अहिंसा विश्व भारती द्वारा विश्व शांति व सद्भाव सम्मेलन संपन्न

अहिंसा विश्व भारती द्वारा विश्व शांति व सद्भाव सम्मेलन संपन्न

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मुंबई। बौद्ध धर्म गुरु दलाई लामा ने सामाजिक और धार्मिक सौहार्द्र को भारत की दौलत करार दिया। उन्होंने कहा कि भारत में जितना सामाजिक और धार्मिक सौहार्द्र है, उतना किसी देश में नहीं है। उन्होंने कहा कि 58 साल से भारत में रहने के दौरान उन्होंने यह महसूस किया है। अहिंसा विश्व भारती द्वारा विश्व शांति व सद्भाव सम्मेलन में चीन को लेकर दलाई लामा और बाबा रामदेव के विचारों में जमीन-आसमान का अंतर देखा गया। इसमें दलाई लामा ने कहा कि चीन और भारत को मानव विकास के लिए एक साथ काम करना चाहिए। बौद्ध धर्म दोनों देशों को जोड़ता है। जबकि रामदेव ने कहा कि चीन शांति में विश्वास नहीं रखता। अगर ऐसा होता, तो दलाई लामा भारत में नहीं होते।

चीन की वस्तुओं का बहिष्कार करें: रामदेव ने कहा कि आध्यात्मकता को सभी मजहब मानते हैं। वस्त्रों के रंगों में अंतर हो सकता है, लेकिन सभी धर्मों के चरित्र और विचार में भेदभाव नहीं होता है। इसलिए शिक्षा संस्थानों में सभी मजहबों का मूल तत्व सिखाना चाहिए। इसके लिए हम प्रयत्न करेंगे। उन्होंने कहा कि चीन को योग और शांति की भाषा समझ में नहीं आती है, तो उसे युद्ध की भाषा में जवाब देना होगा। उन्होंने कहा कि भारत के 20 लाख करोड़ रुपये की अर्थव्यवस्था पर चीन का कब्जा है। चीन को सबक सिखाने के लिए हम भारतीयों को चीनी वस्तुओं का बहिष्कार कर देना चाहिए।

मतभेद को मनभेद में न बदलें: अहिंसा विश्व भारती के संस्थापक जैनाचार्य डॉ. लोकेश मुनि ने कहा कि विश्व में शांति और सद्भाव बनाने के लिए अंतरधर्मीय संवाद का आयोजन होते रहना चाहिए। यह राष्ट्र व समाज के लिए कल्याणकारी है। उन्होंने कहा कि धर्म के क्षेत्र में हिंसा, घृणा, नफरत का कोई स्थान नहीं हो सकता है। बातचीत से हर समस्या को सुलझाया जा सकता है।

भारत धार्मिक एकता का पक्षधर: पियूष गोयल ने कहा कि भारत धार्मिक एकता का पक्षधर है। यहां पर दिवाली, ईद और क्रिसमस सभी धर्म के लोग मिलजुलकर मनाते हैं। भारतीय सभ्यता को धर्मगुरुओं के माध्यम से विश्व में फैलाकर विश्व में शांति व सद्भावना की स्थापना हो सकती है। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन, पुरुषोत्तम रुपाला, जैनाचार्य कुलचंद्र सुरीश्वर महाराज, नम्र मुनि, सिख धर्म गुरु अकालतख्त के प्रमुख जत्थेदार ज्ञानी गुरुबचन सिंह, अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष और इस्लाम के विद्वान डॉ. कल्बे सादिक, इसाई धर्म के आर्चबिशप फेलिक्स मव्हादो सहित कई जानी मानी हस्तियां मौजूद थीं।