खौड़ की संस्कारी बहू देश की सीमा पर लड़ाकू नवीना शेखावत

खौड़ की संस्कारी बहू देश की सीमा पर लड़ाकू नवीना शेखावत

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पाली। सीमा पर देश की रक्षा करने में पाली जिले के खौड़ की नवीना शेखावत का नाम देश के पटल पर चमक रहा है। वे खौड़ की बहू हैं और पाली जिले से सेना में पहली मेजर हैं। देश की सुरक्षा में अहम भागीदारी निभाने के लिए सीमा पर दुश्मनों से लोहा लेने वाली खौड़ गांव की बहू नवीना शेखावत के पति मिथलेश सिंह जयपुर के एसएमएस अस्पताल में कार्यरत हैं। नवीना संस्कारी बहू हैं, लेकिन दुश्मन के दांत खट्टे करने में उनका कोई सानी नहीं।

सेना में मेजर के पद पर पहुंची नवीना सामाजिक संस्कारों परंपराओं में पूरा भरोसा रखती हैं। वे ड्यूटी पर सेना की ड्रेस  पैंट और कोट में देश की सुरक्षा करती हैं। लेकिन ससुराल खौड़ आने पर परिवार के संस्कारों को निभाते हुए परंपरागत राजस्थानी वेशभूषा कुर्ती – कांचली पहनकर घर में रहती हैं। खौड़ आने पर घर के सभी बड़े परिवारजनों के सामने वह घूंघट में रहती हैं। उन्हें गांव में परंपरागत पहनावा ही पसंद है। नवीना मेजर होने के साथ-साथ नेशनल शूटर भी है। वह हाल में आयोजित आर्मी नेशनल प्रतियोगिता में देश के टॉप 10 आर्मी शूटरों में शामिल थी। इसके साथ ही एनसीसी में नेशनल स्तर पर भी अपनी श्रेष्ठता साबित की है। वह आर्मी की और से होने वाली प्रतिस्पर्धा कोर्सेज में भी हमेशा ग्रेड प्राप्त कर टॉप पर रही। नवीना का कहना है कि गांव की बहू-बेटियां किसी से कम नहीं। उन्हें भी सपने देखने आगे बढऩे का पूरा अधिकार है। योग्यता में वे किसी से कम नहीं। सिर्फ अवसरों गाइडेंस की कमी होती है। उन्हें चाहिए कि वे सपने देखें और जिद के साथ पूरा करें। नवीना ने जोधपुर के कमला नेहरू कॉलेज से पढ़ाई पूरी कर डिफेंस स्टडी में पोस्ट ग्रेजुएट किया है। नवीना का सपना था कि वह भी देश की राजधानी दिल्ली में राजपथ पर परेड में शामिल हों। यह सपना 26 जनवरी 2015 को अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के मुख्य आतिथ्य में राजपथ पर हुई परेड में पूरा हुआ।

सन 2013 से दो साल तक ऑफिसर ट्रेंनिग एकेडमी में ट्रेंनिग करने के बाद लेफ्टिनेंट बनने के बाद शेखावत का कैप्टन अब आर्मी में मेजर पद पर प्रमोशन हुआ। अब नवीना शेखावत देश के सबसे विपरीत परिस्थितियों वाले जम्मू कश्मीर की लेह-लद्दाख अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तैनात हैं। मेजर पद पर प्रमोशन से पहले नवीना शेखावत नक्सल प्रभावित मणिपुर में दो साल तक कैप्टन के पद पर तैनात रही। इस दौरान उन्होंने नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों में शानदार भागीदारी निभाई।