जैन संतों ने किया चातुर्मासिक मंगल प्रवेश, जगह-जगह हुआ स्वागत

जैन संतों ने किया चातुर्मासिक मंगल प्रवेश, जगह-जगह हुआ स्वागत

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नाड़ोल में पुरुषों के साथ महिलाओं ने भी बांधी पगड़ी, गुरु चरणों में किया वंदन

देसूरी। जैन श्वेताम्बर देवस्थान पेढ़ी एवं जैन संघ ट्रस्ट मंडल नाड़ोल के तत्वावधान में आयोजित चातुर्मास को लेकर जैन संतों के स्वागत के लिए जैन समाज सहित अन्य समाज के लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा। धूमधाम के साथ चातुर्मास को लेकर जैन संतो का नाडोल नगर में प्रवेश हुआ। रुपमुनि धर्मशाला से जैन पेढ़ी तक गाजे बाजे के साथ नाचते गाते हुए जैन समाज के लोग संतों का वरघोडा के रुप में लेकर गये। कस्बे में इस बार जैन श्वेतांबर देवस्थान पेढ़ी व जैन संघ एवं ट्रस्ट मंडल एवं चातुर्मास समिति तथा जैन सोश्यल ग्रुप नाडोल के तत्वावधान में चातुर्मास महोत्सव आयाजित किया जा रहा है। जिसकों लेकर जैन समाज सहित ग्रामीणों चातुर्मास को लेकर भारी उत्साह है। चातुर्मास को लेकर जैन संत मुनिवर्य श्री विश्वोदय कीर्तिसागर महाराज एवं साध्वीवर्या ललित प्रभाश्री महाराज म.सा. नगर में प्रवेश कार्यक्रम आयोजित किया गया। सुबह चुनरी के साफा बांधे महिलाओं एवं पुरुषों ने जिन शासन के जैकारे लगाते हुए शोभायात्रा निकाली। पहले जैन धर्म के अनुसार समाजबंधुओं ने संतो की पूजा अर्चना कर उन्हें नगर में प्रवेश करने का आग्रह किया। उसके बाद नगर में प्रवेश करते ही जैन समाज के लोगों को गुरु भगवंतो का स्वागत किया।

महिलाओं ने सिर पर बांधे चुनरी के साफे

चातुर्मास को लेकर जैन संतो द्वारा नाड़ोल नगर में प्रवेश को लेकर जैन समाज के लोग स्वागत करने के लिए चौराहे पर पहुंचे। जिसमें पुरुषों के साथ महिलाओं ने भी सिर पर साफे बांध रखे थे। नाडोल सरपंच यशोदा वैष्णव के नेतृत्व में ग्रामीणों ने भी गुरु भगवंतों का स्वागत किया। चातुर्मास महोत्सव में सहयोग देने वाले जैन समाज के लोगों का श्री जैन श्वेतांबर देवस्थान पेढ़ी नाड़ोल और चातुर्मास समिति द्वारा दोपहर में बहुमान किया गया।

पंजाबी बैंड व घोड़ा नृत्य रहा आकर्षक

वरघोडा में घोड़ो का नृत्य के साथ पंजाबी बैंड और गैर नृत्य आकर्षक का केंद्र रहे। उसके बाद श्री संघ में मांगलिक को लेकर साकूहिक आयंबिल का आयोजन किया गया। दोपहर में पंचकल्याणक पूजा अर्चना हुई। श्री जैन श्वेतांबर देवस्थान पेढ़ी नाडोल के अध्यक्ष राजेन्द्रकुमार फतेहचंद मंडलेशा ने बताया कि इस अवसर पर माणेक मेहता एवं पारसमल पारेख उपाध्यक्ष, जयंतिलाल नाहर एवं अशोककुमार राठौड़ सचिव, दिनेशकुमार मंडलेशा व प्रदीप कुमार पावेशा कोषाध्यक्ष सहित कार्यकर्ता व ग्रामीण मौजूद थी।

चातुर्मास में बनते हैं प्रभु के साथ संबंध: कीर्ति सागर – चातुर्मास को लेकर नाड़ोल में आयोजित गुरु भगवंतों के नगर में प्रवेश कार्यक्रम के तहत प्रवचन देते हुए जैन संत मुनि प्रवर श्री विश्वोदय कीर्तिसागर महाराज ने कहा कि चातुर्मास आराधना जरुरी ही नहीं बल्कि अनिवार्य है। चातुर्मास में हम सभी जिनवाणी श्रमण कर प्रभु को पा सकते है। चातुर्मास ही प्रभु के साथ संबंध बनाने का एक अनुपम अवसर है। भले ही विचारों में भिन्नता हो सकती है मगर संबंधो में कोई भिन्नता नहीं हो सकती है।

 

गोडवाड़ दीपिका साध्वी श्री ललितप्रभाश्रीजी ‘लहेरो महाराज’

जन्म: वीर सं. २४६६, शाके १८६१, वि.सं. १९९६, माघ सुदी ५, ( वसंत पंचमी) फरवरी, १९४०

जन्म नाम: लेहरोबेन, जन्मस्थान : रानीगांव

माता: अनछीबाई (अंसीबाई), पिता: श्री हीराचंदजी खांटेड

शादी: रोडला (भूति) निवासी श्रीमान जसराजजी रतनचंदजी पुनमिया

शादी होने के बाद बारात वापस लौटते समय रास्ते में ही पति का स्वर्गवास।

सं. २००९ जेठ सुदी ९, कुंवारी १. शादी के प्रथम दिन कु. लेहरोबेन थी।

सं. २००९ जेठ सुदी १० विवाह २. शादी के बाद (शादी के दिन) सौ. लेहरोबेन

सं २००९ जेठ सुदी ११ विधवा ३. शादी के बाद तीसरे दिन श्रीमती लहरोबेन हो गई।

अर्थात जीवन में तीन भव देखे – कुंवारी, सौभाग्यवती, विधवा। अपने जीवन के कष्टों को मुक्ति दिलाने कालांतर में अपने संयम मार्ग स्वीकारा।

दीक्षा: वीर नि. सं. २४८४ शाके २४८४ शाके. १८७९ वि.सं. २०१४ आषाढ वदी १०, जून्र १९५८ दीक्षा प्रदाता गुरु: पु.मु. श्री मंगलप्रभविजयजी गुरु: सा. श्री सुशालाश्रीजी, गुरुणी: सा. श्री भक्तिश्रीजी।

नामकरण: सा. श्री ललितप्रभाश्रीजी म.सा. उर्फ लहेरो महाराज

तीर्थ निर्माण: श्री शंकेश्वर पाश्र्वनाथ तीर्थ धाम (लहेरो धाम) बिरामी ढाणी (राज.)

शीषयरत्ना: दीक्षा लेते समय ३ साध्विया थी। आज शिष्या-प्रशिष्या कूल १४० साध्वियों का सबसे बड़ा परिवार है।

पद: गोडवाड़ दीपिका, शासन ज्योति।