गच्छाधिपति आचार्य श्रीमद् विजय नित्यानंदसूरिजी म.सा. का पुणे में ऐतिहासिक चातुर्मासिक प्रवेश

गच्छाधिपति आचार्य श्रीमद् विजय नित्यानंदसूरिजी म.सा. का पुणे में ऐतिहासिक चातुर्मासिक प्रवेश

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पुणे। श्री राजस्थान जैन श्वे.संघ, सोमवार पेठ, पूना में भगवान महावीर स्वामी की पाट परम्परा के 77वें पट्टधर तथा पंजाब केसरी गुरु वल्लभ के समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति आचार्य श्रीमद् विजय नित्यानंदसूरिजी म.सा., तप चक्रवर्ती, समुदाय वडिल आचार्य श्रीमद् विजय वसंतसूरिजी म.सा. आदि साधु-साध्वीवृन्द का अविस्मरणीय, ऐतिहासिक चातुर्मासिक प्रवेश भव्यतापूर्वक सम्पन्न हुआ।

प्रवेश प्रसंग पर डेहला वाला समुदाय के गच्छाधिपति आचार्य श्रीमद् विजय अभयदेव सूरीश्वरजी म.सा., डेहलावाला समुदाय के समुदाय वडिल आचार्य श्रीमद् विजय यशोभद्रसूरीश्वरजी म.सा, आचार्य श्रीमद् विजय पीयूषभद्रसूरिजी म.सा., पन्यास श्री मोक्षरत्नविजयजी म.सा., आदि ठाणा, सागर समुदाय के मालव मार्तण्ड आचार्य श्री मुक्तिसागरसूरिजी म., आदि ठाणा, खरतरगच्छ के विख्यात प्रवचनकार महोपाध्याय श्री चन्द्रप्रभसागरजी म. सा., श्री ललितप्रभ सागरजी म.सा. आदि ठाणा, उपाध्याय श्री दिव्यचंद्रविजयजी म., स्थानकवासी श्रमण संघ के आगमज्ञाता, उपाध्याय श्री जितेंद्र मुनिजी म. सा आदि ठाणा, श्री पद्मचंदजी भंडारी, श्री अमरमुनिजी म. सा के शिष्य श्री पंकजमुनिजी म.सा श्री वरुणमुनि जी म. सा आदि ठाणा तथा मंदिरमार्गी और स्थानकवासी परम्परा के साध्वीगण भी इस प्रवेशोत्सव में सम्मिलित हुए जिससे इस प्रवेश और धर्मसभा में अद्भुत वातावरण निहारने को मिला। सभी संतों की दिव्य वाणी का श्रवण करके हजारों श्रद्धालु धन्य धन्य हो गए।

प्रवेश प्रसंग पर सम्पूर्ण देश भर से करीब 1000 मेहमान गुरुभक्त पधारे और करीब 6000 लोग प्रवेश की शोभा यात्रा और धर्मसभा में शामिल हुए। गुरु भूमि पंजाब के शिरोमणि जैन संघ लुधियाना नगरी से श्री आत्मानंद जैन महासभा उत्तरी भारत के तत्त्वावधान में करीब 400 गुरुभक्त पुणे पधारे। गुरुदेव को काम्बली ओढ़ाने का चढ़ावा भाग्यशाली गुरुभक्त स्व. सज्जनबेन पुनमचंदजी कोठारी परिवार ने प्राप्त किया। पुणे में श्री विजय वल्लभ जैन कॉलेज के निर्माण हेतु 10 एकड़ भूमि भेंट देने वाले भाग्यशालिओं ने गुरुदेव के आगमन की ख़ुशी में 2 एकड़ और भूमि भेंट करने की घोषणा की।

कॉलेज से आगे पुणे में भी भविष्य में जैन यूनिवर्सिटी बने गच्छनायक गुरुदेव की इस भावनानुसार 27 एकड़ भूमि लेने का निर्णय किया गया है। 12 एकड़ तो भेंट स्वरुप मिल गयी है अब बाकि १5 एकड़ के लिए 27-27 लाख के 54 नाम लेने की योजना बनाई गयी जिसमें गुरुदेव की प्रेरणा से 27 नाम प्राप्त हो गए। इस कॉलेज परिसर में भव्य शिखरबद्ध जिन मन्दिर का निर्माण करवाने का लाभ भी भूमिदानदाता तथा उनके मित्र ने मिलकर प्राप्त किया। इस कॉलेज के परिसर सहित करीब 150 एकड़ भूमि है। जिसको विशाल नगर के रूप में विकसित किया जायेगा। गुरुदेव की भावनानुसार डेवलपर ने इसका नाम श्री आत्म वल्लभ नगर रखने की शुभ उद्घोषणा की।

पुणे के सबसे बड़े प्रख्यात बिल्डर सुयोग के मालिक श्री भरत भाई द्वारा भी एक बहुत बड़ा सोसाइटी का निर्माण करवाया जा रहा है। गुरुदेव की प्रेरणा से उसका नाम गुरु समुद्र नगर रखने की घोषणा हुई। सुयोग की और से ही 16 एकड़ भूमि पर एक और विशाल सोसाइटी का कार्य प्रारम्भ होने वाला है। गुरुदेव ने जब कहा कि गुरु समुद्र का ये 125वां जन्म जयंती वर्ष चल रहा है और साधर्मिक आवास योजना का कुछ काम करो तो उसी समय उन्होंने उसी प्रोजेक्ट में 125 फ्लैट साधर्मिक परिवारों को बनाकर देने की घोषणा की। जोधपुर में निर्मित श्री विजय वल्लभ जैन यूनिवर्सिटी के पदाधिकारी पधारे और यूनिवर्सिटी के प्रथम ब्रोउचर का अनावरण किया गया।

दक्षिण भारत की महानगरी चेन्नई से तण्डलम में साधर्मिक परिवारों के लिए गच्छनायक गुरुदेव की प्रेरणा से उनकी सूरि मन्त्र पीठिका की साधना के अनुमोदनार्थ निर्मित श्री आत्म वल्लभ नगर के उद्घाटन और उसी परिसर में नव निर्मित भारत के सम्भवत: प्रथम ऐसे जिनमन्दिर की अंजन शलाका प्रतिष्ठा पर पधारने और उसका मुहूर्त प्रदान करने की विनती की गयी जिस मन्दिर में कायोत्सर्ग मुद्रा में 15-15 फुट की चार जिन प्रतिमाएं चौमुख के रूप में प्रतिष्ठित होंगी। साथ ही बिन्नी मिल में निर्मित, परम्बुर में निर्माणाधीन भव्य जिनमंदिर और रामापुरम में वल्लभ स्मारक की अंजनशलाका प्रतिष्ठा की विनंती हुई। गुरुदेव ने जनवरी 2017 में सभी कार्य सम्पन्न करवाने के मुहूर्तों की उद्घोषणा की। जनवरी 2017 की संक्रांति भी चेन्नई में होगी।

श्री आत्मानंद जैन महासभा उत्तरी भारत के द्वारा गुरुदेव को पंजाब को शीघ्र आने की वहाँ चातुर्मास करने और तपस्वी गुरुदेव के 50वें वर्षीतप पारणा गच्छनायक गुरुदेव के दीक्षा स्वर्ण वर्ष व आचार्य पद रजत जयंती वर्ष के प्रसंग पंजाब की धरती पर आयोजित करने की विनंती की। दिल्ली की और से भी ऐसी विनंती पुरे एनसीआर की और से की गयी। पुणे चातुर्मास में सिद्धिदायक श्री सिद्धि तप की सामुदायिक तपाराधना शुरू होने की घोषणा हुई। पुणे सोमवार पेठ जैन संघ के इतिहास में ये प्रवेशोत्स स्वर्णाक्षरों से लिखने योग्य बना है। ज्ञात रहे पूज्य गच्छनायक शांतिदूत आचार्य भगवंत के करीब सवा साल से मात्र 8 द्रव्य सहित एकासना तप चल रहा है।