शादी मे होने वाले खर्च को कुष्टरोगी आश्रम मे किया दान, घासवाला...

शादी मे होने वाले खर्च को कुष्टरोगी आश्रम मे किया दान, घासवाला परिवार ने परहित परोपकार का किया उत्कृष्ट काम

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मुंबई। पाश्च्यात संस्कृति के सघन दौर व निरन्तर फैलते आडम्बर को ठैन्गा दिखाते हुऐ एक नव दम्पती युगल ने युगो-युगो तक याद रखने वाला ऐसा स्वर्णिम अध्याय रचा है। महानगर मुम्बई के हृदय स्थल बोरीवली के मुंडारा निवासी अशोककुमार घासवाला के पुत्र संचित का विवाह साँची पुत्री प्रदीपकुमार मिठालालजी पारेख खीमेल के साथ मात्र तीन घण्टे मे बारह व्यक्तियो की उपस्थिती मे सम्पन्न हुआ। वर संचित की इच्छानुसार शादी मे होने वाले खर्च से हिम्मतनगर के एक हजार कुष्ठ रोगियों के आश्रम मे प्रतिमाह भोजन की व्यवस्था हेतु दान करने की सहर्ष घोषणा करके समाज मे एक अनुठी मिसाल कायम की है। घासवाला परिवार ने सादगी व समर्पण के भाव से लोग क्या कहेगे की मानसीकता को भूलाकर सही अर्थो मे गृहलक्ष्मी के आगमन पर धन लक्ष्मी को व्यर्थ स्वा: करने की बजाय सत्कर्म मे दान देकर लक्ष्मी को जीवनपर्यन्त सहेजकर पुण्य की फसल उगाई है जिसकी सर्वत्र सराहना हो रही है। ज्ञातव्य हो की संचित के दादाजी लालचंदजी घासवाला माँ भारती के ऐसे लाल थे जिन्होने चीन द्वारा भारत की दबाई भुमि भारत को वापस नही मिले जबतक आजीवन तन पर सोने का त्याग किया था। वे ऐसे समाजवादी थे जबतक जिऐ आडम्बर व अन्याय से दूर रहे ऐसे संस्कारी समाजवीर दादा के पोते का आज के इस पाश्विक युग मे अपनी इच्छाओ को दबाकर स्वप्रेरित बिना तामझाम दाम्पत्य बंधन मे बंधना अतुलनीय अनुमोदनीय अभिनंदनीय व अवर्णनीय है।

समाज सुधार की इस अनुठी पहल का शताब्दी गौरव दिल से अभिवादन करता है व घासवाला परिवार को दिल की गहराईयो से बधाई देता है। संचित और साँची की यह सच्ची व अच्छी पहल आज का युवावर्ग अपनाऐ व आडम्बर मुक्त समाज बनाऐ अगर एक जोडा भी इनसे प्रेरित होकर विवाह समारोह सादगी से मनाऐ तो इस प्रयास को पंख मिल जाऐंगे। ज्ञात रहे की साँची के दादा स्वर्गिय मिठालालजी उम्मेदमलजी पारेख ने भी मृत्युपंरात अपनी देह दान करके एक अविस्मरणीय कार्य किया था।