पचपदरा में श्री संभवनाथ जिनालय की ८वीं वर्षगांठ पर आयोजन, अमरध्वजा के...

पचपदरा में श्री संभवनाथ जिनालय की ८वीं वर्षगांठ पर आयोजन, अमरध्वजा के कायमी लाभार्थी देवीचंद चौपड़ा परिवार ने किया ध्वजारोहण

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पचपदरा। पचपदरा के श्री संभवनाथ जिनालय पर गाजे-बाजे व ढोल ढमाकों के साथ जयकारों से गूंजते माहौल में ८वीं वार्षिक ध्वजारोहण किया गया। उत्सव, उल्लास व उमंग से परिपूर्ण वातावरण में अमर ध्वजा के मुख्य लाभार्थी तथा मुम्बई के प्रख्यात उद्योगपति एवं समाजसेवी संघवी देवीचंद, विकासकुमार, अनिलकुमार कंकु चौपड़ा परिवार ने मंदिरजी में वार्षिक अमर ध्वजा चढ़ाकर पूजा अनुष्ठान सम्पन्न किए। संघवी देवीचंद चौपड़ा परिवार द्वारा मंदिर शिखर पर नई ध्वजा का आरोहण करते ही समूचा वातावरण प्रभु संभवनाथ के जयकारों से गंूज उठा। घंटे, घडिय़ाल, शंख, झालर, ढोल-ढमाके के गूंजते वातावरण में बड़ी तादाद में मौजूद लोगों ने जयकारे लगाए। श्री संभवनाथ जिनालय के मुख्य शिखर पर अमर ध्वजा के लाभार्थी परिवार संघवी देवीचंद, विकासकुमार, अनिलकुमार कंकु चौपड़ा के निवास से शोभायात्रा रवाना हुई। वरघोड़े  में प्रभु भक्ति से ओतप्रोत सुमधुर भजनों पर श्रद्धालु झूमते, – थिरकते जयकारे लगाते हुए चल रहे थे। भण्डारियों का बास, शिवदासमलजी का वास, पाटोदी रोड़, अहिंसा चौराहा, भरावों का वास, रामघाट रोड़, मैन बाजार से गुजरते समय वरघोड़े में शामिल अमर ध्वजा के लाभार्थी संघवी परिवार एवं प्रबुद्धजनों का जगह-जगह स्वागत किया गया। जिनालय पहुंचकर प्रभु प्रतिमाओं के दर्शन पूजन किया। मंत्रोच्चार के बीच विधिकारक ने विभिन्न पूजा अनुष्ठान सम्पन्न करवाएं। इसके बाद समाजसेवी संघवी देवीचंद चौपड़ा परिवार ने मंदिर के मुख्य शिखर पर वार्षिक अमर ध्वजा चढ़ाई। इस अवसर पर ओसवाल समाज के पूर्व अध्यक्ष पुखराज छाजेड़, विजयराज ढेलडिया, जैन तीर्थ नाकोड़ा ट्रस्ट के उपाध्यक्ष महेन्द्र कुमार चौपड़ा, बी.आई., भैरुलाल लंूकड़, मुंबई के उद्योगपति अशोक एन. कांकरिया, उत्तम एन. कांकरिया, जैन नवयुवक मण्डल अध्यक्ष मनीष आर. संकलेचा, चान्दमल चौपड़ा, जितेन्द्र चौपड़ा, अरविन्द लंूकड सहित बड़ी तादाद में प्रबुद्धजन मौजूद थे। अमर ध्वजा के लाभार्थी संघवी देवीचंद विकासकुमार अनिलकुमार कंकु चौपड़ा परिवार की ओर से प्रभावना वितरित की गई इससे पहले वार्षिक ध्वजा के उपलक्ष में श्री संभवनाथ जिनालय में अठाराह अभिषेक पूजन हुआ। १० दीपक से प्रभु की महाआरती की गई। शाम को भक्ति संध्या ओतप्रोत एक से बढक़र एवं सुमधुर भजनों की प्रस्तुतियां देकर श्रोताओं को झूमते थिरकते पर मजबूर कर दिया।