राष्ट्रसंत श्री ललीतप्रभसागरजी एवं चन्द्रप्रभसागरजी म.सा. का पुणे में भव्य चार्तुमास प्रवेश

राष्ट्रसंत श्री ललीतप्रभसागरजी एवं चन्द्रप्रभसागरजी म.सा. का पुणे में भव्य चार्तुमास प्रवेश

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पुणे। श्री जैन श्वेताम्बर दादावाडी टेम्पल ट्रस्ट पुणे। के तत्वाधान में चातुर्मास हेतु राष्ट्रसंतो ने मंगल प्रवेश किया। पूज्यश्री ललितप्रभ सागरजी व पूज्यश्री चन्द्रप्रभसागरजी म.सा. करीबन १३०० कि.मी. पैदल विहार कर मारवाड, मेवाड, मालवा होते हुए पुणे में पधारे। आपके स्वागत में मुकुंदनगर – संजय गार्डन, लक्ष्मीनारायण चौक मित्र मंडल होते हुए अद्भूत, अविस्मरणीय ऐतिहासिक शोभा यात्रा सम्पन्न हुई। शोभा यात्रा में नगाडावादक, इन्द्रध्वजा, १०१ कलशधारी बालिकाए, पूणेकर ढोल ताशा पथक, अरिहंत ग्रुप के छोटे ४०० बालक-बालिका ढोल पथक, १०० ध्वज धारक नन्हे बालक, सुशोभित रथ, बग्गी, सुरभी बैंड, झंकार बैंण्ड के साथ हजारों राजस्थानी फेटा पहने हुए जैन समाज के ही नही, अपितु अन्य समाज के महानुभव भी उपस्थित थे। विविध वेषभूषा में ५० महिला मंडल के सदस्य भी साफा पहनकर इस शोभायात्रा में शामिल थे। गुरुजनों का दादावाडी में मंगल प्रवेश करने के पश्चात गणेश कला क्रिडा रंग मंच में विशाल सभा के रुप में समापन हुआ। राष्ट्र संत ललीतप्रभसागरजी, चन्द्रप्रभसागरजी, डा. मुनी शांतिप्रिय सागरजी म.सा. एवं साध्वीजी चरणरत्नाश्रीजी म.सा. व साध्वीजी विरागरत्नाश्रीजी म.सा. चातुर्मासार्थ दादावाडी में पधारे। इस चातुर्मास प्रवेश समारोह में महापौर प्रशात जगताप, उपमहापोर मुकाशी अलगुडे, हर्षवर्धन पाटिल, विश्वजीत कदम, समाज कल्याण राज्यमंत्री दिलीप कांबळे, विधायक माधुरीताई मिसाळ, मोहन जोशी, नगरसेविका मनिषा चोरबले, अॅड अभयजी छाजेड, कमलाबाई व्यवहारे, सुनंदा गडाळे तथा ट्रस्ट मंडल के अध्यक्ष भंवरलाल जैन, ओमप्रकाश रांका, चातुर्मास समिती के अध्यक्ष अशोक कटारिया, विजयकांत कोठारी, ट्रस्ट के पदाधिकारी विभिन्न समितियों के मान्यवरों के साथ सामाजिक कार्यकर्ता अचल जैन, प्रवीण जैन, विमल संघवी, राजेश सांकला, भरत सुराणा, संजय परमार, अनिल गेलडा, शरद शहा, महेन्द्र जोधावत, अशोक गुंदेशा, सतिश परमार, बालचंद कटारिया, इन्दर छाजेड, मीठालाल जैन सहित ५००० से अधिक महानुभव उपस्थित थे। शोभायात्रा की व्यवस्था जिनकुशल सेवा मंडल ने संभाली। समारोह का सूत्र संचालन संपत जैन एवं स्वागत गीत ऐश्वर्या भंडारी एवं सुस्मिता भंडारी ने पेश किया। इस पावन प्रवेश प्रसंग पर पूज्य गुरुदेव ने जनमानस एवं विश्व की शांति के लिए मंगलपाठ पढ़ा तथा प्रेम, मानवता का संदेश देते हुए अहिंसा का जीवन में पालन करने का आवाहन किया।