प्रदीप राठोड़ – खूबसूरत दुनिया का खुशनुमा चेहरा

प्रदीप राठोड़ – खूबसूरत दुनिया का खुशनुमा चेहरा

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सेलो ग्रुप के मेनेजिंग डायरेक्टर प्रदीप राठोड़ प्रभावशाली व्यक्तित्व के व्यवसायी हैं। समय की कीमत समझते हैं इसलिए एक पल को भी हाथ से जाने नहीं देते। उनका व्यक्तित्व हर किसी को आकर्षित करता हैं। जो भी उनसे एक बार मिलता है वह उन्हें एक चुंबकीय व्यक्तित्व का धनी मानने को मजबूर हो जाता है। पेश है अपने पिता श्री घीसुलाल बदामीया के नक्शे कदम पर सफलताओं को नाप कर शिखर पर स्थापित प्रदीप राठोड की सफलता की कहानी-

ख्वाब बहुत खूबसूरत होते हैं। वे हर किसी को लुभाते हैं। सबको आकर्षित करते हैं। और सभी को अपने सुहानेपन का अहसास कराते हैं। लेकिन यह सब, तब तक ही खुशनुमा लगता है, जब तक कि ख्वाब सिर्फ ख्वाब ही बने रहें। जैसे ही, इन  खूबसूरत ख्वाबों को हम जिंदगी में उतारने की कोशिश करने लगते हैं, तो अचानक ये बहुत कू्रर होकर, हमारी हर राह को इतना पथरीला और नुकीला बना देते हैं कि उस राह पर चलना तक दूभर हो जाता है। बहुत कम लोग होते हैं, जो उन सारी तकलीफों को दरकिनार करते हुए, हर मुश्किल का बहुत हिम्मत से मुकाबला करते हुए, अपने सपनों को पाने की कोशिश कर पाते है। और, जो इस रास्ते पर निकल पड़़ते हैं, उनकी दुनिया को ये ख्वाब खुद इतनी खूबसूरती बख्शने लग जाते हैं कि उनके आसपास के हर इंसान को उनसे रश्क होने लगता है। ऐसे ही ढेर सारे खूबसूरत ख्वाबों को साकार करने की ख्वाहिश पालकर अपनी, अपनों की और अपने आसपास के अनेक लोगों की जिंदगी को खुशनुमा बनाने में सफलता प्राप्त करनेवाले प्रदीप राठोड़ आज किसी परिचय के मोहताज नहीं है। दुनिया उनको ‘प्लास्टिक किंग’ के नाम से जानती हैं। देश भर के हर घर में उनके प्रोडक्ट की उपस्थिति ‘सेलो’ की ब्रांडिंग और व्यापारिक विस्तार की कहानी कहते हैं। वे यारों के यार के रूप में जाने जाते हैं। इसी कारण दुनियाभर के सफलतम व्यवसायी उनसे दोस्ती करना चाहते हैं, और जो उनके दोस्त हैं, वे उनसे दूर होना नहीं चाहते। प्रदीप राठोड़ बेहद सरल हैं, गजब के सफल हैं और अपने हर मकसद में जबरदस्त कामयाब व्यक्ति के रूप में समाज में जाने जाते हैं। यह सब इसलिए हैं, क्योंकि सपनों के सुहानेपन और जिंदगी के जख्मों के बीच के दर्दनाक फासले को वे अपने आसपास के किसी भी व्यक्ति के मुकाबले ज्य़ादा अच्छे से जानते हैं। लोग मानते हैं कि जिंदगी में तकलीफें उन्हें कम देखने को मिलीं, लेकिन व्यवसाय को विकसित करने और उद्योग को असरकारक बनाने की कोशिश में जिन तकलीफों से उनका वास्ता रहा है, वे कोई कम नहीं रहीं। इसलिए कहा जा सकता है कि सपने उतने सुहाने नहीं होते, जितने दिखा करते हैं।

प्रदीप राठोड़ सफल इसलिए हैं क्योंकि मेहनती हैं। जब दोस्तों के साथ खेलने और मौज मस्ती करने की उमर थी, तब सिर्फ 18 साल की ऊमर में वे अपने पिता घीसूलाल बदामिया द्वारा स्थापित व्यवसाय में आ गए। सन 1986 में 7 मशीनों और 60 कर्मचारियों के साथ उन्होंने भारतीय रसोइघरों की जरूरत समझते हुए थर्मोवेअर की शुरूआत की एवं कुछ ही सालों में उनके क्वालिटी प्रोडक्ट इतने प्रभावी रूप से बाजार में जम गए और ‘सेलो’ की ब्रांडिंग को जबरदस्त ऊंचाई मिली। सन 1965 में 23 जनवरी को श्री घिसुलालजी बादामिया एवं श्रीमती पंपूबेन के घर जन्मे प्रदीप राठोड़ ने बहुत ही कम समय में ‘सेलो’ समूह के बहुत सफलतम उत्तराधिकारी के रूप में खुद को तो स्थापित किया ही, ‘सेलो’ को भी उन्होंने देश की सबसे वृहत्तम घरेलू उत्पाद की रेंजवाला ब्रांड बना दिया। आज ‘सेलो’ प्लास्टिक मोल्डेड घरेलू उत्पाद में देश की नंबर वन कंपनी है। आज ‘सेलो’ के उत्पादों की सालाना बिक्री 1500 करोड़ से भी ज्यादा है और 39 मिलियन अमरीकी डॉलर से भी ज्यादा के एक्सपोर्ट का कारोबार प्रदीप राठोड़ की कोशिशों का परिणाम है और यह भी कि बीते 15 सालों से लगातार हर साल ‘सेलोÓ को टॉप एक्सपोर्ट अवॉर्ड मिल रहा है। प्रदीप राठोड़ ने अपने पारिवारिक व्यवसाय में ओपलवेअर, मेलामाइन, किचन एप्लाइंसेज, एयर कूलर, बबल गार्ड, मोल्डेड फर्निचर, वेक्युमवेअर, हाउसवेअर थर्मोवेअर की अनेक रेंज विकस्त करके ‘सेलोÓ को देश की सबसे शिखर की कंपनी के रूप में ऊंचाई दी है। उन्होंने दुनिया की बेहतरीन तकनीक लाकर ‘सेलोÓ को आधुनिकता की उस राह पर खड़ा किया, जहां ‘सेलो’ आज 3000 कर्मचारियों की कंपनी है और ‘सेलो’ का सारा बिजनेस रिसर्च और विकास का मॉडल क्वालिटी कंट्रोल के प्रति उनकी समर्पित सोच का परिणाम है।

प्रदीप राठोड़ ने अपनी कंपनी का विकास करते हुए केंद्र शासित प्रदेश दमण, उत्तराखंड के हरिद्वार, हिमाचल प्रदेश के बड्डी, महाराष्ट्र के पुणे, गुजरात के पारड़ी, पश्चिम बंगाल के कोलकाता और तमिलनाड़ु के चेन्नई आदि में प्लांट्स स्थापित किए। जहां करीब 125 मिलियन अमरीकी डॉलर की लागत से दुनिया भर के देशों से आयातित अत्याधुनिक प्लास्टिक प्रोसेसिंग मशीनें स्थापित हैं। एक ब्रांड के रूप में ‘सेलो’ के कई प्रोडक्ट न केवल भारत में बल्कि युरोप के कई देशों में भी पेटेंटेड़ हैं। तकनीकी रूप से देखें, तो प्रदीप राठोड़ की कोशिशों का ही कमाल है कि ‘सेलो’ आज हाउसहोल्ड गुड्स प्रोडक्शन में देश की सबसे शिखर की कंपनी है, तो पीपी, पीई, पीसी, एसएएन, एबीएस और इलास्टोमर्स जैसे हर तरह के पॉलीमर्स प्रोसेसिंग करनेवाली कंपनी के रूप में भी देश में टॉप पर है। भारत में सर्वाधिक इंजेक्शन मोल्डिंग मशीनों वाली कंपनी भी ‘सेलो’ है और इंजेक्शन, एक्सट्रूशुन ब्लो आदि तकनीक से प्रोसेसिंग की क्षमतावाली कंपनी के क्षेत्र में भी देश की टॉप रेंक की कंपनी है। देश और दुनिया के विभिन्न स्थलों पर अपने सेल्स ऑफिस स्थापित करने के साथ ही अपने वेअरहाउस खोलकर प्रदीप राठोड़ ने ‘सेलो’ को ग्लोबल स्तर की कंपनी बनाया है। साथ ही अखिल भारतीय स्तर पर कई स्थापित कंपनियों के साथ मिलकर प्रदीप राठोड़ ने ‘सेलो’ ग्रुप को कंस्ट्रक्शन के क्षेत्र में भी एक नामी कंपनी के रूप में स्थापित किया है। ‘सेलो’ आज देश भर में कमर्शियल, रेजिडेंशियल और मॉल्स आदि निर्माण करनेवाली कंपनी के रूप में भी प्रतिष्ठित नाम है। लंबी सोच के साथ बहुत चिंतन के साथ फैसले लेकर अपने निर्णयों को बहुत तेजी से लागू करने के अपने विशिष्ट गुण के कारण ही प्रदीप राठोड़ ने सेलो को बहुत तेजी से विस्तार देते हुए, सेलो वल्र्ड के रूप में वैश्विक पटल पर स्थापित कर दिया।

संबंध जोडऩा भले ही हर किसी के लिए आसान हो, लेकिन जुड़े हुए संबंधों को हर हाल में निभाकर उनको लगातार मजबूती देते रहना हर किसी के बस की बात नहीं होती। लेकिन अपने व्यवसाय तरह ही प्रदीप राठोड़ संबंधों के मामले में बहुत सफलतम व्यक्ति के रूप में जाने जाते हैं। इसकी सबसे प्रखर मिसाल उनके संबंधों का व्यापक संसार है, जिसे उन्होंने बहुत मेहनत से संवारा है। उनके मित्रों की संख्या भले ही बहुत ज्यादा है, लेकिन वे हर जरूरी काम के लिए हर हाल में समय निकालते हैं, यह उनकी सबसे बड़ी खासियत है। अपने भाई पंकज राठोड के साथ मिलकर सेलो ग्रुप के विकास को नए आयाम देनेवाले प्रदीप राठोड सफल उद्यमी तो है ही, लेकिन धार्मिक, सामाजिक एवं शैक्षणिक विकास के कार्यों में भी वे हरसंभव सहयोग करने के लिए समाज में विख्यात हैं। वे समाज की शक्ति को समझते हैं, और समाज द्वारा मिले सम्मान के मोल को जानते हैं। लेकिन उनको यह भी पता है कि समाज में बहुत सारे लोग ऐसे भी हैं, जिनको जरूरतें रहती हैं। सो, अपने पिता घिसूलालजी राठोड़ की तरह ही हर तरह से, हर व्यक्ति की, हर संभव सेवा का भाव उनमें भी है। जैन कुल में जन्म लेने के कारण निश्चित रूप से जीवदया का भाव उनमें है, सो जीवदया उनकी प्राथमिकता में पहले नंबर पर भी है। लेकिन सामाजिक सहयोग के लिए वे सन 1991 में स्थापित अपने परिवार की संस्था बदामिया चेरिटेबल ट्रस्ट के अलावा भी कई सामाजिक संस्थाओं से सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। समाजसेवा के कार्यों को देखें, तो प्रदीप जैन साधु संतों की सेवा के लिए बनी श्रमण आरोग्यम संस्था के चेयरमेन रहे हैं। श्री जैन मूर्तिपूजक संघ (धरमचंद दयाचंद) सादडी, श्री आत्म वल्लभ सादडी (रणकपुर) भवन पालीतना, श्री जैन मित्र मंडल सादड़ी तथा श्री पाश्र्वनाथ शिक्षण संघ वरकाणा से भी जुड़े हुए हैं। बहुत छोटी सी उमर में ही वे जान गए थे कि महिला शिक्षा के बिना समाज के विकास की गति धीमी ही रहेगी, सो समय आते ही उन्होंने अपने इस सपने को साकार करने के लिए शैक्षणिक सहयोग के लिए भी अपना समय दिया।

राठोड़ परिवार द्वारा स्थापित एवं पोषित शैक्षणिक संस्थाओं में श्री उमरावबाई इंगलिश मीडियम विद्यालय वरकाणा, श्री धनराज श्रीचंदजी कन्या हायर सेकेंडरी विद्यालय सादड़ी एवं मुंबई के मालाड़ स्थित एमडी शाह कॉलेज में एक विशेष विंग प्रमुख हैं। इनके अलावा एसपीयू कॉलेज फालना, मरूधर महिला शिक्षण संघ (विद्यावाड़ी खिमेल) आदि शैक्षणिक संस्थाओं के विकास एवं संचालन में भी उनका विशेष सहयोग हमेशा रहता है। प्रदीप राठोड़ जानते हैं कि स्वस्थ समाज ही तेजी से आगे बढ़ सकता है। इसके लिए वे स्वास्थ्य सेवाओं में सहयोगी के रूप में भी हमेशा प्रबलता से आगे रहे हैं। राजस्थान के सुमेरपुर स्थित भगवान महावीर हॉस्पिटल में उनके द्वारा स्थापित कैंसर सेंटर प्रदीप राठोड़ की समाज के प्रति सहयोग की सोच का उदाहरण है। वे विश्व की सबसे प्रमुख जैन संस्था जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (जीतो) के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं और जैन परिवारों के प्रतिभाशाली छात्रों के लिए आइएएस, आइपीएस, आइआरएस, आइएफएस जैसी प्रशासनिक सेवाओं के लिये प्रशिक्षण केंद्र संचालित करनेवाली संस्था जीतो एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रेनिंग फाउंडेशन (जेएटीएफ) के अध्यक्ष भी रहे हैं। उनकी धर्मपत्नी श्रीमती संगीता राठौड़ उनके हर कार्य में पूरा सहयोग देती हैं। उनके पुत्र गौरव राठौड़ भी दादा एवं पिता के पद चिन्हों पर अग्रसर हो रहे है। उनकी पुत्री करिश्मा जिसकी शादी हाल ही में संपन्न हुई हैं वे अपने ससुराल में अपनी जिम्मेदारी निभा रही है।

हर किसी को आकर्षित करते चुंबकीय व्यक्तित्व के धनी प्रदीप राठोड़ कहते हैं कि ‘शताब्दी गौरव’ जैन समाज का ‘नंबर वन’ समाचार पत्र है। समाजसेवा, जीवदया और धार्मिक कार्यो में सहयोग के संस्कार उन्हें परिवारिक विरासत में मिले हैं। उनके पिता घीसूलाल राठोड़ का बहुत बड़े समाजसेवी के रूप में समाज में सम्मान है। पिता सामान्य से कारोबारी से सफर शुरू करके आगे बढ़े, तो पुत्र प्रदीप राठोड़ ने अपने संस्कारों से पिता की पुण्यता को अपनी प्रबलता के प्रताप से आगे बढ़ाया है। समस्त समाज में उनके पिता को बुलंद इरादोंवाले एक दृढ़ प्रतिज्ञ अटल योद्दा के रूप में जाना जाता है। और प्रदीप राठोड़ उन्हीं के पदचिन्हों पर चलकर अपने सौम्य और सरल व्यवहार से समाज के शिखर पर छाए हुए हैं। वे कहते हैं कि सपने देखो, उनको पूरा करने के लिए हर मेहनत करो और जिंदगी को ख्वाब सी खूबसूरत बनाओ।