इसलिए बहुत याद आ रहे हैं मिलिंद देवड़ा!

इसलिए बहुत याद आ रहे हैं मिलिंद देवड़ा!

SHARE

मुंबई। लोकसभा चुनाव मे अभी तो बहुत वक्त बाकी है, लेकिन दक्षिण मुंबई की जनता को मिलिंद देवड़ा अभी से याद आने लगे हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में मतदाताओं ने मोदी लहर में बहकर दक्षिण मुंबई में शिवसेना के अरविंद सावंत को जिता तो दिया, लेकिन मतदाताओं को निराशा ही हाथ लगी है। साढ़े तीन साल बीत गए, इसलिए अब जब मतदाता मिलिंद देवड़ा और वर्तमान सांसद के बीच तुलना करते हैं, तो महसूस करते हैं कि शिवसेना दक्षिण मुंबई में व्यापारिक समाज के मतदाताओं का वोट लेकर जीत तो गई, लेकिन किया क्या। दक्षिण मुंबई व्यापारिक समाज का गढ़ रहा है। लेकिन शिवसेना के वर्तमान सांसद दक्षिण मुंबई के व्यापारिक समाज के बीच कितने सक्रिय हैं, इसका इसी से पता चलता है कि यहां के ज्यादातर व्यापारी लोग उनका नाम भी नहीं जानते। इसके ठीक उलट, अब उन्हें मिलिंद देवड़ा की सक्रियता, उनका लोगों से जुड़ाव और उनकी सेवा और सहयोग करने की परंपरा निभाने के साथ बहुत कुछ और भी याद आ रहा है।

दक्षिण मुंबई की व्यापारिक जनता के बीच वर्तमान सांसद की उपस्थिति न के बराबर है, जबकि मिलिंद देवड़ा सहित बीजेपी के कुछ नेता काफी सक्रिय हैं। मिलिंद देवड़ा मजबूत इरादोंवाले नेता हैं। वे युवा हैं, सुदर्शन व्यक्तित्व के धनी हैं और संस्कारी तो हैं ही, विरासत के वारिस भी हैं। देश के दिग्गज नेता रहे मुरली देवड़ा की राजनीतिक विरासत को जस का तस संभाले हुए हैं। व्यापारिक समाज की हर मुश्किल में वे हमेशा खड़े रहे हैं। व्यापारियों के हित में वे उनकी अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने से भी नहीं चूके। साथ ही समाज से उनका जुड़ाव बहुत मजबूत है। और राजनेता होने के नाते लोगों के बीच रहने की अपनी पहली जिम्मेदारी को सत्ता में न रहते हुए अब भी वे वैसे ही निभा रहे हैं, जिस तरह से वे सांसद के नाते निभा रहे थे।

मिलिंद देवड़ा दो बार सांसद रहे और केंद्र सरकार में मंत्री भी रहे। लेकिन पूरे देश के मंत्री होने के बावजूद देवड़ा की अपने चुनाव क्षेत्र में सक्रियता में कोई कमी नहीं आई। उसके बाद सांसद न होने के बावजूद देवड़ा लगातार लोगों के काम करवा रहे हैं। इसी कारण वर्तमान सांसद और देवड़ा के बीच तुलना करते हुए लोगों को अहसास हो रहा है कि पिछली बार मोदीजी की हवा में बहकर बड़ी गलती की। दक्षिण मुंबई की व्यापारिक जनता का दिल इसलिए भी दुखी है, क्योंकि जिस शिवसेना को मोदीजी के नाम पर जिताया वह शिवसेना तो मोदीजी को हर मोके बे मौके लगातार बुरा भला कहती रहती है। दक्षिण मुंबई के लोग अब तुलना करने लगे हैं। देखा जाए, तो मिलिंद देवड़ा की सक्रियता लगातार बढ़ी है। एक जनप्रतिनिधि के नाते शिवसेना सांसद बीते सीन सालों में व्यापारिक समाज के जितने कार्यक्रमों में शामिल हुए होंगे, उससे दस गुना ज्यादा कार्यक्रमों में मिलिंद देवड़ा शरीक हुए हैं। हालांकि सत्ताधारी दल के लोगों की स्वीकारोक्ति समाज में आमतौर पर ज्यादा होती है, लेकिन मिलिंद देवड़ा अब सांसद नहीं है, फिर भी समाज में उनकी स्वीकारोक्ति पहले जैसी ही है। बल्कि सच तो यह है कि पूर्व सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री होने के बावजूद वर्तमान सांसद के मुकाबले देवड़ा ज्यादा सम्मान से देखा जाता है। इसकी सबसे बड़ी वजह यही है कि वे संस्कारी युवा नेता है, जिन्होंने समाजसेवा के द्वारा राजनीति में कदम रखा और अपने पिता मुरली देवड़ा के नक्शे कदम पर चलकर समाज में अपनी मजबूत पैठ बनाई।