वल्लभ गच्छाधिपति आचार्य श्रीमद् विजय नित्यानंद सूरीश्वर जी म.सा. की पावन निश्रा...

वल्लभ गच्छाधिपति आचार्य श्रीमद् विजय नित्यानंद सूरीश्वर जी म.सा. की पावन निश्रा में श्री महावीर जैन विद्यालय, मुम्बई के शताब्दी महोत्सव का भव्य आयोजन संपन्न

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मुंबई। पंजाब केसरी गुरु वल्लभ द्वारा 101 वर्ष  पूर्व संस्थापित श्री महावीर जैन विद्यालय का वर्तमान वल्लभ गच्छाधिपति आचार्य श्रीमद् विजयनित्यानंद सूरीश्वरजी म.सा. की निश्रा में दादर स्थित योगी सभागार में शताब्दी महोत्सव स्वरुप एक भव्य आयोजन संपन्न हुआ। गुरुदेव वल्लभ गच्छाधिपति आचार्य श्रीमद् विजयनित्यानंद सूरीश्वरजी म.सा. की पुण्य प्रभावक निश्रा में कार्यक्रम के दौरान विद्यालय को 5.5 करोड़ की राशि के दान सम्बन्धी वचन प्राप्त हुए। कार्यक्रम में मुख्य अथिति मुलुंड में सर्वोदय नगर निर्माता सुखराज नाहर तथा मणिलक्ष्मी तीर्थ का निर्माण करवा रहे दिनेशभाई ठलियावाले थे। श्रीमती शोभाताई रसिकलालजी धारीवाल, हंसमुखभाई दीपचंद गार्डी जैसे अनेक विशिष्ट अथिति समारोह में उपस्थित थे। श्री महावीर जैन विद्यालय के अध्यक्ष तथा टोरेंट पॉवर के चेयरमेन सुधीर यू. मेहता ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। बड़ोदरा में बनने वाले कन्या छात्रावास हेतु मुख्यदानदाता के लिए विद्यालय ने 2.7 करोड़ का नकरा तय किया था किन्तु गुरुदेव के आशीर्वाद से श्री गिरधरलाल त्रिभवनदास परिवार, राजापुर, गुजरात निवासी ने 3.24 करोड़ में ये लाभ प्राप्त किया। घोषणा होते ही हजारों लोगों ने करतल ध्वनि से अनुमोदन किया। परिवार ने बहुमान स्वीकार नही किया और मंच पर पहुंच कर गुरुदेव से वासक्षेप ग्रहण कर गुरुदेव को काम्बली ओढ़ाकर आशीर्वाद लिया।

विद्यालय के विकास हेतु 100 करोड़ की राशि एकत्रित करने का लक्ष्य रखा गया जिसमें विभिन्न योजनाओं में 5.55 करोड़ की राशि समारोह में ही एकत्रित हो गयी। एक भाग्यवान ने घोषणा की कि कोई भी जैन कन्या जो ष्ट्र की पढ़ाई करना चाहती हो उसका सम्पूर्ण खर्च विद्यालय के माध्यम से उनकी ओर से वहन किया जायेगा। उच्च शिक्षण तथा विदेश में पढऩे हेतु भी छात्रों को आर्थिक सहयोग प्रदान करने की विद्यालय द्वारा घोषणा की गयी। मुख्य अथिति महोदयों ने कहा कि गुरु वल्लभ की दूरदर्शिता को प्रणाम 100 साल से कार्य कर रही ये संस्था उनके लिए आदर्श प्रेरणा है, जिन्होंने आज ये कार्य शुरू किया है। हमारा तन, मन, धन से इस विद्यालय को सहयोग रहेगा।

गच्छाधिपति गुरुदेव के हृदय स्पर्शी उद्बोधन  तथा मुनि श्री मोक्षानंद विजयजी म.सा के प्रासंगिक प्रवचन से उपस्थित जनसमूह में गुरु वल्लभ तथा विद्यालय के प्रति विशेष बहुमान और अहोभाव उमड़ पड़ा। गुरुदेव ने अपने संबोधन में कहा कि जिस प्रकार एक माँ प्रसूति पीड़ा को झेलकर संतान को जन्म देती है उसी प्रकार गुरु माँ वल्लभ गुरुदेव ने उससे भी अधिक पीड़ा झेल कर इस विद्यालय को जन्म दिया। आज 101 वर्ष में 20,000 विद्यार्थियों ने शिक्षण तथा संस्कार ग्रहण कर जैन समाज और शासन को गौरवान्वित किया है। भूतपूर्व विद्यार्थी विद्यालय की बहुमूल्य सम्पदा हैं और सभी के दिलों में अपनी मातृ संस्था के प्रति खूब लगाव है। इस लिए हम सब को मिलकर इस संस्था को और अधिक ऊंचाई तक ले जाना है। मेरा आशीर्वाद सदा इस संस्था के साथ है। संस्था के नए पदाधिकारियों तथा कार्यकर्ताओं के उत्साहपूर्ण प्रयास को भी गुरुदेव ने सराहा। कार्यक्रम में 2,000 लोगों  की उपस्थिति थी। आदरणीय अतिथिओं के करकमलों से शताब्दी ग्रन्थ के 2 भाग का विमोचन  हुआ। कार्यक्रम में यह भी घोषणा हुई कि अहमदाबाद शाखा के भी पुराने विद्यालय भवन को तोड़ कर शीघ्र नया विद्यालय भवन बनाया जायेगा। विद्यालय से पढ़े हुए देश विदेश में बसे हुए भूतपूर्व विद्यार्थियों को जोडऩे के लिए श्री महावीर जैन विद्यालय कनेक्टÓ कांसेप्ट के तहत एक वेबसाइट भी लांच की गयी।