राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी ने पंजाब के अध्यापकों को मालती ज्ञानपीठ अवार्ड...

राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी ने पंजाब के अध्यापकों को मालती ज्ञानपीठ अवार्ड से सम्मानित किया

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नई दिल्ली। राष्ट्रपति भवन में महामहिम राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी ने पंजाब के 15 सरकारी स्कूलों के अध्यापकों को मालती ज्ञानपीठ पुरस्कार एवं 1 लाख रुपये की नकद राशि से सम्मानित किया। उक्त समारोह में पंजाब के शिक्षा मंत्री डॉ. दलजीत सिहं चीमा, ग्रामीण विकास व पंचायत मंत्री श्री सिकन्दर सिंह मलूका तथा मालती ज्ञानपीठ संस्था के श्री मनोज सिंघल एवं मालिक मै. एम. एम. ऑटो, दिल्ली भी उपस्थित थे। इस पुरस्कार के लिए अंग्रेजी,सामाजिक विज्ञान, गणित, फि जिक्स व केमेस्ट्री के 2-2 लेक्चरर और 1-1 मास्टरों को चयन किया जाता है। पंजाब के डीईओ से करीब 200 अध्यापकों की लिस्ट मंगवाई गई थी। दो लिखित टेस्ट व कड़े इंटरव्यू के बाद पंजाब के 15 टीचरों को इस पुरस्कार के लिए चयनित किया गया था। यह पुरस्कार मोहिन्दर सिंह सिंघल एजुकेशन एण्ड रिसर्च सोसायटी द्वारा श्री मनोज सिंघल जी की माता श्रीमति मोहिन्दर सिंघल के जन्मदिन पर हर साल दिया जाता है। 2013 से प्रारम्भ हुआ यह पुरस्कार इस साल उनके 95 वें  जन्मदिन के मौके पर दिया गया। इस पुरस्कार को पंजाब सरकार ने स्टेट अवार्ड का दर्जा दे रखा है।

उक्त समारोह में माननीय राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी ने कहा कि शिक्षा ही एक ऐसा जरिया है जिससे भारत का सुनहरा कल लिखा जा सकता है। भारत की शिक्षा पद्धति में अध्यापक रीढ़ की हड्डी रोल अदा करते हैं। शिक्षा के उत्थान के लिए निजि क्षेत्रा को भी बढ़चढक़र योगदान देना होगा। समारोह में केन्द्रीय मंत्री मेनका गांधी, मंत्री सिकन्दर सिंह मलूका, सांसद सुखदेव सिंह ढींढ़सा व डीपीआई पंजाब बलवीर सिंह ढ़ोल और दिल्ली के उपमुख्यमंत्री श्री मनीष सिसोदिया भी थे। उक्त समारोह में श्रीमति मालती सिंघल ने राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी को शॉल भेंट किया तथा श्री मनोज सिंघल ने गुलदस्ता देकर सम्मानित किया। समारोह के दौरान डॉ. चीमा ने कहा कि 10 वीं और 12 वीं के वार्षिक परिणाम स्पष्ट करते हैं कि पंजाब के सरकारी स्कूलों खासकर ग्रामीण क्षेत्रा के स्कूलों के परिणाम और सुधरे हैं। उपयुक्त समारोह में पंजाब के प्रसिद्ध उद्योगपति श्री कोमल कुमार जैन, चेयरमैन एवं संस्थापक ड्यूक ग्रुप ऑफ कंपनीज उनकी धर्मपत्नि श्रीमती कंचन जैन, सिकन्दर लाल जैन, श्री सुशील जैन इत्यादि उपस्थित थे।