आचार्य विजयरत्नसुन्दर सूरिश्वर को पद्मभूषण; प्रथम जैन संत जिनको यह सम्मान मिला

आचार्य विजयरत्नसुन्दर सूरिश्वर को पद्मभूषण; प्रथम जैन संत जिनको यह सम्मान मिला

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मुंबई। विख्यात जैन संत आचार्य विजयरत्नसुन्दर सूरिश्वर को पद्मभूषण अलंकरण से सम्मानित किया जायेगा। 68वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर भारत सरकार ने पद्मपुरस्कारों की घोषणा की, उनमें आचार्य रत्नसुन्दरसूरिश्वर म.सा. को तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मभूषण से सम्मानित करने की घोषणा की गई। जनवरी 1948 में गुजरात में पालीताना के नजदीक देपला में जन्मे रत्नसुन्दर ने 1967 में श्वेताम्बर मूर्तिपूजक परम्परा में मुनि दीक्षा ली। आचार्यश्री प्रथम जैन संत हैं, जिन्हें पद्म अलंकरण से सम्मानित किया जायेगा। पुष्करवाणी समूह ने बताया कि यह भारतीय संत साहित्य परम्परा का सम्मान है। प्रभावशाली प्रवचनकार आचार्यश्री ने अब तक रिकॉर्ड तीन सौ ग्यारह पुस्तकें लिखी हैं। इसके लिए उनका नाम विश्व कीर्तिमान की स्वर्ण-पुस्तक (गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड) में भी दर्ज हुआ है। उनके प्रवचन और लेखन में पारिवारिक, सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के सम्मान की जीवन्त प्रेरणाएँ हैं। उनकी पाठकों और प्रवचन सुनने वालों के जीवन में निर्णायक मोड़ आया है। गुजराती में लिखित दौ सौ पिचौतहर (275) पुस्तकों के अलावा भी आचार्यश्री के साहित्य का हिन्दी, मराठी, उर्दू, तमिल, अंग्रेजी, फ्रेंच आदि भाषाओं में अनुवाद भी हुए हैं। अब तक उनकी पुस्तकों की लगभग अस्सी लाख प्रतियाँ बिक चुकी हैं। उल्लेखनीय है कि 10 जनवरी 2016 मुम्बई में आयोजित हुए साहित्य सत्कार समारोह में आचार्य श्री द्वारा लिखित पुस्तक मेरा भारत महान भारत का लोकार्पण प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के करकमलों द्वारा संपन्न हुआ था।