पदमावती माता का श्रद्धालुओं ने किया अभिषेक एवं महापूजन गुरुजनों का वर्द्धमानपुरा...

पदमावती माता का श्रद्धालुओं ने किया अभिषेक एवं महापूजन गुरुजनों का वर्द्धमानपुरा जैन संघ द्वारा शोभायात्रा के साथ धूमधाम से किया गया स्वागत

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पूना। राष्ट्र-संत ललितप्रभ सागर महाराज, दार्शनिक संत चन्द्रप्रभ महाराज व डॉ. मुनि शांतिप्रिय सागर महाराज के सान्निध्य में वर्धमान पुरा स्थित जैन मंदिर में पाश्र्व-पदमावती महापूजन का धूमधाम से आयोजन किया गया जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने पदमावती माँ का अभिषेक एवं महापूजन करने का लाभ लिया।

महापूजन के लाभार्थी कल्पेश दूगड़ ने बताया कि इस समारोह में शरीक होने के लिए शहरभर एवं आसपास के शहरों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु वर्धमान पुरा पहुँचे थे। श्रद्धा और भक्ति में झूमते हुए बच्चे से लेकर बड़ों तक सभी ने सर्वप्रथम दिव्य मंत्रोच्चार के साथ दूध, जल, चंदन, अक्षत, गंध, फल, फूल आदि से माता की अष्ट प्रकारी पूजा की। जब संतों ने पदमावती माता के बीज एवं इष्ट मंत्रों का सामूहिक संगान करवाया तो माहौल भावविभोर हो उठा। इस दौरान संतों द्वारा मैया तेरे चरणों की गर धूल जो मिल जाए…,

मेरी लगी मैया संग प्रीत कि दुनिया क्या जाने…, सपने में दर्शन दे गई रे इक छोटी सी गुडिया, सोये भाग्य जगा गई से इक छोटी-सी गुडिया…जैसे कईं भजन गुनगुनाए गए तो श्रद्धालु खड़े होकर नृत्य करने लगे। इस अवसर पर जब लाल वेश धारण कर आई बहनों ने दीपकों के साथ नृत्य किया तो श्रद्धालु आनंद विभोर हो गए। महापूजन के दौरान सभी को मंत्रित रक्षासूत्र प्रदान किए।

इस अवसर पर राष्ट्र-संत ललितप्रभ ने कहा कि  हम भगवान को शांति और समाधि पाने के लिए कम, स्वार्थों की पूर्ति करने के लिए ज्यादा याद करते हैं। हमारी प्रार्थनाओं में सर्मपण कम शिकायतें ज्यादा होती हंै। या तो हम प्रभु से याचना करते हैं या फिर शिकायतें। चुटकी लेते हुए संतप्रवर ने कहा कि दुनिया में दो तरह के भिखारी होते हैं एक मंदिर के बाहर मांगने वाला और दूसरा मंदिर के अंदर मांगने वाला। मंदिर के बाहर भीख मांगने वाला हकीकत में भिखारी होता है, पर मंदिर के अंदर भीख मांगने वाला मन का भिखारी होता है। हम शिकायत करते रहेंगे तो वह देना बंद कर देगा यह सोचकर कि इसे कितना भी दो इसके तो रोने की इसकी आदत पड़ गई है, पर उसने जो दिया है अगर उसके प्रति शुक्रिया अदा करना शुरू कर देंगे तो वह सदा हमारे भंडार भरता रहेगा।

संतप्रवर ने कहा कि हमें प्रभु से अगर कुछ मांगना ही है तो यह मांगे कि प्रभु जब तक मैं जिऊँ तब तक मेरी मति सन्मति रहे और जब मैं मरकर तेरे द्वार पर आऊँ तो मुझे सद्गति दे देना। प्रभु से प्रार्थना करते समय उनसे अच्छा स्वभाव, मीठी वाणी, मधुर व्यवहार, उदार हाथ, अच्छी सोच, ईमानदारी की रोटी, संकटों को सामना करने की शक्ति और प्राणीमात्र में प्रभु को निहारने की नजरें मांगें। मूर्ति में भगवान को निहारना सरल है, पर प्रभु की सच्ची पूजा तभी होगी जब हम प्राणीमात्र में प्रभु को निहारेंगे। इस अवसर पर महापूजन के लाभार्थी कल्पेश बाबूलाल दूगड़ परिवार का गुरुजन, दादावाड़ी व वर्धमान जैन मंदिर ट्रस्ट मण्डल द्वारा अभिनंदन किया गया।

आभार कल्याणी दूगड़ ने दिया। कार्यक्रम के पश्चात् महाआरती की गई। कार्यक्रम में दादावाड़ी के अध्यक्ष भंवरलाल जैन, समाजसेवी ओमप्रकाश रांका, माणिकचंद गु्रप के प्रकाश धारीवाल आदि अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे। इससे पूर्व गुरुजनों का वर्द्धमान पुरा जैन संघ द्वारा शोभायात्रा के साथ धूमधाम से स्वागत किया गया।