अजर-अमर हो गये स्व. अभयकुमार राठौड

अजर-अमर हो गये स्व. अभयकुमार राठौड

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मुंबई। देह को देव मे विलय करने वाले अभयकुमार चुन्नीलालजी राठोड़, उम्र ४३ वर्ष के परिजनो ने मानवता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हुऐ अपने परिवार के इस अभिन्न अंग का अंगदान करके चार व्यक्तियो का जीवन संवार दिया।

मनुष्यत्व जीवन देह त्याग के पश्चात खाक हो जाता है पर अभय राठोड़ के परिजनो ने उस पवित्र देह को राख बनाने की बजाए मृत्युपंरात भी उनकी अजर अमर साख बढाकर मौत के कगार पर खडी चार जिन्दगीयो को नया जीवन दे दिया। कोन कहता है कि अभय राठोड़ हमारे बीच नही है वो तो उन चार व्यक्तियो मे समाहित है जो उनके अंग पाकर अपने बेजान जीवन मे नऐ रंग भरकर इस पुण्यशाली आत्मा को परमात्मा मानकर उनकी पुजा कर रहे है। धन्य है राठौड़ परिवार जिसने भगवान महावीर के कथन जीओ और जीने दो के के मूलमंत्र को दिल से आत्मसात कर अभय राठौड़ को मृत्युपरान्त भी अभयदान देकर मिटती हुई मानवता को नया आकार दिया है। शताब्दी गौरव परिवार की ओर से दिव्यात्मा को शत:शत: नमन्।