगी, जो की दादा गुरुदेव की भारत भर में पहली प्रतिमा होगी। जिसका कार्य प्रगति से चल रहा है। आप सभी से कुशल वाटिका ट्रस्ट मंडल एवं अध्यक्ष की और से विनती है की आप जब भी राजस्थान की तरफ पधारे तो इस तीर्थ पर पधार कर दर्शन का लाभ अवश्य ले, तथा इस अनूठे तीर्थ के निर्माण के सहभागी बने।