खौंड कि धन्य धरा पर आचार्य श्री जयानन्द सूरीश्वरजी म.सा. (भोलेबाबा) का...

खौंड कि धन्य धरा पर आचार्य श्री जयानन्द सूरीश्वरजी म.सा. (भोलेबाबा) का अभूतपूर्व प्रवेश

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देव, गुरु, धर्म में हुआ भक्तों का भावपूर्ण निवेश

खौड। मरुधरा की धर्मनगरी खौड में श्री नमिनाथ जैन देवस्थान पेढ़ी के तत्त्वाधान में वर्तमान गच्छाधिपति शांतिदूत आचार्य श्रीमद विजय नित्यानंदसूरीश्वरजी म.सा. के आज्ञानुवर्ती परम पूज्य गुरुदेव गोड़वाड़ भूषण, स्वर्णसंत, ज्ञानप्रभाकर, विद्वान साहित्यकार बडे भैया आचार्य भगवंत श्रीमद विजय जयानन्द सूरीश्वरजी म.सा. (भोलेबाबा), कार्यदक्ष मुनि श्री जयकिर्ती विजयजी म.सा., सेवाभावी मुनि श्री दिव्यांश विजयजी म.सा., एवं शासनरत्ना तपोनिष्ठ साध्वी अमितगुणा श्रीजी म.सा. (माताजी महाराज) एवं साध्वी श्री पीयूषपूर्णाश्रीजी म.सा., साध्वी श्री प्रशांतपूर्णा श्रीजी म.सा. आदि ठाणा का भव्यातिभव्य न भूतो, न भविष्यतो ऐतिहासिक चातुर्मास प्रवेश भव्य सौमेये के साथ संपन्न हुआ।

Khod - jayanand suriji2        प्रात: ८ बजे से श्री जैन संघ के सदस्य, लाभार्थी परिवार, ट्रस्टमंडल के सदस्यों एवं आगंतुक महेमानो के साथ सफेद गणवेश एवं रंगबिरंगे साफे पहनकर हाथ में जब तक सुरज चांद रहेगा, गुरु वल्लभ तेरा नाम रहेगा, गुरु वल्लभ अमर रहे, की तख्तीया लहराते हुए एवं गुरुजी अमारो अन्र्तनांद, अमने आपो आशिर्वादÓ भोले बाबा की जयकारों के साथ आंबेडकर छात्रावास पहुंचा। वहा से शुरु हुई शोभा यात्रा हाईस्कूल, ग्रामपंचायत, मुख्य स्टेड, मेहतो का बास, बाजार होते हुए गुरुदेव के साथ घोडे, रथ, सलामी तोप, बैंड बाजे, गेर नृत्य के साथ नाचते, झुमते, गाते हुए नमिनाथ मंदिर पहुंची। जंडियाला गुरु (पंजाब) के युवाओं का डांडिया नृत्य विशेष आकर्षण का केन्द्र रहा। इस अवसर पर महिलाएं चुनरी में सर पर कलश धारण करते हुए सैकड़ो की संख्या में शोभा यात्रा में आकर्षण का केन्द्र रहीं। जैसे ही शोभा यात्रा रवाना हुई भगवान इन्द्र ने भी अपना आर्शिवाद प्रदान किया। भारी रीमझीम में भी गुरुदेव एवं गुरुभक्तों के जोश को और गति प्रदान की। शोभायात्रा जैसे जैसे आगे बढती गई गुरुभक्तों का हुजुम बढता ही चला गया। मंगल प्रवेश के दौरान शोभायात्रा का जगह-जगह पर स्वागत किया एवं सभी धर्म, जाति के लोगो ने गुरुदेव को नमन कर आर्शिवाद लिया। राजकीय, उच्च माध्यमिक के छात्र- छात्राओं ने गुरुवर के दर्शन कर आर्शिवाद लिया। ज्यो-ज्यो शोभायात्रा आगे बढी गुरुदर्शन का तांता लगा रहा। गांव में प्रवेश के साथ गुरुदेव की शोभायात्रा मेहतो के बास पहुंची वहा पर गुरुदेव ने जिनालय के दर्शन किये। ज्ञात रहे कि १८ वर्ष पूर्ण आचार्य श्री नित्यानंद सूरीश्वरजी के साथ चार्तुमास किया था। आगे बढ़ती हुई शोभायात्रा नमिनाथ जैन मंदिर पहुंची। आचार्य भगवंत एवं मुनि भगवंतो ने दर्शन कर क्रिया भवन का उद्घाटन किया। फिर आरंभ हुई धर्मसभा जिसमें गुरुदेव ने मंगलाचरण सुना कर शुभारंभ किया। 

Khod - jayanand surijiमुनि श्री जयकिर्ती विजयजी म.सा. ने अपने ओजस्वी संबोधन में कहा कि ४९ वर्षों के अंतराल से आचार्य देव एवं माताजी महाराज का चातुर्मास आज पुण्यनगरी खौड़ में हो रहा हैं यह बहुत ही हर्ष की बात हैं। उन्होंने सभी विवादों को भूलकर चार्तुमास को सफल बनाने का आव्हान किया एवं चार्तुमास के दौरान होने वाले सिद्धीतप व अन्य धार्मिक अनुष्ठानों की जानकारी प्रदान की। उन्होंने संघ के सदस्यों से कहा कि वे १ + १ =२ न होते हुए १+१ = ११ बने। उन्होंने दोनों संघो के अध्यक्षों को मंच पर बुलाकर एक दूसरे को माला पहनाने को कहा दोनों अध्यक्ष श्री उगमराज तेलीसरा एवं जयचंद मेहता से कहा कि आपने एक दूसरे के गले में वरमाला तो डाल दी है अब ये पति-पत्नि जैसा रिश्ता आपको निभाना हैं व चार्तुमास में सभी धर्म आराधनाओं में मिलजुल कर हिस्सा लेना हैं। खौड का अर्थ हो है मिठास आप मिठास को और बढाए पुज्य गुरुदेव एवं माताजी महाराज सभी साध्वीजी को कामली वोहराने का चढावा १५,१५,५१५ में चार्तुमास के मुख्य लाभार्थी श्रीमती शांतिबाई घेवरचंदजी पुनमिया के पुत्र महावीर पुनमिया एवं श्रीमती काजुबाई भेरूमलजी मेहता परिवार भूति निवासी परिवार संयुक्त लिया। गुरुदेव ने अपने प्रवचन में कहा कि ये मेरा चार्तुमास नही हैं ये मेरी मां के साथ मेरा चार्तुमास है, मां के प्रति गुरुदेव के हृदय में और मां के हृदय में अपने बेटे के प्रति वात्सल्य का अनुठा भाव देखने को मिला गुरुदेव ने अपने मधुर कंठ से मां के प्रति एक भजन प्रस्तुत किया।

मेरी झोली छोटी पड़ गई रे,

इतना दिया मेरी मां ने,

मेरी बिगडी मां ने बनाई,

सोई तकदीर जगाई,

ये बात तो सुनी सुनाई,

मैं कुछ नही बतलाता रें,

इतना दिया मेरी मां ने

Khod - jayanand suriji5समारोह में हिमांशु लिंगा दिल्ली द्वारा पन्सास प्रवर श्री चिदानंद विजयजी म.सा. द्वारा लिखित महावीर पाट परम्परा गुरुदेव को अर्पित की। आत्मवल्लभ सेवा मंडल के अध्यक्ष श्री पारसभाई ने अपने संबोधन में कहा कि गुरुवल्लभ ने अज्ञानता के तिमिर को हटाने का जो कार्य शुरु किया था वो अविरल आगे बढता रहेगा, हम सभी मिलकर गुरुदेव के आर्शिवाद एवं मार्गदर्शन से गुरुवल्लभ के सपनों को साकार करने में एकजूटता से काम करेंगे। समारोह में श्री नमिनाथ जैन देवस्थान पेढी के अध्यक्ष श्री उगमराज तेलीसरा ने अपने संबोधन में कहा कि ये हमारा सौभाग्य हैं कि आज हमें आचार्य श्री जयानंद सूरीश्वरजी म.सा. (भोलेबाबा) एवं शासनरत्ना तपोनिष्ठ साध्वी अमितगुणा श्रीजी म.सा. (माताजी महाराज) के चार्तुमास का अवसर मिला। हम सभी मिलजुल कर इस चार्तुमास को स्मरणीय बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोडेंगे। कार्यक्रम में बहुमान के लाभार्थी श्रीमती लेहरोबाई सरेमलजी तेलीसरा परिवार ने सभी लाभार्थी परिवार का स्मृतिचिन्ह प्रदान कर किया। जिसमें चार्तुमास के मुख्य लाभार्थी, खौड नगर में समस्त ग्राम वासियों ने गुरुप्रसादी होती वितरण के लाभार्थी श्री शांतिबाई घेवरचंदजी पुनमिया परिवार, खौड जैन संघ में मेहंदी वितरण महिलाओं की गांवसाझी, पत्रिका में जयजिनेन्द्र के लाभार्थी श्रीमती मदनबेन ज्योतिचंदजी तेलीसरा एवं दिनेश भाई शाही करबे के लाभार्थी रजत स्तंभ के लाभार्थी परिवार, भरत चक्रवर्ती भोजन खंड के लाभार्थी परिवार, लाईट डेकोरेशन के लाभार्थी परिवार, मुख्य सहयोगी, सहयोगी, एवं शुभेच्छक परिवार के सदस्यो का समावेश था। मंच का संचालन दिनेश शर्मा आहोर ने किया। संपूर्ण चार्तुमास के दौरान भोजन की व्यवस्था डोवेश्वर केटर्स – श्री पनजी बालराई , फोटोग्राफी – एन. के. स्टुडीयो (खौड़) के दिलीप जवड़ा, जिनमंदिर में फुलों की सजावट सुजाराम फलवाले (जोधपुर), बैंड श्री किशोरभाई बाबु बैड (कोसेलाव) द्वारा की गयी।

Khod - jayanand suriji1चार्तुमास को सफल बनाने में नमिनाथ जैन ट्रस्ट मंडल के अध्यक्ष उगमराज एस. तेलीसरा, उपाध्यक्ष रतनचंद पी. संचेती, सेक्रेटरी रमेशकुमार पी. तेलीसरा, जोईन्ट सेके्रटरी संजय यू. सेमलानी, खजांची उगमराज एच. संचेती, सह खजांची उगमराज एम. धोका, कांतिलाल एम. तेलीसरा, ट्रस्टी खुशपतराज टी. संचेती, कुशल एम. पुनमिया, विपुल आर. लोढ़ा, अजीत एस. लोढ़ा एवं सलाहकार समिती के मोहनराज सी. लोढ़ा, लालचंद सी. संचेती, घीसुलाल डी. सेमलानी, अमरचंद एम. तेलीसरा, मांगीलाल बी. पुनमिया, उगमराज जी. सेमलानी के सदस्यों के साथ श्री जैन संघ के सभी सदस्य जुटे हुए है।

आचार्य श्री नित्यानंदजी जैसे दिखते है : आचार्य श्री जयानंद सूरीश्वरजी म.सा. को देखकर छत्तीस कौम के सभी लोगों के मुख से एक ही बात निकली की गुरुदेव तो श्री नित्यानंदजी जैसे ही दिखते हैं ज्ञात रहे कि १७ वर्ष पुर्व आचार्य नित्यानंदजी के चार्तुमास के दौरान छत्तीस कौम के लोगो को नयी दिशा प्रदान की थी जिसमें शिक्षा ग्रहण करना एवं व्यसनों को त्याग करवाना मुख्य थे। मेघराज भी बरसे:

बसंत आता है तो प्रकृति मुस्कुराती है

संत आता हैं, तो संस्कृति मुस्कुराती है

शोभायात्रा के दौरान इन्द्र देवता की मेहर रही जोरदार बारीश के दौरान तीनों गुरुदेव मंद मंद मुस्कराते रहे, गुरुभक्त भी झुमकर नाचे, युवाओं का जोश तो देखते ही बनता था। 

दिखा बुजर्गो  का मार्गदर्शन एवं युवाओंका जोश: मांगीलाल पुनमिया, लालचंद संचेती, बाबुला सोनमलिया, मदनराज लोढा, ज्योतिचंद बी शाह, बाबूलाल लोढ़ा, घिसुलाल संचेती, रमेश एम. संचेती, रमेश बी. संचेती, कपूरचंद पारेख, रमेश सोनमलिया, अमरचंद तेलीसरा, उगमराज सेमलानी, खुशपतराज संचेती, श्रीपाल संचेती, कांति पुनमिया, कुशल पारेख, संजय सेमलानी, जयंतिलाल तेलीसरा, किरण तेलिसरा, मांगीलाल पुनमिया, रमेश सी. लोढ़ा, मुलचंद लोढ़ा, चन्दन तेलीसरा, दिनेश शाह, सोहनराज धोका, फतेचंद लोढ़ा, डा. सोहन तेलीसरा, महावीर लोढ़ा, उगमराज लोढ़ा, अमित लोढ़ा, दिनेश लोढ़ा, बाबुलाल पुनमिया, जेठमल पुनमिया, सुरेश के. लोढ़ा, जयंति लोढ़ा, महेन्द्र लोढ़ा, केवल धोका, कांतिलाल धोका, सोहनराज सोलंकी, कांतिलाल तेलीसरा की रही महत्वपूर्ण भूमिका।  Khod - jayanand suriji3

गरिमामयी उपस्थिती : सादडी जैन संघ के अध्यक्ष घीसुलाल बादामिया, विमल धोका, खुडाला जैन संघ के अध्यक्ष इन्दरभाई राणावत, अमृत पुनमिया, शांतिलाल बोकडिया बाली जैन संघ के अध्यक्ष बाबुभाई मंडलेचा, श्री पाश्र्वनाथ शिक्षा संस्थान वरकाणा के अध्यक्ष फतेचंद राणावत, सुभाष वी. जगावत, जयंतिलाल दोसी, आत्मवल्लभ के पारसभाई बेडावाला, गुरुभक्त अमृत  पुनमिया, मदन कितावत, धीरज शोभावत, खिवांदी, सांडेराव जैन संघ के भरत जे. मेहता, समाज के अग्रणी सुकन परमार, प्रवीण लुनिया, अशोक बी. जैन, मेहतो बास के जयचंद मेहता, महेन्द्र मेहता, गौतम मेहता, मनीष मेहता, शांतिलाल मेहता के साथ दिल्ली, मुंबई, चैन्नई, सुरत, अहमदाबाद, पुणे, रोहा, लुधियाना, फाजिल्का, गिदडबाहा, भटिंडा, रामामंडी, गंगानगर, बिजोवा, रानीस्टेशन, मुक्तसर, अबोहर, शिवपुरी, जयपुर, सांडेराव, सांगरिया, हनुमानगढ, अमृतसर, जकियाला, पिपाडसीटी, मेडता सहित देश भर से गुरुभक्त भारी संख्या में उपस्थित थे।