आचार्य चंद्रानन सागर सूरीश्वर म.सा. ने दी आचार्य पदवी

आचार्य चंद्रानन सागर सूरीश्वर म.सा. ने दी आचार्य पदवी

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मुंबई। नाकोड़ा भैरव दर्शन धाम महातीर्थ की पावन धन्यधरा पर जाप-ध्यान निष्ठ, जन-जन की आस्था के केन्द्र, महामांगलिक सम्राट, राष्ट्रसंत आचार्य श्री चन्द्राननसागर सूरीश्वरजी म.सा. द्वारा अपने वरद हस्तों से अपने ही शिष्य पंन्यासप्रवर श्री गुणचंद्र सागरजी म.सा. को सागर समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति आचार्य श्री दौलतसागर सूरीश्वरजी म.सा. की आज्ञा से आचार्य पदवी प्रदान की गई। पूज्य गुरूदेव श्री ने आचार्य पद की सभी क्रियाओं को करवाया एवं नूतन आचार्य श्री को सूरी मंत्र सुनाया। इस मंगलवेला में गुरूदेव श्री ने फरमाया कि आचार्य पद नवकार महामंत्र के तीसरे पद को शोभायमान करता है। आचार्य पद तीर्थंकरो द्वारा प्रदत संयम जीवन का सबसे बडे वरदान जैसा हैं, इस पद के साथ ही देव, गुरू और धर्म की प्रभावना बढ़ाने की जिम्मेदारी बढ जाती है। इस पद की गरिमा है कि सरलता, सहजता और विनम्रता पूर्वक धर्मानुरागीयों और संघों के साथ जुडाव बढाना और धर्म प्रभावना के सुकृत्यों की प्रेरणा करना। मुनि श्री मननचंद्रसागर जी ने साधु से गणिवर्य, पंन्यासप्रवर और उपाध्याय पद के बाद आचार्य पद तक के जीवन का महत्व बताया। भारतभर से अनेको गच्छाधिपति एवं आचार्यों के मंगलकामना संदेश आए तथा गुरूदेव श्री एवं अन्य सभी साधु-साध्वी जी भगवंतों ने उनके आचार्य पद की मंगलकामना की।

इस पावन मंगलमय वेला में मुनि श्री हरिशचंद्रसागर जी म.सा., मुनिश्री पुष्पचंद्रसागर जी म.सा., मुनि श्री जैनेशचंद्रसागर म.सा., मुनि श्री मननचंद्रसागर जी म.सा. एवं विदुषी साध्वी श्री कल्पितिा श्रीजी म.सा., साध्वी श्री चारूता श्रीजी म.सा., साध्वी श्री आशिता श्रीजी म.सा., साध्वी श्री रिशिता श्रीजी म.सा. का पावन सानिध्य रहा। इस पावन वेला में नाकोड़ा भैरव दर्शन धाम महातीर्थ के अध्यक्ष कांतीलाल शाह, महामंत्री दिनेश ज्योतीचंदजी तेलीसरा, सुरेश जैन, कोषाध्यक्ष ललित जगावत, ट्रस्टी के. सी. जैन देवीचंद सतावत, मनीष कोठारी, मेवाड मूर्तिपूजक जैन संघ के अध्यक्ष मोहन पामेचा के अलावा भारत भर से पधारे सभी संघों के पदाधिकारियों एवु गुरूभक्तों की गरिमामय उपस्थिति रही। संगीतकार निखिल सौनीगरा ने भक्ति गीतों से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।