निज स्वार्थ सेवा समिति द्वारा कालबादेवी में महा मूर्खो की होली स्वयं...

निज स्वार्थ सेवा समिति द्वारा कालबादेवी में महा मूर्खो की होली स्वयं से स्वयं को पहचानें – कमल नयन बजाज

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मुंबई। कैसा लगता है यह अजीबो-गरीब नाम सुनकर, ‘निजस्वार्थ सेवा समिति’ यह समिति का नाम शहर की संस्था पर व्यंग और कटाक्ष के रूप में रखा गया है। संस्था के संस्थापक अध्यक्ष कमलनयन बजाज के अनुसार संस्था का उद्देश्य सामाजिक संस्थाओं द्वारा किए जा रहे सामाजिक प्रोपोगंडा व धार्मिक प्रपंचों में चंदों के दुरुपयोग का विरोध करना है। राजस्थान युवा कपड़ा व्यापारियों के उत्साही दल द्वारा विगत 10 वर्षों से निजस्वार्थ सेवा समिति द्वारा प्रति वर्ष होली का आयोजन किया जाता है। जिसमें राजस्थान के परम्परागत ढप, तुतारी बांसुरीवादन व राजस्थानी लोकनृत्य व लोकगीतों के साथ मुंम्बई स्थित बादामवाड़ी कालबादेवी रोड से सैकड़ों व्यापारियों ने सिर पर परम्परागत साफा व फेंटा धारण कर दादीसेठ अग्यारी लेन, भूलेश्वर, अनंतवाड़ी व विभिन्न मार्गों से होती हुई सीताराम पोद्दार बालिका विद्यालय के हॉल तक पहुंचने में दस मिनट का भव्य जुलूस का सफर तीन घंटे में तय किया गया। जब सामुहिक रूप से नाचते-गाते हुए जुलुस में निकले तो उस वक्त कालबादेवी एक छोटे राजस्थान में परिवर्तित हो गया। छज्जों व बालकनियों में दर्शकों का हुजुम, जुलुस में जोश बढ़ा रहा था इसमें विदेशी सैलानियों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया और जुलूस में सम्मिलित होकर जुलूस समाप्ति तक साथ रहे। मुंबई में बसे राजस्थानी प्रवासी भी रास्ते में सब कतार बद्ध खड़े होकर यह विशाल साफा से सुसज्जित होली के बारातियों को देखने के लिए उत्सुक दिखाई दे रहे थे। यह जत्था करीब 350 व्यापारियों का था। स्वच्छता अभियान का विशेष ध्यान रखते हुए रोड खराब न हो इसके लिए व्यापारियों ने रंगों की होली का बहिष्कार किया व फूलों की होली खेली। बांसुरी की धुन, ढप की थाप पर नाचते-गाते कार्यक्रम स्थल तक पहुंचे। बारातियों का स्वागत ठंडाई पकौड़ें के साथ किया गया। जे.पी. बियाला एंड पार्टी ने हॉल के अंदर ढपों के साथ होली के गीतों का रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किया। बीच-बीच में फूलों से होली खेली गई। कम से कम बजट में इतने सार्थक व शानदान कार्यक्रम का आयोजन कर संस्था ने एक अनुकरणीय उदाहरण पेश किया।

संस्था के संस्थापक अध्यक्ष कमल नयन बजाज की अगुवाई में किए गए इस अभूतपूर्व कार्यक्रम को लोगों ने कालबादेवी का ऐतिहासिक कार्यक्रम बताया। इस संस्था का दिलचस्प पहलू यह रहा कि इस संस्था में जुड़े हुए सभी लोग अध्यक्ष हैं इसमें अन्य पदवियां निरस्त की गई हैं। सभी लोग आपस में मिल-जुलकर काम करने में यकीन रखते हैं। ब्रिजेश त्रिपाठी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

कार्यक्रम को सफल बनाने में शंकरलाल शर्मा, मनोज शर्मा, कैलाश व्यास, पवन जैन, अरुण चांदगोठिया, पी.के. भगेरिया, कपूरचंद सोलंकी, निरंजन बोहरा, ओमप्रकाश शर्मा व अशोक पहाडिय़ा, नवनीत टीबरीवाल, दिनेश शर्मा आदि का उल्लेखनीय योगदान रहा। कार्यक्रम का संचालन महेन्द्र रुंगटा द्वारा किया गया।