कु. सानिया जैन का कत्थक रंगमंच प्रवेश

कु. सानिया जैन का कत्थक रंगमंच प्रवेश

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मुंबई। तालियों की गूंज, परिवार, गुरु, मित्रजनों, रिश्तेदार और शुभेच्छकों की वाहवाही से ओतप्रोत एक भावुक और कला के जादू से भरपूर माहौल के बीच खीमेल – वालकेश्वर निवासी नीता अरुणकुमार जैन (खिंवेसरा) की पौत्री और सोनल जयेश जैन की पुत्री कु. सानिया ने अपने रंगमंच प्रवेश कार्यक्रम का प्रदर्शन पिछले दिनों वाय. बी. चव्हाण ऑडिटोरियम, मुंबई में किया। सानिया ने कत्थक नृत्य कला को जयपुर घराना शैली में पेश किया। इस शैली में शक्तिशाली ततकार, कई चक्कर और विभिन्न ताल में जटिल रचनाओं के रूप में नृत्य के अधिक तकनीकी पहलुएँ महत्वपुर्ण है। आठवी कक्षा में पढने वाली सानिया ने 6 वर्ष की आयु में ही एक कत्थक कलाकार बनने के सफऱ की शुरुआत कर दी थी। अपनी कड़ी मेहनत और अथक प्रयासों की बदौलत सानिया ने अपने पहली नृत्य प्रदर्शनी में सबका दिल जीत लिया। अपनी गुरु श्रीमती ज्योति चंदिवाले की शिक्षा और अपने परिवार के आशीर्वाद के साथ सानिया जैन ने कत्थक नृत्य में अपने पहले पड़ाव को हासिल कर लिया है। रंगमंच प्रवेश का अर्थ नाम से ही पता चल जाता है। 7 वर्षों के परिश्रम और प्रयासों के बाद एक कत्थक कला की शिष्या दर्शकों के आगे मंच पर पहली बार अपनी कला का प्रदर्शन करती है। अपने पहले मंच प्रदर्शन में सानिया जैन ने विभिन्न मुद्राओं को प्रस्तुत किया। नटेश वंदना, नवकार मन्त्र, दुर्गा स्तुति, ताल-चौताल, दशावतारा (भगवान् विष्णु के दस अवतार), तराना और थाली नृत्य द्वारा सानिया जैन ने अपने नृत्य कला से पुरे ऑडिटोरियम को मंत्र-मुग्ध कर दिया। पढ़ाई के साथ इस कठिन और अद्भूत नृत्य कला में भी निपुण कु. सानिया जैन और पुरे खिंवेसरा परिवार को शताब्दी गौरव की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं।