‘अहिंसा विश्व भारती’ का मुंबई में विश्वस्तरीय अंतरधार्मिक सम्मेलन का भव्य आयोजन...

‘अहिंसा विश्व भारती’ का मुंबई में विश्वस्तरीय अंतरधार्मिक सम्मेलन का भव्य आयोजन संपन्न

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मुंबई। जैन आचार्य डा. लोकेश मुनि द्वारा स्थापित संस्था अहिंसा विश्व भारती ने अपने ११वें स्थापना दिवस पर विश्व विख्यात आध्यात्मिक संतों के साथ बिरला मातुश्री सभागार में अंतरधार्मिक सम्मेलन का आयोजन किया। आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर, अहिंसा विश्व भारती के संस्थापक आचार्य लोकेश मुनि, भागवत कथाचार्य रमेशभाई ओझा, अकाल तख्त के प्रमुख जत्थेदार ज्ञानी गुरवचन सिंह, अखिल भारतीय इमाम संगठन के अध्यक्ष इमाम उमेर अहमद इलियासी, आर्चविशप दादा जे. पी. दासवानी, बौद्ध भिक्षु रिम्पोचे, ब्रह्मकुमारी डा. बिन्नी सरीन के पावन सानिध्य में बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद, श्रीमती अमृता फडणवीस एवं केन्द्रीय मंत्री रामदास आठवली ने सम्मेलन का उद्घाटन किया। कार्यक्रम के दौरान श्रीश्री रविशंकर ने कहा कि वर्तमान में विश्व के हालत बहुत ही गंभीर हैं। ऐसे में दुनिया की सबसे बड़ी संस्था संयुक्त राष्ट्र संघ तथा विश्व धर्म संसद भी अनेकांत दर्शन आधारित अंतर धार्मिक संवाद को अत्यधिक महत्व दे रहे हैं। आचार्य डा. लोकेश मुनि ने कहा कि हिंसा एवं आतंकवाद किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। हिंसा प्रति हिंसा को जन्म देती है। संवाद के द्वारा हरेक समस्या का समाधान संभव है। रामनाथ कोविंद ने अहिंसा विश्व भारती की इस पहल का प्रशंसा करते हुए ऐसे समसामायिक विषय पर संगोष्ठी आयोजन को राष्ट्र एवं समाज के लिए कल्याणकारी बताया। श्रीमती अमृता फडणवीस ने भी अपने संबोधन में कहा कि भारत जैसे विविध धर्म एवं संस्कृति वाले देश में इस प्रकार के सम्मेलन जरुरी है, जिससे हम अपने धर्म-संस्कृति के साथ ही दूसरी धर्म-संस्कृतियों को भी आदर और सम्मान करना सीखें। केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने कहा कि वे सामाजिक जीवन में शांति, बंधुत्व, प्रेम, अहिंसा समतामूलक विकास के पक्षधर हैं। सर्वधर्म समभाव की उदात्त चेतना से ही विकास संभव है। रमेशभाई ओझा ने कहा कि जिस समाज में दर्शन एवं धर्म में सामंजस्य रहता है, ज्ञान एवं क्रिया में अनुरूपता रहती है। उपस्थित जनों को संबोधित करते हुए ज्ञानी गुरुबचन सिंह ने आचार्य लोकेश मुनि द्वारा स्थापित अहिंसा विश्व भारती धार्मिक समरसता के साथ ही कन्या भू्रण हत्या के खिलाफ एवं नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की प्रशंसा की। इस अवसर पर इमाम इलियासी ने कहा कि हम सभी धर्मगुरु निरंतर इस प्रयास में रहते हें कि एक साथ समाज को भाईचारे व शांति का संदेश दें। जब भी जरुरत पड़ी, हमने सांप्रदायिक मदभेद के क्षेत्र में शांति स्थापित करने का प्रयास किया है। आर्च विशप, दादा जे.पी. वासवानी, बौद्ध भिक्षु रिम्पोचे, ब्रह्मकुमारी डा. बिन्नी सरीन ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम को सफल बानाने में गणपत कोठारी, किशोर खाबिया, सतीश सुराणा, राकेश चौपड़ा, प्रशांत झवेरी आदि का पूर्ण सहयोग रहा।