गुजरात में असल जीत तो राजस्थान की हुई

गुजरात में असल जीत तो राजस्थान की हुई

SHARE
गुजरात की राजनीति की रंगत बदलने वाले अशोक गहलोत, ओमप्रकाश माथुर, भूपेंद्र यादव, नीरज डांगी, तारा भंडारी

विशेष संवाददाता द्वारा

अहमदाबाद। गुजरात में बीजेपी जीतकर भी हारी और कांग्रेस हार कर भी जीती। बीजेपी और कांग्रेस, दोनों ही पार्टियों की हार-जीत में राजस्थानी नेताओं की असल जीत के रूप में देखा जा रहा है। क्योंकि अशोक गहलोत, ओमप्रकाश माथुर, भूपेंद्र यादव, मंगल प्रभात लोढ़ा, तारा भंडारी, नीरज डांगी, ताराचंद भगोरा, पुखराज पाराशर, अश्क अली टाक, जैसे राजस्थानी नेताओं और सौरभ व्यास, निरंजन परिहार एवं धवल वसावड़ा जैसे राजस्थान मूल के चुनावी रणनीतिकारों की गुजरात के चुनाव में जबरदस्त भूमिका रही। इसी कारण गुजरात के इस चुनाव को इसी साल आखिर में राजस्थान में होनेवाले विधानसभा चुनावों की रिहर्सल के रूप में देखा जा रहा है।

राजस्थान से कुल करीब दस हजार से भी ज्यादा छोटे बड़े नेता और कार्यकर्ता गुजरात विधानसभा चुनाव में दोनों ही पाॢटयों में महत्वपूर्ण रोल में थे। कांग्रेस की कमान राजस्थान के सबसे बड़े नेता और गुजरात कांग्रेस के प्रभारी अशोक गहलोत के हाथ में थी। तो बीजेपी की राजनीतिक बिसात पर सियासत संवारने की जिम्मेदारी राज्यसभा सांसद भूपेंद्र यादव के जिम्मे थी। गहलोत और यादव दोनों ही अपनी अपनी पार्टियों में महासचिव हैं। बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओमप्रकाश माथुर भी आखरी दौर में गुजरात में मोर्चा संभालने पहुंचे थे। मुंबई के वरिष्ठ विधायक मंगल प्रभात लोढ़ा के जिम्मे दक्षिण गुजरात में बीजेपी को जिताने की जिम्मेदारी थी, तो उत्तर गुजरात में भाजपा के लिए तारा भंडारी, वीरेंद्र सिंह सिरोही, कांग्रेस के लिए नीरज डांगी, बद्री जाखड़, महेश जोशी आदि मोर्चा संभाले हुए थे।

अशोक गहलोत करीब 150 से भी ज्यादा नेताओं का अमला लेकर गुजरात की रणभूमि में उतरे थे। तो बीजेपी के भी इतने ही काबिल राजस्थानी नेता गुजरात में थे। गहलोत और यादव बडे पैमाने पर बहुत पहले ही अपनी अपनी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को गुजरात बांट चुके थे। इसलिए गुजरात में हार और जीत को दोनों पार्टी के नजरिये से नहीं, बल्कि राजस्थानी नेताओं की रणनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है।

कांग्रेस और बीजेपी, दोनों के चुनावी विश्लेषण, चुनाव प्रबंधन और प्रचार-प्रसार के काम में भी राजस्थान के जानकार लोग ही प्रमुख भूमिका में थे। राजनीतिक विश्लेषक निरंजन परिहार बीजेपी के लिए प्रचार-प्रसार एवं मीडिया प्रबंधन का काम कर रहे थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की दक्षिण गुजरात की बड़ी बड़ी रैलियों के मीडिया प्रबंधन में परिहार एवं उनकी टीम की प्रमुख भूमिका थी। इसी तरह चुनावी रणनीति के गहन जानकार एवं चुनाव प्रबंधन में जबरदस्त अनुभव रखनेवाले सौरभ व्यास एवं धवल वसावड़ा गुजरात में कांग्रेस के लिए रणनीति गढऩे के काम में थे। करीब 150 प्रशिक्षित युवाओं के साथ ‘पॉलिटिकल एज’ के सौरभ व्यास एवं धवल वसावड़ा की टीम ने चुनाव के हर पल का अपडेट कांग्रेस के नेताओं तक पहुंचाने का काम किया। गुजरात चुनाव के बाद पॉलिटिकल एज को कांग्रेस में प्रशांत किशोर के पर्याय के रूप में स्वीकारा जाने लगा है। इन्हीं की विधानसभा वार गहन रिपोर्टिंग पर कांग्रेस चलते चुनाव में भी अपनी रणनीति बदलते रहने में कामयब रही एवं इसी कारण कांग्रेस की सीटें बढ़ी।

राजनीतिक विश्लेषक सौरभ व्यास एवं निरंजन परिहार चुनाव प्रबंधन में जुटे रहे।