सेसली तीर्थ में श्रीपद्मशिला का लाभ पुनमिया परिवार को

सेसली तीर्थ में श्रीपद्मशिला का लाभ पुनमिया परिवार को

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सेसली तीर्थ राजस्थान के प्राचीनतम अलौकिक तीर्थो में से एक है। हर माह की पूर्णिमा को सैकड़ो धर्मपरायण जैन-जगत के यात्री, दादा की सेवा-पूजा-अर्चना, ध्यान कर, दादा में अेकाकार होने, तीर्थ में आकर पुण्यशाली बनते हैं। सेसली तीर्थ का जीर्णोद्धार, कायाकल्प, और नूतनीकरण बाली – श्री मनमोहन पाश्र्वनाथ जैन पेढ़ी (ट्रस्ट) के अन्तर्गत हो रहा है। मूलनायक अलौकिक पाश्र्वनाथ प्रभू की प्रतिमा को मूलस्थान में ही बिराजित रखकर, खनन, भूमिपूजन, शीला स्थापन हुआ, जो जैन इतिहास में स्वर्णाक्षरों से लिखने योग्य बेजोड अध्याय है। जिसमें बाली के धर्मप्रेमीयों ने अमूल्य लाभ लेकर इस प्रसंग को ऐतिहासिक बनाया।

प.पू. पन्यास प्रवर एवं वर्तमान आचार्य भगवंत श्री चिदानंदजी म.सा. की पावन निश्रा में सेसली तीर्थ में इस पूर्णिमा के अवसर पर अच्छी खासी मेदनी में श्रीपद्मशिला विराजित करने का चढ़ावा बोला गया, और जिसके भाग्यशाली रहे सांडेराव के रतनचंद कुंदनमलजी पुनमिया परिवार। २ दिन पश्चात ही शुभ मूहर्त में विधिविधान सह पद्मशिला गूढ मण्डप में जहाँ श्री मूलनायकजी बिराजित है, उसी खण्ड में करनी है। ट्रस्ट मंडल ने जोर-शोर से तेयारी करने के बाद दि. १४-५-१७ को वाजते गाजते, साफा शिरपां के साथ हर्षोल्लास से परिवार जनों का मंदिर परिसर में प्रवेश कराया। विधिकारको द्वारा निर्देशित पूजा, पूजन के साथ १४-१५ फुट की ऊंचाई पर बने मंच पर प.पू. आचार्य भगवंत श्री चिदानंदजी के मांगलिक उद्घोषों, बड़ी संख्या में उपस्थित जन-मेदनी के जयघोषों, जयकारों, घंटनादों, बैंड ढोल-बाजो, तालीयों की ताल के साथ नृत्य करते नर-नरीयों के आनंदोत्साहित समूहो, सोमपूरा द्वारा घडित पद्म नक्श पद्मशिला का रोपण पुनमिया परिवार एवं अन्य भाग्यशालीओं के हाथों सम्पन्न हुआ। मंदिरजी का गूढ मण्डप ढका गया। और अब आगे शिखर का शुभारंभ हो सके। आराधना भवन में रतनचंद कुंदनमलजी पुनमिया परिवारजनों का बहुमान श्री मनमोहन पाश्र्वनाथ जैन ट्रस्ट द्वारा साफा, शाल, भालतिलक, श्रीफल, माला से अध्यक्ष महोदय बाबुलाल मंडलेचा (मीठीमां) एवं साथी ट्रस्टीयों ने किया। उनके पुत्र नितीनकुमार का बहुमान ट्रस्टी बाबुभाई राठौड एवं दीपचंदजी ट्रस्टीजनों ने किया। महिलावर्ग में धर्मपत्नी सौ कमलादेवी, अलकाबेन, सौ. शशिकला एवं अन्य परिजनों का भी बहुमान किया गया। पद्मशिला को रखे गये स्थल पर सीमेंटटेशन जिस चांदी के कटोरे एवं थापी से किया, वह ट्रस्ट मण्डल ने पुनमिया परिवार को यादगार चिन्ह स्वरूप सप्रेम भेट की। प.पू. पंन्यास प्रवर श्री चिदानंदजी म.सा ने अपने मांगलिक प्रवचन में पद्मशिला से अनिभिज्ञ जैन जगत को इसके महत्व और महिमा से अवगत कराया। अध्यक्ष बाबुलाल मंडलेचा ने प्रासंगिक मीठे मधुर शब्दो से सुकृत की अनुमोदना करते हुए सत्कार किया। और बाबुभाई राठौड ने इस प्रसंग में खास भूमिका से अतिथेय को इस लाभ से लाभान्वित होने में सहयोग दिया। रतनचंद पुनमिया ने इस पुरे भव्य आयोजन के लिये अध्यक्ष महोदय, ट्रस्ट मंडल, एवं जैन संघ को धन्यवाद देते हुये आभार व्यक्त किया।