श्री जैन सेवा संघ मुंबई द्वारा प्रतिभाओ का सम्मान; तांतेड, सुराणा, धाकड़...

श्री जैन सेवा संघ मुंबई द्वारा प्रतिभाओ का सम्मान; तांतेड, सुराणा, धाकड़ एवं श्रीमती श्रीश्रीमाल को जैन समाज रत्न से नवाजा

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मुंबई। सामाजिक एवं धार्मिक कार्यो में प्रोत्साहन देने हेतु प्रतिवर्ष की भांति इस बार भी अग्रणी संस्था श्री जैन सेवा संघ, मुंबई द्वारा १९.३.२०१७ को वीर सावरकर हॉल, शिवाजी पार्क, दादर मुंबई में विभिन्न क्षेत्रो में कार्यरत जैन अग्रणी प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एंव अतिथियों द्वारा दिप प्रज्ज्वलीत कर किया गया। संस्था अध्यक्ष पारसमल गोलचा ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि श्री जैन सेवा संघ मुंबई के ९वें अभिनंदन समारोह में विभिन्न विभुतियों का जो सम्मान कर रहे हैं उसका एक ही ध्येय है कि समाज के लोग उन विभुतियों से सिखे कि वह समाज के प्रति अपने कर्तव्यो का निर्वाह करे और यह संदेश समाज तक पहुंचे।

shri jain sava sangh2श्री गोलचा ने कहा कि जैन धर्म विज्ञान पर आधारीत है। भगवान महावीर ने वर्षो पहले कहा था कि पानी बचाओ, आज सरकार भी यह कार्य कर रही है। भगवान महावीर ने पर्यावरण पर विशेष ध्यान देने का आहवान किया था, आज वर्षो बाद हम इसी सिद्धान्त को अपना रहे हैं। उन्होंने पर्यावरण की रक्षा करने का आव्हान किया।

अभिनंदन पत्रों का वांचन अध्यक्ष पारसमल गोलचा, जनरल सेक्रेट्री उगमराज लुणावत, ट्रेजरार अशोक हुडिया एवं जाइंट सेक्रेट्री बसंत जैन ने किया। राजस्थान राज्य मानव अधिकार के चेयरमेन एवं झारखंड के पूर्व चीफ जस्टिस श्री प्रकाशचंद्र टाटिया के मुख्य अतिथ्य एवं महासचिव उगमराज लुणावत के संयोजन में संपन्न हुए इस समारोह में मुख्य वक्ता राष्ट्रीय कवि युगराज जैन एवं अतिथि विशेष श्री विजयकुमार अचलिया (जस्टीस मुंबई हाईकोर्ट) थे।

 

shri jain sava sangh5इस भव्य समारोह में जिन विभुतियों को जैन सेवा रत्न से सम्मानित किया गया उनमें श्री सोहनराज तांतेड (भूतपूर्व वाइस चांसलर सिंघनिया यूनिवर्सिटी राजस्थान), श्री पी. सी. सुराना (प्रेसिडेंट अखिल भारतीय श्री जैन रतन हितेषी श्रावक संघ), डा. नरेन्द्रकुमार धाकड़ (वाइस चांसलर देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी, इंदौर), श्रीमती बृजबाला विजय श्रीश्रीमाल, (समाज सेविका) थे। की-नोट स्पीकर श्री युगराज जैन ने कर्मवाद पर अपनी विशेष शैली से संबोधन किया। उन्होंने कहा कि आज के मुख्यवक्ता पदमभूषण श्री मुज्जफर हुसैन थे, लेकिन वे आज यहां नही आ सके। उनके स्थान पर मैं आया, उनको उनके कर्मों ने रोक दिया, मेरे कर्मों का उदय हुआ। इसे कहते है कर्मवाद उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि एक कार्यक्रम में दो सेठ आपस में बात कर रहे थे। एकने कहा कि मेरा नोकर एक दम निठल्ला हैं, दूसरे ने कहा मेरा नोकर एक दम मूर्ख हैं। पहले सेठ ने पूछा कैसे? उसने कहा अभी फैसला कर लेते है। सेठ ने अपने नौकर को १० रुपए का नोट देकर कहा जा बाजार से एक मारुती कार लेकर आ। नौकर ने कहा जी सेठजी और वो १० का नोट लेकर नीचे चला गया। दूसरे सेठ  ने अपने नौकर को बुलाकर कहा जा देखकर आ कि मैं दुकान पर हंू या नहीं, उसने भी कहा जी सेठजी मैं अभी देखकर आता हुं। दोनों नौकर नीचे मिले और आपस में एक दूसरे से बात करने लगे कि मेरा सेठ कितना मूर्ख है, उसे इतना भी पता नही है कि आज रविवार होने के कारण, बाजार बंद होगा, मैं कहा से मारुती कार खरीदकर लाऊंगा। दूसरे नौकर ने कहा कि मेरा सेठ अव्वल दर्जे का बेवकूफ है, वो यहा से फोन करके नहीं पूछ सकता था कि वो दूकान पर हैं या नही। कहने का तात्पर्य यह है कि जीवन में कौन किसे बेवकूफ बना रहा है, यह पता नहीं चलता। उन्होंने ऐसे ही उदाहरणों से सदन को हसां-हसां कर लोटपोट कर दिया। मुख्य अतिथि प्रकाशचंन्द्र टाटिया ने इस समारोह को आदित्य बताते हुए कहा कि मैं संस्था की चयन समिति को धन्यवाद देता हँू कि उन्होंने सत्कार मूर्तियों का चयन बहुत ही सही किया है। उन्होंने कहा कि हर एक व्यक्ति को भगवान महावीर के बताये हुए मार्ग अहिंसा एवं अपरिग्रह को अपनाना चाहिए। उन्होंने जैन समाज को एकजूट रहने की सलाह दी।

सम्माननीय अतिथि श्री विजयकुमार आचलीया ने कहा कि जैन समाज सबसे ज्यादा साक्षर एवं इमानदार है। राष्ट्र विकास में जैन समाज कि महत्वपूर्ण भागीदारी है। जैन समाज के लोग महत्वपूर्ण पदों पर बैठकर अपनी योग्यता का परचम लहरा रहे है।

प्रो. श्री सोहनराज तांतेड ने अपने ओजस्वी संबोधन में कहा कि भारत में लोकतंत्र भगवान महावीर की देन है। उन्होंने जैनिज्म के प्रचार एवं प्रसार की जरुरत पर बल दिया। जैन धर्म विश्व में अहिंसा के लिए जाना जाता है। उन्होंने जैन धर्म के छ: कषायों की विस्तृत रुप से व्याख्या की। श्री पी. एस. सुराणा ने नारी शिक्षा पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि नारी दो परिवारों की संवारती है। उन्होंने अपने गुरु श्री हस्तीमलजी म.सा. को याद करते हुए कहा कि उनकी प्रेरणा से ही वे संघ सेवा एवं समाज सेवा में जुडक़र जो कुछ हो सकता है, वो करने की कोशिश कर रहा हंू। उन्होंने जैनिज्म के लिए इंदौर यूनिवर्सिटी में एक पीठ शुरू करने की इच्छा जताते हुए मुंबई जैन सेवा संघ से अपील की वे इस और जरुर ध्यान दे। उन्होंने संस्था को अपनी ओर से चार सुझाव दिये। जिसमें प्रमुख रुप से अजैन भी अगर जैनिज्म हेतू कार्य कर रहा हो तो संस्था द्वारा उसे भी सम्मानित किया जाना चाहिए। डा. नरेन्द्रकुमार धाकड़ ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान महावीर के सिद्धांत जीओ और जीने दो को अपने जीवन में आत्मसात करें। उन्होंने भी शिक्षा पर जोर दिया।

श्रीमती बृजबाला श्रीश्रीमाल ने अपने संबोधन में कहा कि महिला शिक्षा पर ज्यादा से ज्यादा ध्यान देना चाहिए। यदि नारी शिक्षित होगी तो समाज को ज्यादा मजबूती मिलेगी। नारी को अब इस युग में अबला नहीं समझना चाहिए। आज महिलाओं ने कई स्थानों पर पुरुषों के बराबर का दर्जा हासिल किया है।

shri jain sava sangh3कार्यक्रम के सौजन्यकर्ता श्री नरेन्द्रकुमार हिरावत (ए. नरेन्द्र हिरावत एण्ड कंपनी), मुंबई थे। संस्था द्वारा हिरावत परिवार के सदस्यों का अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम में शताब्दी गौरव के चेयरमेन सिद्धराज लोढ़ा का अध्यक्ष पारस गोलचा ने विशेष रुप से अभिनंदन किया। समारोह का संचालन आनंद खतंग ने किया। आभार प्रकट महासचिव उमगराज लुणावत ने किया।

कार्यक्रम में उद्योगपति मोफतराज मुणोत, एच. एस. रांका, सोहनराज खजांची, घनश्याम मोदी, जेएटीएफ के उपाध्यक्ष जे.बी. जैन, रतनचंद के जैन, वैभव लोढा, कांतिलाल मेहता, कपूरंचंद तांतेड, सीए कैलाश कावेडिया, एडवोकेट सुरेश जैन, नेमीचंद बोकडिया, अजय जैन, चंपालाल मेहता, महावीर लोढ़ा, गेहरीलाल वया, कांतीलाल हिरन, नरेन्द्र विराणी, सीए. समेरमल खिंवसरा, किशोर जैन, इंदरचंद संचेती सहित समाज के कई गणमान्य लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम को सफल बनाने में उगमराज लुणावत, पारस गोलछा, मांगीलाल जैन, गौतम मेहता, अशोक हुंडिया, बसंत जैन, निहालचंद मुणोत सहित संस्था के सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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