गुरु वल्लभ के सपनों को साकार करना हैं – गच्छाधिपति नित्यानंदसूरीश्वरजी

गुरु वल्लभ के सपनों को साकार करना हैं – गच्छाधिपति नित्यानंदसूरीश्वरजी

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श्री आत्मानंद जैन महासभा का 75 वें साल में प्रवेश

मुंबई। मिनी शत्रुंजय सम तथा पंजाब केसरी गुरु वल्लभ की समाधि स्थली भायखला स्थित सेठ मोतीशा जैन मंदिर परिसर में पंजाब केसरी आचार्य विजय वल्लभसूरीश्वरजी म.सा. समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति आचार्य श्री विजय नित्यानंदसूरीश्वरजी म.सा., तप चक्रवर्ती आचार्य श्री विजय वसंतसूरीश्वरजी म.सा. की पुण्य प्रभावक निश्रा में संक्रांति व गुरु वल्लभ द्वारा स्थापित श्री आत्मानंद जैन महासभा के 75वें साल में प्रवेश के उपलक्ष में समारोह संपन्न हुआ।

जिसका सम्पूर्ण लाभ गुरु वल्लभ के अनन्य भक्त समाजसेवी सादड़ी निवासी विमलचंद मांगीलालजी धोका ने अपनी स्वर्गस्थ मातोश्री शान्ताबाई मांगीलालजी धोका के आत्मश्रेयार्थ आयोजित किया इस अवसर पर उपस्थित आत्मानंद जैन महासभा के अध्यक्ष खुबीलाल राठोड़, खुड़ाला जैन संघ के अध्यक्ष इन्दरमल राणावत, श्री गुरुवल्लभ साधार्मिक उत्कर्ष मंडल के अध्यक्ष पारसमल जैन बेडा वाला व लाभार्थी धोका परिवार के विमलचंद धोका, पोपटभाई धोका, प्रविणभाई धोका, महेन्द्र धोका, प्रकाश धोका एवं अजय धोका द्वारा गुरुवल्लभ की तस्वीर पर माल्यार्पण कर दीपक प्रज्जवलीत कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया, सुप्रसिद्ध मंच संचालक ललित परमार ने गुरु वल्लभ की समाधि स्थल पर आयोजीत संक्रांती व आत्मानंद जैन महासभा के अमृत महोत्सव पर प्रकाश डालते हुऐ इस आयोजन को ऐतिहासिक बताया संगीतकार महेन्द्र (पाली) ने नवकार मंत्र पश्चात गुरुभक्ति गीत से सुन्दर शमा बांधा सोने मे सुहागा युवा संगीतकार विनीत गेमावत की कुछ पलो की उपस्थिती ने ऐसा रंग जमाया कि सभी गुरुभक्त वल्लभ नाम की धून मे रम गए। प.पू. गच्छाधिपती नित्यानंद सुरिश्वरजी ने कहाँ कि आज गुरु वल्लभ की समाधि स्थल भायखल्ला की तीर्थभुमी पर मेरी निश्रा मे यह पहला संक्रान्ती उत्सव है, जहां आज हम एक पंथ दो काज संक्रान्ती व अमृत महोत्सव साथ-साथ मना रहे है। गुरुदेव ने आयोजन के लाभार्थी विमलचंद धोका को गुरु का निष्ठावान भक्त बताते हुऐ कहां कि यह परिवार सदैव गुरु के प्रति समर्पित रहने वाला आर्दश परिवार है। गुरुदेव ने संक्रान्ती मंत्र सुनने से जीवन मे आने वाले सुखद परिणाम बताऐ तथा संक्रान्ती का महत्व समझाया गुरुदेव ने कहाँ कि साधार्मिक भक्ति से बढक़र कोई भक्ति नही है, अगर मानव-मानव के काम नही आऐ वो मानवता नही दानवता कहलाती है, गुरु वल्लभ सुरिश्वरजी का एक ही सपना था कि साधार्मिक बंधुओ को शिक्षा-चिकित्सा-रोजगार व रहन-सहन की सुविधा मुहैय्या करवाकर उन्हे समाज की मुख्य धारा से जोडे व सक्षम बनाऐ इसलिऐ गुरु वल्लभ ने श्री आत्मानंद जैन महासभा मुम्बई की स्थापना की जिसने ७४ वर्ष परिपूर्ण कर ७५वें वर्ष मे प्रवेश किया, ऐसी क्रियाशील संस्था जिसने मुंबई के ३०० जिनालय में रखी गुप्तदान पेटीयो से सालाना बीस लाख एकत्रित करती है व भामाशाहो से दान लेकर संस्था साधार्मिक सत्कर्म करती है गुरुदेव ने कहाँ आत्मानंद महासभा मुंबई गुरु वल्लभ के सिद्धान्तो पर चलते हुऐ सराहनीय कार्य कर रही है यही वजह है कि संस्था अमृत महोत्सव मना रही है, गुरुदेव ने कहाँ कि गुरु जिसके जीवन मे नही उसका जीवन शुरु नही होता वह अधुरा है,गुरु पंथप्रदर्शक होता है जो मुक्ति का मार्ग बताता है, धर्म के मर्म का ज्ञान देकर हमे जीवन मे शर्मसार होने से बचाता है, इसलिऐ जीवन मे गुरु के महत्व व उनकी मौजुदगी को कभी नकारना नही चाहिऐ। इस अवसर पर विमलचंद धोका परिवार द्वारा नित्यानंदजी व तपचक्रवती आचार्य वंसतसुरिश्वरजी म.सा. को काम्बली वोहराई गई, तत्पश्चात् आत्मानंद महासभा के दामजीभाई द्वारा विमलचंद धोका परिवार का श्रेष्ठ लाभ लेने हेतु बहूमान किया गया। इस अवसर पर लुधियाना संक्रान्ती मंडल के अध्यक्ष प्रविण जैन सहित पंजाब से काफी गुरुभक्त पधारे पुना, शिरवणे, बडोदा, सुरत, चैन्नई व राजस्थान से अनेक गुरुभक्त भायखल्ला पधारे।

मुनि श्री मोक्षानंद विजयजी म. सा ने अपने प्रवचन में कहा कि जो लोग ये सोचते हैं कि खुद का पेट भरो और पेटी भरो वो संसार में भार रूप हैं। प्रकृति ने देना सिखाया है। दान से ही धन की शुद्धि और वृद्धि होती है । दीन-हीन, दु:खी, दरिद्र की सेवा करने में मानव जीवन की सार्थकता है। अकेले खाने वाला दानव है और दूसरों को खिला कर खाने वाला देव है। संसार में दान देने वाले की महिमा है। संयम स्वीकार करने से पूर्व स्वयं तीर्थंकर प्रभु भी एक वर्ष तक दान का दरिया प्रवाहित करते हैं।

मुनीराज मोक्षानंदजी म.सा. ने ओजस्वी प्रवचन के साथ गुरुभक्ति के गीत गाकर सबको झुमा दिया प्रात: 9 बजे से प्रारंभ समारोह तकरीबन 3 बजे तक चला। इस अवसर पर ज्ञान प्रभाकर भोले बाबा आ.भ. श्रीमद् विजय जयानंदसूरिजी म.सा. एवं माताजी म.सा. साध्वी अमितगुणाश्रीजी आदि के खौड में चातुर्मास प्रवेश की पत्रिका का भी विमोचन हुआ व मुनिराज श्री धर्मानंद विजयजी म. सा. के घोडपदेव जैन संघ में चातुर्मास की जय बुलाई गयी तथा श्री राजस्थान जैन श्वेताम्बर संघ के बाबुलाल सोलंकी व प्रकाश बाफना आदि पदाधिकारियों ने गच्छाधिपति जी के पुना में 15 जुलाई को ऐतिहासिक प्रवेश पर पधारने की विनंती की। श्री आत्मानंद जैन महासभा, मुम्बई के द्वारा साधर्मिक उत्कर्ष हेतु एक स्थायी फण्ड बनाने की शुरुआत की गयी। जिसमें संस्था अध्यक्ष खुबीलाल राठौड द्वारा ५ लाख रुपये देने की घोषणा की। इसके साथ ही जिसमें अच्छी राशि एकत्रित हुई। सभा के अध्यक्ष खुबीलल राठोड ने कहा की अमृत महोत्सव का समापन गच्छाधिपति की उपस्थिति में ही होगा। उन्होंने संस्था के आयोजन को यादगार बनने के लिए लोगो से सुझाव भी मंगवायें हैं। ज्ञात रहे कि खुबीलाल राठौड को संस्था के पहले मारवाड़ी अध्यक्ष होने का गौरव है। सादड़ी के कवि प्रदिप जैन ने भी गुरुवल्लभ पर काव्यपाठ कर अपनी भक्ति दर्शाई संगीतकार बाबुलाल जैन, गीतकार मोतीलाल रांका की भी उपस्थिती उल्लेखनीय रही। कार्यक्रम में शेठ मोतीशा जैन ट्रस्ट के अध्यक्ष किरणराज लोढ़ा, ट्रस्टी घेवरचंद जैन, घिसुलाल सुराणा, भरत जे. मेहता, पारसमल पुनमिया, दिनेश जे. शाह, संदिप सुराणा, शताब्दी गौरव के सिद्धराज लोढ़ा, दिपक जैन, संघवी अमृत टी. जैन, मदन कितावत, सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे। सुबह नाश्ता व दोपहर स्वामीवात्सल्य धोका परिवार द्धारा रखा गया जिसका सभी ने लाभ लिया अंत मे श्री विमलजी धोका ने सभी का आभार व्यक्त किया।