बेंगलुरु में सुराणा कुलदेवी सुसवाणी माता मंदिर की प्रतिष्ठा सम्पन्न

बेंगलुरु में सुराणा कुलदेवी सुसवाणी माता मंदिर की प्रतिष्ठा सम्पन्न

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बेंगलुरू। अतिबेले स्थित होसूर रोड़ पर सुराणा कुल की कुलदेवी मां सुसवाणी माता के नवनिर्मित माताजी धाम में विधि-विधान से पांच देवी प्रतिमाओं की प्राणप्रतिष्ठा वैदिक मन्त्रोच्चार के साथ सम्पन्न हुई। सुराणा कुल की कुलदेवी मां सुसवाणी सहित अंबामाता, सच्चियाय माता, पद्मावती माता व लक्ष्मी माता की प्रतिमाएं प्रतिष्ठापित की गई। श्रीमती भंवरीबाई घेवरचंद सुराणा चेरिटेबल ट्रस्ट एवं सुराणा संघ के तत्वावधान में मंदिर का निर्माण एवं घेवरचंदजी सुराणा परिवार द्वारा ही संपन्न कराया गया। पांच दिवसीय इस भव्य और दिव्य मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा प्रसंग के अवसर पर प्रात: छह बजे पाश्र्व सुशील धाम में विराजित सुसवाणी धाम के मुहूर्त प्रदाता आचार्य श्री अशोकरत्न सूरीश्वरजी व अमरसेन सूरीश्वरजी म.सा. से आशीर्वाद लेकर दिलीप सुराणा व श्रीमती अर्चना सुराणा, आनंद संराणा व श्रीमती मोना सुराणा ने धार्मिक अनुष्ठान शुरु कराया। आचार्य प. चन्द्रशेखर शर्मा व अन्य विद्वान पंडितों ने विभिन्न प्रतिमाओं की विधिवत् पूजा कर स्थापना करवाई तथा लाभार्थी परिवार द्वारा मंदिर के शिखर पर कलश स्थापना व ध्वजारोहण किया गया। हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा अनूठी एवं आकर्षण का केन्द्र बन गई। प्रकाण्ड विद्वान एवं आचार्य पंडित चन्द्रशेखर शर्मा के सान्निध्य में २५ विप्रों ने विभिन्न कार्यक्रमों में १०८ गणपति के व १०० चण्डीपाठ तथा रुद्रपारायण, भव्य वरघोडा, नवग्रह शांति पूजन एवं हवन, जलाधिवास का विधान, सिद्धचक्र महापूजन, शिवपार्वती विवाह कथा एवं नाटिका सहित अनेक आयोजन सम्पन्न हुए। इसमें हवन में आहूतियां व नौ कुवांरी कन्याओं का पूजन, आरती १०८ दीपों से मां सुसवाणी माता की महाआरती शामिल थी। सुसवाणी माता को छप्पन भोग भी अर्पण किया गया। स्थानीय सुराणा संघ, सुराणा महासंघ, बालराई जैन संघ व अनेक संघों व संगठनों द्वारा श्रीमती भंवरीदेवी घेवरचंदजी सुराणा, दिलीप सुराणा, आनंद सुराणा एवं सुराणा परिवार द्वारा मंदिर निर्माण व प्रतिष्ठा करवाने के अनुमोदनार्थ उनका अभिनंदन – सम्मान भी किया गया। उल्लेखनीय है कि गुजरात प्रांत के बंशीपहाड के लाल पत्थर से निर्मित इस मंदिर में प्रतिष्ठापित पांचों देवियों की मनोरम प्रतिमाएं जयपुर से मंगवाई गई है। मां सुसवाणी की प्रतिमा स्थापना मंदिर निर्माणकर्ता भंवरीबाई घेवरचंदजी सुराणा के पुत्र दिलीप सुराणा, आनंद सुराणा परिवार द्वारा किया गया। मां लक्ष्मी की स्थापना जयंतिलाल, विमलचंद, निखिल सुराणा द्वारा, जबकि अम्बा माता की स्थापना शांतिलाल, संजय, अजय सांड परिवार द्वारा, पद्मावती देवी की प्रतिमा धीरजमल शैलेश सिरोया परिवार द्वारा तथा सच्चियाय ओसियां मां की प्रतिमा पीयुष जैन, प्रमोद जैन, दिलीप पुनमिया परिवार द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ प्राण प्रतिष्ठापित की गई। सुसवाणी मां के मूलधाम मोरखाणा व माउंट आबू स्थित मां अंबा के धाम से दोनों परिवारों द्वारा ज्योत भी लाई गयी, जो अखंड जलेगी। समस्त धार्मिक अनुष्ठान की क्रियाओं की पूर्णआहूती से पूर्ण शाही करबा, ब्रह्मभोज एवं विशाल महाप्रसादी का आयोजन भी किया गया।

कार्यक्रम में शहर के अनेक गणमान्य व्यक्तियों सहित राजस्थान, हैदराबाद, चेन्नई, मुंंबई, कोलकाता से भी श्रद्धालु बडी संख्या में शिरकत करने पहंचे थे। पाश्र्व सुशील धाम व सुसवाणी मंदिर के बीच लोगों के आवागमन से पूरे माहौल में उत्साह छाया रहा। और ऐसा लग रहा था कि मानों कोई धार्मिक मेला लगा हो। संघ की ओर से नवकारशी के लाभार्थी और अतिथियों का भी सम्मान किया गया।

भक्ति संध्या में कविता पोरवाल ने अपने मधुर स्वरों से रमझट जमाई।

सुराणा संघ के चेयरमेन दिलीप सुराणा, अध्यक्ष सरदारमल सुराणा, उपाध्यक्ष अशोक सुराणा, विजयराज सुराणा, एस. वी. सुराणा, महामंत्री महिपाल सुराणा, कोषाध्यक्ष कन्हैयालाल सुराणा, सहमंत्री नरेन्द्र सुराणा, भीमराज सुराणा, प्रचार मंत्री उत्तमचन्द सुराणा, संगठन मंत्री सुनील सुराणा पूर्व अध्यक्ष राजेन्द्र सुराणा आदि पदाधिकारियों सहित अनेक सदस्यों ने प्रतिष्ठा की विभिन्न व्यवस्थाओं में सहयोग दिया।

बालराई जैन संघ ने किया सुराणा परिवार का अभिनंदन

इस प्रतिष्ठा महोत्सव में बालराई जैन संघ ने श्रीमती भंवरीबाई घेवरचंद सुराणा चेरिटेबल ट्रस्ट के दिलीप सुराणा, आनंद सुराणा एवं समस्त सुराणा परिवार को ‘रजत अभिनंदन पत्रÓ अर्पण कर सम्मानित किया। बालराई जैन संघ के करीबन ४० से ज्यादा सदस्यों ने बैंगलुरू पहुंच कर इस महोत्सव में अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर इस महोत्सव को महामहोत्सव बना दिया। बालराई युवा जैन संघ ने भी इस महोत्सव में अपनी सराहनीय सेवा दी। बालराई जैन संघ के सदस्यों ने मुंबई आने पर शताब्दी गौरव के संवाददाता को बताया कि बालराई गांव के सुराणा परिवार का नाम पूरे देश में रोशन करने वाले श्री घेवरचंदजी सुराणा परिवार पर हमें नाज हैं। इस महोत्सव की स्मृतिया सदियों तक हमारे मानस पटल पर अंकित रहेगी।