खुडाला के पुनमिया परिवार ने की जीवदया की आदर्श मिसाल पेश की

खुडाला के पुनमिया परिवार ने की जीवदया की आदर्श मिसाल पेश की

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मुंबई। माया के मोह मे मानव अंधा हो जाता है, मगर मायरा मे मिली माया को मानव जीवो की काया के उद्घार हेतु दान देकर जीवदया प्रतिपालक के रुप मे एक नई सोच व मिशाल कायम करे तो यकीनन उस सोच को सलाम करने का मन करता है। मानवीय मुल्यो का मुल्याँकन करते हूऐ मनुष्यत्व मन की ललक से जीवदया प्रेमी श्रीमती संगीता सुरेशकुमार बस्तीमलजी पुनमिया ने अपने पुत्र रौनक के लग्नोत्सव प्रसंग पर सनातन परम्पराओ के अनुरुप ससूराल पक्ष सेवाडी निवासी मोहनलाल देवीचंदजी सुराणा के पुत्र रमेश, दिलीप एवं राजेन्द्र से आऐ मायरे को मानपूर्वक स्विकार करते हुऐ भगवान महावीर के कथन जीओ और जीने दो को दिल से आत्मसात कर मायरे की सम्पूर्ण राशी जीवदया के सत्कर्म हेतू भेट देकर समाज मे एक ऐसी सराहनीय पहल व प्रथा प्रारंभ की है जो वाकई आज के परिवेश मे बहूत बड़े दिल व जीगर की बात है।

ससूराल से प्रदत मायरा की रकम समाज के समक्ष सराहनीय सत्कर्म हेतू दान करके पुनमीया परिवार ने अबोल मुक पशु-पक्षियो का मान बढाकर अपने पुत्र के विवाह को ईतिहास के स्वर्णिय दस्तावेजो मे समाहित कर धन के पीछे मन के रिश्ते तोडने वालो को भी सुन्दर संदेश दिया है, जिसकी सर्वत्र भूरी-भूरी सराहना हो रही है।