राइटिंग इंस्ट्रूमेंट उद्योग का भविष्य उज्ज्वल

राइटिंग इंस्ट्रूमेंट उद्योग का भविष्य उज्ज्वल

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भारतीय लेखनी बाजार के परिदृश्य और इस वर्ण स्वर्ण जयंती समारोह मनाने जा रही फ्लेयर पेन्स लि. के बारे में कंपनी निदेशक मोहित राठौड से बातचीत के प्रमुख अंश:

आप ५ दशकों से सफलतापूर्वक पेनों की बिक्री एवं उत्पादन करते आ रहे हैं। इस सफलता के क्या राज हैं?

वर्ष १९६७ में एक साधारण सी शुरूआत से लेकर अब तक हमने एक लंबा सफर तय किया है। साधारण उत्पादन गुणवत्ता, नवोन्मषी डिजाइन एवं ग्राहकों की जरूरत के अनुरूप उत्पादन बनाने के कारण इन ५० वर्षों में फ्लेयर पेन्स सबकी पसंद बनी हुई है। पेन्स एक आईएसओ २००१-२००८ एवं एसए ८०००-२००८ प्रमाणित कंपनी है। यह सभी राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय दिशा निर्देशों का अनुपालन करती है। फ्लेयर ने राइटिंग इन्स्टूमेंट्स उद्योग (लेखनी उद्योग) की अनुआ पियरे कार्डिन (फ्रांस) एवं पेंटल (जापान) के साथ संयुक्त उपक्रम स्थापित किए हैं। हमारे स्व-ग्रह ब्रांड रूडी केलनर, लैंडमार्क एवं फ्लेयर काफी लोकप्रिय हैं। हाल ही में हमने राइटिंग इन्स्टूमेंट्स में अग्रणी जर्मनी ब्रांड नाम हॉजर का अधिग्रहण किया है। वर्ष १९९३ में स्थापित हॉजर यूरोपीय एवं उत्तरी अमरीका बाजारों में काफी लोकप्रिय हैं। हमें उम्मीद है कि इस अधिग्रहण से आगामी वर्षों में हमारी बिक्री में काफी इजाफा होगा। हालांकि इस अधिग्रहण में लगने वाली लागत की ८ वर्षों में भरपाई हो जाएगी। लेकिन दीर्घकाल में इस का लाभ निश्चित रूप से मिलेगा। फ्लेयर की लगभग ६ लाख वर्गफूट में फैली मुंबई, दमन, देहरादून एवं सूरत (स्पेशन इकोनॉमिक जोन) स्थित उत्पादन इकाइयों की कुल स्थापित क्षमता ५ मिलियन प्लास्टिक पेन प्रतिदिन एवं १ लाख मेटल पेन प्रतिदिन हैं। फ्लेयर में ४००० से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें २८०० महिलाएं हैं। वर्ष २०१४ में अमेरिकी उपमहाद्वीप की जरूरत पूरा करने क ेलिए फ्लेयर ने ५ मिलियन प्रतिदिन की स्थापित क्षमता के साथ नैरोबी में पहली विदेश उत्पादन सुविधा शुरू की। गत २ वर्षों से लगातार फ्लेयर भारत की अग्रणी पेन निर्यातक का खिताब जीतती आ रही है।

उद्योग का वर्तमान परिदृश्य कैसा है?

मात्रा की दृष्टी से देखें तो मार्च २०१६ को समाप्त वित्त वर्ष में भारत ने १२८० करोड पेनों का उत्पादन किया, इनमें से ७२ प्रतिशत बॉल पाइंट पेनें एवं २६ प्रतिशत जेल इंक पेनें थी। शेष पेनें मेटल पेन फाउंटेन इंक पेन, स्केच पेन, हाईलाइटर एवं मार्कर श्रेणी में थी। वित्त वर्ष २०१५-२०१६ में भारतीय राइटिंग इन्स्टूमेंट्स उद्योग का अनुमानित कारोबार ४६०० करोड रूपए का था और यह ८-१० प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ रहा है।

सरकार से उद्योग की क्या अपेक्षाएं हैं?

जीएसटी एक बहुप्रतीक्षित टैक्स है और हम नए युग की शुरूआत की बेसब्री से प्रतीक्षा कर रहे हैं। कराधान में मानकीकरण के अपने फायदे हैं। कराधान का अनुपालन बढा है। हम सभी चाहते हैं कि ३० रूपये एमआरपी से नीचे मूल्य वाली सभी पेनें कर मुक्त हों इसके अलावा चीन एवं अन्य यूरोपीय देशों के पेन निर्माताओं को सस्ती पूंजी उपलब्ध है। उत्पादन बढाने के लिए ऑटोमेशन जरूरी है। मात्रा एवं मूल्य दोनों मामले में भारत, चीन से आगे निकल सकता है। लेकिन इसके लिए ऑटोमेशन चाहिए। अत: उद्योग को भारी शुरूआती निवेश की आवश्यकता है। मेक इन इंडिया अभियान का जोर भी भारतीय राइटिंग इन्स्टूमेंट उद्योग पर होना चाहिए और एक राष्ट्र के रूप में हमें हांगकांग, फ्रेंकफुर्त एवं दुबई में आयोजित होने वाले विश्व के प्रमुख व्यापार मेलों में हिस्सा लेना चाहिए।

फ्लेयर पेन्स अपनी सतत वृद्धि के लिए क्या कदम उठाने जा रही है?

सरकार के राष्ट्रीय साक्षरता मिशन के तहत प्रतिवर्ष १५ वर्ष एवं उससे अधिक उम्र के ३० लाख से अधिक भारतीय नए साक्षर हो रहे हैं और फ्लेयर पेन उन्हें अपना पहला ग्राहक बनाने का इरादा रखती है। १०-१२ मिलियन पेन के उपयोगकर्ता अच्छी गुणवत्ता एवं विश्वसनीयता वाली पेन की तलाश में रहते हैं, जिन्हें फ्लेयर पेन्स १० रूपये से ३० रूपये के मूल्य खंड में अच्छी गुणवत्ता के बॉल प्वाइंट एवं जेल इंक पेन उपलब्ध कराना चाहती है। फ्लेयर का मिशन ग्राहकों की अपेक्षाओं पर खरे उतरना और बढती आकांक्षाओं से आगे रहना है। उचित कीमत पर एडवांस राइटिंग अनुभव प्रदान कराना एवं चुनौती भरा काम है और हम हर दिन नया देने का प्रयास करते हैं। फ्लेयर को स्विस, जर्मन, जापनिज, कोरियन एवं ताइवानीज सहित ४५ से अधिक ग्लोबल एवं भारतीय वेंडरों का समर्थन प्राप्त है।