खरोकड़ा में हुआ महाराणा प्रताप की मूर्ति का अनावरण

खरोकड़ा में हुआ महाराणा प्रताप की मूर्ति का अनावरण

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पाली। केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि महाराणा प्रताप ने मातृभूमि की रक्षा के लिए सदैव संघर्ष करते हुए विदेशी शासकों की कभी भी अधीनता स्वीकार नहीं की। प्रताप में स्वतंत्रता के लिए साहस व झुंझारुपन का जज्बा हमेशा ही रहा। गृह मंत्री पाली जिले के खरोकड़ा गांव में महाराणा प्रताप सेवा समिति व राणावत परिवार की ओर से महाराणा प्रताप की २४ फीट ऊंची प्रतिमा के अनावरण के पश्चात उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राजस्थान की धरती की बात ही कुछ और है यहां मीरा की भक्ति, पन्नाधाय की युक्ति, भामाशाह की सम्पत्ति और महाराणा प्रताप की शक्ति हमेशा ही याद की जाती रहेगी। उन्होंने कहा कि देश के अलावा विदेशों में भी महाराणा प्रताप के प्रति गहरा लगाव है। उन्होंने रतनसिंह राणावत व गांव वालों की प्रशंसा करते हुए मूर्तिकार लक्ष्यण व्यास का भी बहुमान किया। उन्होंने कहा कि रतनसिंह राणावत व आमजी माथुर खरोकड़ा गांव में महाराणा प्रताप की मूर्ति का अनावरण करने का प्रस्ताव लेकर आए तब से ही मन में यह भावना जागृत हुई कि गांव भले ही छोटा हो परन्तु महाराणा प्रताप जैसे शुरवीर की मूर्ति जहां लगी वहां के लोग बधाई के पात्र है। यहां प्रताप की मूर्ति का अनावरण कर उनकी ऐतिहासिक यादें तरोताजा हुई है। प्रताप ने कभी पराधीनता स्वीकार नही की।

maharana pratapहमें प्रखर स्वाधीनता की प्रेरणा महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी महाराज तथा बाजीराव पेशवा से मिली इस सभी राष्ट्रभक्ति की भावना का होना जरुरी है। हमारा भारत तभी महान बन सकता है जब हम सब में देशभक्ति बनी रहे। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार के तीन वर्षो के शासन काल में भारत का मस्तक दुनिया में ऊंचा उठा है। अब भारत कमजोर देशों की श्रेणी में नहीं आता। राज्यसभा के सांसद ओमप्रकाश माथुर ने कहा कि महाराणा प्रताप स्वाभीमानी, स्वतंत्रता प्रेमी, मातृप्रेमी व शसक्त शासक रहे। उन्होंने संकल्प लिया कि विदेशी शासकों को भारत से बाहर खदेडना है। उन्होंने मातृभूमि के लिए महलों में निवास छोड़ा, खाट छोडी तथा वन में भटके २५ वर्षो तक संघर्ष किया। पाली जिले में उनका ननिहाल रहा, उन्होंने कहा कि हल्दी घाटी में राणा नहीं अकबर को हार मिली। उन्होंने बताया कि खरोकड़ा गांव में महाराणा प्रताप की यह दुसरी बड़ी प्रतिमा है, पहली बड़ी प्रतिमा उदयपूर में स्थित है। केन्द्रीय विधि एवं न्याय राज्यमंत्री पीपी चौधरी ने कहा कि महाराणा प्रताप वीरता, त्याग व बलिदान के प्रेरणा स्त्रोत रहे उन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए जंगल में रहकर समय व्यक्तित किया और दुश्मन को खदेडने की रणनीति बनाई। जंगल में पतल पर भोजन करना, दाड़ी नहीं बनाना तथा परिवार व शुभचिंतकों  को सुरक्षा प्रदान की। और वहीं से सेना तेयार कर मुगलों से लोहा लेते रहे। मेवाड़ – मारवाड़ एवं देश को मुगलों से आजाद करना उनका उद्देश्य रहा। उपमुख्य सचेतक मदन राठौड़ ने सभी का स्वागत करते हुए कहा कि महाराणा प्रताप की मूर्ति का अनावरण होने पर आने वाली पीढियों को संस्कार व इतिहास की जानकारी होगी। इस अवसर परजोधपुर के सांसद गजेन्द्रसिंह शेखावत, पाली पूर्व सांसद पुष्प जैन, शम्भुसिंह खेतासर, विधायक ज्ञानचन्द पारख, केसाराम चौधरी, संजना आगरी, सांसद प्रतिनिधि राकेश भाटी, नगर परिषद के सभापति महेन्द्र बोहरा, पाबूसिंह राणावत, करणसिंह नैतरा, मानसिंह राठौड़, सरपंच हनवंतसिंह, इन्द्रसिंह, देवीसिंह भाटी, शैतानसिंह आदि कई गणमान्य नागरीक उपस्थित थे।