श्री जैन श्वेतांबर दादावाडी टेम्पल ट्रस्ट पुणे के रजत जयंती वर्ष निमित्त...

श्री जैन श्वेतांबर दादावाडी टेम्पल ट्रस्ट पुणे के रजत जयंती वर्ष निमित्त स्पेशल कवर (डाक कवर) का विमोचन

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पुणे। भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने अलग अलग विषयों पर स्पेशल कवरÓ प्रकाशित करके विश्व के समक्ष भारतीय संस्कृति को प्रस्तुत करने का सराहनीय कदम उठाया है। इसी के अंतर्गत भारत सरकार के डाक विभाग महाराष्ट्र डाक परिमंडल, मुंबई – ४००००१ के माध्यम से श्री जैन श्वेताम्बर दादावाडी टेम्पल ट्रस्ट – पुणे जैन मंदिर के २५वें रजत जयंती महोत्सव निमित्त स्पेशल कवर का विमोचन जैन श्वेतांबर दादावाडी के अहिंसा भवन सभागृह में उपाध्याय श्री प.पू. अरुणविजयजी म.सा. आदि ठाणा की निश्रा में पुणे के पोस्ट मास्टर जनरल गणेश जी. सालवेश्वरकर, पुणे रीजन वेस्ट के अधिक्षक अभिजीत बनसोडे, दादावाडी मंदिर के अध्यक्ष भंवरलाल जैन, अॅडवोकेट एस. के. जैन, देवीचंद जैन, ओमप्रकाश रांका, जयप्रकाश ललवाणी, जयंतीलाल जैन, केसरीमल जैन, अशोक कटारिया, मिठालाल जैन, प्रविण जैन, दिलीप मेहता, महवीर छाजेड, शांतीलाल जैन, सुरेश ललवाणी, संपत नाहर, साकलचंद जैन, अचल जैन, मांगीलाल बाफना, जयंतीलाल ओसवाल, विमलचंद संघवी, विलास जैन, सुरेश जैन एवं समस्त दादावाडी जैन मंदिर के सभी ट्रस्टी एवं कई गणमान्य महानुभावों तथा समस्त श्री जैन संघ की उपस्थिती में किया गया।

पुणे के शुक्रवार पेठ स्थित सारसबाग के समीप, नेहरु स्टेडियम के सामने श्री जैन श्वेतांबर दादावाडी जैन मंदिर सबसे पुरानी जैन दादावाडी है। यह दादावाडी २४५ साल पुरानी है। सन १७५० में पुणे के नजदीक सारसबाग के समीप जंगल में सर्व प्रथम चरण पादुका की स्थापना की गई थी। पेशवाओं की रजामंदी के पश्चात एवं मंदिर-दादावाडी के लिये भूमि अधिग्रहण के पश्चात पूजा अर्चना शुरु की गई। २१ जून १९९१ को नूतन मंदिर की अंजन शलाका प्रतिष्ठा महोत्सव संपन्न हुई। जन जन का आस्था का केन्द्र ऐसे पेशवाकालीन दादावाडी जैन दादावाडी मंदिर के २५वें रजत जयंती पंचाह्निका महोत्सव ५ दिनों तक मनाया गया।

स्पेशल कवर की डिजाईन, एडीटींग, संकलन व संपादन मीठालाल जैन-पुणे ने किया है। स्पेशल कवर, डाक विभाग, महाराष्ट्र डाक परिमंडल – मुंबई से पुणे में दादावाडी जैन मंदिर अहिंसा भवन में प्रकाशित किया गया। स्पेशल कवर के लिये मीठालाल जैन – पुणे मो. नं. ९८२२०९८८८० से संपर्क कर सकते हैं। सूत्र संचालन संपत जैन ने किया।