समकित सम्राट आचार्य श्री विजय प्रभाकर सूरीश्वरजी म.सा. की पावन निश्रा में...

समकित सम्राट आचार्य श्री विजय प्रभाकर सूरीश्वरजी म.सा. की पावन निश्रा में वी. वी. पुरम् बैंगलुरु श्री सीमंधर स्वामी शांति सूरी जैन संघ में चातुर्मासीक धर्म आराधना की परंपरा

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बैंगलुरु। लब्धिधारी संयम सम्राट श्रीमद् विजय दक्ष सूरीश्वरजी म.सा. के पट्टलंकार समकित सम्राट प्रसिद्ध प्रवचनकार, ज्योतिष विशारद प.पू. आचार्य श्री विजय प्रभाकर सूरीश्वरजी म.सा. आदि ठाणा पू. साध्वीजी श्री कल्पपूर्णाश्रीजी म.सा. आदि ठाणा की परम पावन निश्रा में चातुर्मासीक आराधना बडे हर्षोल्लास के साथ प्रवर्तमान है।

विश्वशांति हेतु चौद पूर्व के सार स्वरुप श्री नवकार महामंत्र का सामूहिक सेवा का जप का अनुष्ठान में २०० भाग्यशाली भाई, बहन जप की साधना कर रहे है। महोपाध्याय श्री विनय विजयजी म.सा. रचित शांत सुधारस नामके पवित्र एवं महान ग्रंथ की अष्टप्रकारी पूजा एवं ज्ञान पूजा के साथ सविधि यह ग्रंथ पूज्य आचार्य श्री विजय प्रभाकर सूरीश्वरजी म.सा. को लाभार्थी के द्वारा अर्पण किया गया। शांत सुधारस नाम के महान ग्रंथ के ऊपर विवेचना करते हुए आचार्य भगवंतश्री ने कहा ये महान ग्रंथ में बारह भावना का विशिष्ट विवेचन श्रीमान विनय विजयजीने प्रतिपादित किया है। अपने मन को अशांति में से शांति प्राप्त कराने में ये महान गं्रथ बहुत ही उपयोगी एवं ऊन्नतिदायक है। पूरा जगत अशरण-अनित्य की भावना में डूबा हुआ है। संसार के सभी पदार्थ अशाश्वत है। शाश्वत सिर्फ एक आत्मा ही है संसार के माने हुए सभी पदार्थ का विनाश है, शाश्वत आत्मा को ऊध्र्व कक्षा पर ले जाने के लिए संसार के पदार्थो को साधन मानकर उपयोग में लाना है। साध्य और सिद्धि प्राप्ति करानेवाला सिर्फ धर्माचरण ही है। सत्कर्म – सदाचार और सर्वोच्च जिवन की दिनचर्या से ही आत्मा ऊज्जवल बनता है। अत:चातुर्मास इसीलिए है। चतुर बनकर चार मास धर्म साधना करनी है और आत्मा को जागृत कर धर्माचरण करना है। चातुर्मासिक कर्तव्यों में परमात्म भक्ति का विशेष महत्व है। ये भक्ति ही मुक्ति की दुति है। अत: भक्ति में लीन बनो विश्व शांति के निमित बेंगलोर नगर में ऐसी भक्ति का एक भव्य अवसर आ रहा है। २३वें तीर्थंकर श्री पाश्र्वनाथ भगवान एवं राज-राजेश्वरी भगवती श्री पद्मावती महादेवी का भव्य महापूजन १४ अगस्त को वी. वी. पुरम में कल्याण मंडप के विशाल ग्राउंड में आयोजित है।

५५४ जोड़े के साथ ये भव्यातिभव्य महापूजन पूज्य आचार्य श्री विजय प्रभाकर सूरीश्वरजी म.सा. की प्रेरणा से श्री सीमंधर शांति सूरी जैन ट्रस्ट संघ द्वारा आयोजित है। ये भव्य महापूजन के अति विशिष्ट चढ़ावें २४ अगस्त को आराधना भुवन में सुबह ९.३० से बुलाये जायेंगे। सकल श्री संघ को यह भव्य अवसर में लाभ लेने हेतु ट्रस्ट मंडल ने आमंत्रण दिया है। जैन शासन में राज – राजेश्वरी भगवती श्री पद्मावती महादेवी का महिमा अपरंपार है। मुंबई अगासी तीर्थ से प्राचीन चमत्कारीक श्री पद्मावती माता की मूर्ति पूजन हेतु प्लेन में यहा लाई जाएगी।