पालीताणा: रोप वे बनने से खतरे में पड़ जाएगा जैन धर्म?

पालीताणा: रोप वे बनने से खतरे में पड़ जाएगा जैन धर्म?

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-विशेष संवाददाता-

पालीताणा। जैन धर्म का यह पवित्र तीर्थ एक बार फिर खबरों में है। पालीताणा देश ही नहीं, दुनिया के हर जैन के दिलों में बसता है। लेकिन यह तीर्थ जितना अपनी धार्मिक अहमियत से खबरों में रहा है, उससे कहीं ज्यादा धर्म पर आंच आने की आशंकाओं से खबरों में रहा है। ताजा, खबर यह है कि पालीताणा में रोप वे की योजना का जैन समाज के लोग विरोध कर रहे हैं। जैन समाज का कहना है कि पालीताणा तीर्थ है, कोई पर्यटन स्थल नहीं। ऐसा सख्त विरोध हो रहा है, जैसे पालीताणा में रोप वे बनने से जैन धर्म खतरे में पड़ जाएगा।

गुजरात के भावनगर जिले में स्थित पालीताणा में रोप वे स्थापित करने से पर्यावरण को क्या नुकसान होगा एवं स्थानीय रोजगार पर क्या असर पड़ेगा, भावनगर के जिला कलेक्टर ने इस बारे में रिपोर्ट मांगी है। इसकी भनक लगते ही पूरा जैन समाज रोप वे के विरोध में खड़ा हो गया है। पालीताणा की व्यवस्थापक आनंदजी कल्याणजी पेढ़ी ने विरोध दर्ज किया है। शत्रुंजय नदी के तट पर शत्रुंजय पर्वत पर होने से इसे शत्रुंजय तीर्थ भी कहा जाता है। जैन शास्त्रों में इसे सिद्दाचल भी कहा गया है। दर्शन के लिए लोग पहाड़ पर या तो पैदल जाते हैं, या फिर डोली में बैठकर पहाड़ पर पहुंचते हैं। पहाड़ पर चढ़ाई की इसी तकलीफ को कम करने के लिए हस्तगिरि तीर्थ से पालीताणा तक रोप वे बनाने की योजना है। इससे लोगों को सुविधा होगी व समय भी बचेगा। लेकिन रोप वे बन जाने से पालीताणा पर्यटन स्थल बन जाएगा और जैन धर्म खतरे में पड़ जाएगा, ऐसा माना जा रहा है।

पालीताणा में हर साल अनेक विशाल धार्मिक आयोजन होते हैं तथा लाखों दर्शनार्थी यहां आते हैं। कोई हवाई जहाज से उडक़र, तो कोई ट्रेन में चढक़र। कोई कार में बैठकर तो कोई मोटर साइकिल की सवारी करके। कभी कभार आनेवाले छरी पालित संघ एवं साधु साध्वियों के अलावा पालीताणा कोई भी श्रद्दालु पैदल नहीं पहुंचता। तीर्थयात्री यहां एयरकंडीशंड कमरों में ठहरते हैं। कमरों में डबल बैड पर पति पत्नी एक साथ सोते हैं। रेस्टोरेंट्स में रात को भी खाते हैं। कोल्ड ड्रिंक पीते हैं, और पानी भी बोतलबंद पीते हैं। गरीब मजदूरों के कंधों पर बैठकर या दो कमजोर गरीबों के कंधों पर रखी डोली में बैठकर शत्रुंजय पर्वत पर दर्शन करने जाते है। सालों सालों से ऐसा होता आया है। इसके बावजूद न तो धर्म खतरे में पड़ता है और न ही उसे कभी कोई ठेस पहुंची। फिर, आरामतलब जिंदगी जीनेवाले जो लोग पालीताणा जैसे पवित्र धार्मिक स्थल पर भी धार्मिक परंपराओं का निर्वहन नहीं कर पाते, वे पालीताणा में रोप वे बनाए जाने का विरोध कर रहे हैं।  सवाल यह  है कि बहुत वृद्ध, छोटे बच्चे व कमजोर लोग भी रोप वे बनने से पवित्र शत्रुंजय की तीर्थयात्रा कर लेंगे, तो कौन सा पाप हो जाएगा ? ऐर सवाल यह भी है कि क्या पालीताणा में सिर्फ रोप वे बन जाने से ही जैन धर्म खतरे में पड़ा जाएगा ? यह आप तय कीजिए।