मन रुपी ब्रेक का उपयोग करके जीवन सफल बनाये प.पू. मुनि विनीतरत्न विजय म.सा. (सज्जायवाला)

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    अहमदाबाद। प.पू. आ.भ. दीक्षा दानेश्वरी के शिष्य प.पू. मुनिवर्य श्री विनितरत्न विजय म.सा. और प.पू. मुनिवर्य श्री दीक्षितरत्न विजय म.सा. की निश्रा में श्री प्रेमचन्द्र नगर जैन संघ में बेसता महीने के मांगलिक जाहीर प्रवचन में कहा – पत्थर किसके हाथ में है? अगर गुन्डे के हाथ में तो निन्दा पात्र बनने वाला है और शिल्पी के हाथ में है तो स्मृति पात्र बनने वाला है, वैसे ही घडा चाहे चांदी का, पितल का, स्टील का, तांबे का के माटी का हो उस घडे में क्या भरा है उसकी किमत है अगर शराब चांदी के घडे में भरा हो तो उसकी किमत नही है, मगर शुद्ध पानी भरा माटी के घडे की किमत है। प्रश्न इस बात का है आपके पास जीवन संसार का है, संयमी का है। सन्तो का है सज्जन का या दुर्जन का – मगर जीवन में आपके पास विचार कैसे है उसकी किमत का सवाल है। सम्पत्ति, सत्ता, सौदर्य, के आधार पर आप आप की ताकत जात का मूल्यान्कत न करते हुऐ मात्र एक चीज के आधार पर आपके जीवन का मूल्यान्कन कीजियेगा कि आपके पास आने वाले जीवो को आप उपयोगी बनते है कि नहीं अन्त: करण अगर आपका संतोष जनक जवाब देता है तो समझना आपका मनुष्य जन्म सफल है। घाणि के साथ बांधा हुआ बैल सेंकडो कि.मी. गोल गोल चलता रहता है लेकिन आखिरी में वही का वही रहता है – झुले में बैठे हुए लोग चारों तरफ घूमते रहते है मजा आता है दुनिया रंग रंगिली दिखती है लेकिन आखिरी में वहीं के वहीं रहते है – साइकिल को स्टेन्ड पर खडी कर दो – एक पेडल पर घूमाते रहो पहिया घूमता रहेगा लेकिन साईकिल वहीे पर ही रहेगी। मन इच्छानुसार भोजन के दव्य का उपयोग करते रहने से इच्छा समाप्त नहीं होती अमुक समय बाद फीर मन भाग दौड करेगा। निर्भयता – अनुभव – ताकत के अनुसार साधनों से भी मन कभी सन्तुष्ट तो हुआ नहीं होगा नहीं। इसी तरह इन्द्रियों को शान्त करने के लिये सागर तुल्य से भी तृप्ति तो हुई नहीं होगा नही। वैसा ही मन की इच्छा के अनुसार हीरा-माणेक-मोतीओं-भौतिक वस्तु परिग्रह – से भी मन सन्तुष्ट तो हुआ नही होगा। इसीलिये मुनिवर्य समझ रहे है कि – ब्रेक चाहे विमान का, राजधानी-शताब्दी एक्सप्रेस का, मोटरगाडी का, स्कूटर-बाईक का, साईकिल का हो उसमें जीवन को बचा लेने की ताकत है पर आपके जो मन लेकर बैठे है वो ऐसी सर्वोत्तम ब्रेक है की यदि सही समय, सही स्थान, सही संजोग, आने पर आप उसका उपयोग प्रयोग करते है तो उसमें आपकी आत्मा को दानव से मानव, मानव से महामानव – ही नही उस आत्मा को परमपद, मुक्तिपुरि, मौक्ष नगरी ही नही परमात्मा तक पहुंचाने बनने की ताकत है ऐसे मन का ब्रेक का उपयोग आप दुरुपयोग करके मानव के दानव या दुर्गति में भी पहुंचाने की ताकत है उपयोग आप प्रभु गुरुदेवश्री की आज्ञामुजव करते है मनुष्य जन्म का बेडा पार।