इस साल पहले से ज्यादा सफल रहा आईआईजेएस

इस साल पहले से ज्यादा सफल रहा आईआईजेएस

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भारत का सबसे बड़ा बी टू बी रत्न और आभूषण शो, इंडिया इंटरनेशनल ज्वेलरी शो (आईआईजेएस), का 34 वां संस्करण संपन्न हुआ। प्रदर्शनी का आयोजन रत्न और आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी) द्वारा  27-31 जुलाई, 2017 को मुंबई प्रदर्शनी केन्द्र, गोरेगांव में आयोजित किया गया।  आईआईजेएस एशिया का सबसे बड़ा रत्न और आभूषण व्यापार शो है। आईआईजेएस 5-दिवसीय बी 2 बी इवेंट हैं। और एक बड़ा मंच है, जो आभूषण उद्योग को विभिन्न बहुआयामी पहलुओं को तलाशने का एक उत्कृष्ट अवसर प्रदान करता है।

आईआईजेएस लगभग 1,200 प्रदर्शकों, 2,000 बूथ, 53,500 वर्ग फुट, दुनिया भर के ८० देशों और 800 से अधिक भारतीय शहरों / कस्बों से 35,000 से अधिक व्यापार आगंतुकों की भागीदारी से एक भव्य रूप ले चुका हैं। भारत के प्रमुख शो के रूप में, आईआईजेएस सोने, हीरे, चांदी और रंगीन पत्थरों में भारत की विशेषज्ञता और शिल्प कौशल का सबसे अच्छा मंच प्रदान करता है। मशीनरी शो को 28 से 31 जुलाई, 2017 के बीच होटल ललित मुंबई (अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास) में 120 प्रमुख कंपनियों और बूथों के साथ आयोजित किया गया था।

आईआईजेएस 2017 का उद्घाटन प्रवीणशंकर पांड्या (अध्यक्ष, जीजेईपीसी), रसेल मेहता (उपाध्यक्ष, जीजेईपीसी), सब्यसाची रे (ईडी, जीजेईपीसी) और सौनक पारिख (संयोजक – राष्ट्रीय प्रदर्शनी उप-समिति, जीजेईपीसी) के करकमलों से देशभर से आए कई महानुभावों की उपस्थिती में हआ। उद्घाटन समारोह में वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के संयुक्त सचिव मनोज द्विवेदी ने कहा कि आभूषण उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने और आभूषण निर्यात को बढ़ावा देने के क्रम में आने वाले वर्षों में उच्च स्तर की उपलब्धियों को प्राप्त करने की आवश्यकता है। ज्वैलरी इंडस्ट्री एकमात्र क्षेत्र है जो कुशल और अकुशल कामगारों के लिए अधिकतम रोजगार के अवसर प्रदान करता है। सरकार इस क्षेत्र को बेहतर बनाने के तरीके तलाश रही है और इसके लिए विभिन्न नीतियों की पहल कर रही है। जीजेईपीसी के अध्यक्ष प्रवीणशंकर पांड्या कहा कि मैं आईआईजेएस के लिए लगातार बढ़ती प्रतिक्रिया से अभिभूत हूं तथा इस शो ने भारतीय आभूषण उद्योग को एक अलग स्तर पर खड़ा कर दिया है।

भारत का रत्न और आभूषण उद्योग में विश्व नेता बने, नरेन्द्र मोदी के इस विजन पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 तक भारत में समग्र रत्न और आभूषण उद्योग में एक वैश्विक नेता के रूप में भारत को ले जाने के रास्ते पर हम अग्रसर है। आईआईजेएस 2017 के भी जीजेईपीसी ने डायमंड प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (डीपीए) के साथ एक समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए।

पहले दिन से प्रदर्शनी आगंतुकों और खरीदारों के साथ गूंज रही थी। जैसे ही आईआईजेएस ने प्रदर्शकों के लिए अपने दरवाजे खोले, आगंतुकों के उत्साह को कोई सीमा ही नही रही।  हवा में उत्साह था क्योंकि आईआईजेएस संग्रहण और आगामी वेडिंग सीजन के लिए महत्वपूर्ण है। रत्न और आभूषण उद्योग नोटबंदी और जीएसटी के बाद आई चुनौतियों से लडऩे की कोशिश कर रहा है। पर सभी पांचों दिनों के दौरान शो में दिखे जोश को देखकर एक चीज काफी स्पष्ट थी कि उद्योग में कभी न खत्म होने वाला उत्साह है।

सोने और आभूषण सेक्शन हर ढ्ढढ्ढछ्वस् के तारे होते हैं और इस साल भी कुछ एक अलग नहीं हुआ। सोने के गहने और जड़े हुए गहनों के प्रदर्शकों ने सबसे अधिक फूटफॉल देखा और तेज कारोबार किया।