जैन समाज हम दो-हमारा एक की नीति छोड़े – आचार्य विमलसागर सूरिश्वर...

जैन समाज हम दो-हमारा एक की नीति छोड़े – आचार्य विमलसागर सूरिश्वर म.सा.

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बडौदा। देश में जैन समाज की जनसंख्या निरंतर घट रही है। पारसी कोम के बाद जो जनसंख्या घट रही है, वह जैन समाज की है। यह कहते हुए आचार्य विमलसागर सूरिश्वर म.सा. ने १८० वर्ष बाद भारत में जैनों का अस्तित्व भी नहीं रहने की बात कही। उन्होंने जैन समाज की जनसंख्या बढ़ाने के लिए ‘हम दो-हमारे एक की नीति छोडने और अपनी कमियों को दूर करने की अपील की। बडौदा में अलकापुरी जैन संघ में आए आचार्य विमलसागर सूरिश्वर म.सा. ने देश में जैन समाज की घट रही जनसंख्या के बारे में चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि देश में केवल ६० हजार पारसी ही बचे है। आगामी २५ वर्ष में इस कोम का अस्तित्व ही नहीं रहेगा। ऐसी संभावना व्यक्त करते हुए जैन समाज के भी ऐसी ही हालत पर चिंता जमाई। उन्होंने कहा कि ३५ वर्ष पूर्व देश में १ करोड़ जैन थे। उसके अनुसार जैन समाज की जनसंख्या बढऩी चाहिए थी, परंतु आश्चर्य जनक रुप से घट कर ६० लाख हो गई है। तीर्थधाम – मंदिर बढ़े है लेकिन जनसंख्या घट रही है। उन्होंने कहा कि ५० वर्षों पूर्व वही प्राचीन काल में माता-पिता की ४,५ या ६ संताने होती थी। जैन समाज में भी यही व्यवस्था थी। धीरे-धीरे यह बदल कर बच्चों की संख्या ४,३,२ हुई। अब हम दो हमारे एक भी फेशन चल रहा है। यह चिंता का विषय है। हमे इस बारे में सोचना चाहिए।