राजस्थान मीटरगेज प्रवासी संघ की सफलता के ३७ वर्षों की यशोगाथा

राजस्थान मीटरगेज प्रवासी संघ की सफलता के ३७ वर्षों की यशोगाथा

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मीटरगेज से ब्राड गेज की राह चलकर राजस्थान आज तरक्की के जिस मुकाम पर है उसे वहां पहुंचाने में राजस्थान मीटरगेज प्रवासी संघ का बड़ा हाथ है और इस कामयाबी में मुंबई स्थित राजस्थानी समुदाय के आंदोलनों की सबसे बड़ी भूमिका है।

अगर आप राजस्थानी हैं और मुंबई में रहते आपको 15 वर्ष से ज्यादा हो गए हैं तो गृहप्रदेश से आने-जाने में पेश आने वाली पहले की तकलीफों और परेशानियों की तनिक याद कीजिए। आज आप मुंबई, ठाणे या पुणे (बंगलुरु, चेन्नै और त्रिवेंद्रम भी) में सीधी ट्रेन में बैठते हैं और बगैर अपनी यात्रा खंडित किए सीधे अपने गांव की राह लेते हैं। 15 साल पहले यह यात्रा किसी दु:स्वप्न से कम नहीं थी। मारवाड़ से मुंबई आने में 18 से 20, तो कभी-कभी तो पूरे 24 घंटे भी लग जाया करते थे। और रास्ते की दिक्कतें! उफ्फ! अहमदाबाद में मीटरगेज लाइन से उतर कर आगे ब्रॉडगेज लाइन की अगली ट्रेन का का इंतजार करते रहो। अहमदाबाद स्टेशन पर घंटों इंतजार के साथ चोरों और मवालियों के उत्पात, कुलियों की खुले-आम लूटपाट और बहन-बेटियों से बदसलूकी। ठसम-ठस ट्रेन में खिडक़ी के रास्ते घुसो और गलियारे में सामान पर या टॉइलेट के भीतर बैठकर, नींद में लहराते हुए खड़े-खड़े मुंबई पहुंचो। आज एक नींद में निकल जाने वाली यह यात्रा उन दिनों देह तोड़ देने वाली होती थी। ऊपर से एक नहीं, दो रिजर्वेशन लेने की मजबूरी-पहले अहमदाबाद का, फिर वहां से मारवाड़ के गंतव्य स्टेशन का। यह मिल जाना मानो लॉटरी लगने जैसा था। रिजर्वेशन कोटे की परेशानी उन दिनों ऐसी ही होती थी।

‘पता ही नहीं चला, सैंतीस साल कैसे बीत गए’, विमल रांका को अपनी संघर्ष यात्रा याद आ गई। राजस्थान के करीब 2600 किलोमीटर से भी ज्यादा मीटरगेज रेलमार्ग को ब्राडगेज में परिवर्तित करवाने में राजस्थान मीटरगेज प्रवासी संघ की भूमिका को कौन भुला सकता है! दिल्ली अहमदाबाद रेलमार्ग को डबल लाइन करवाने और राजस्थान से करीब 15 से भी ज्यादा नई रेलगाडिय़ां चलवाने के अलावा कई सारे कामों का श्रेय इस संगठन को जाता है। 5 जून, 1979 को गठित प्रवासी संघ ने अपने मुख्य उद्देश्य-कि देश भर के प्रदेशों में, खासकर दक्षिण भारत में बसे प्रवासी राजस्थानियों का अपने गांव आने-जाने का रेल प्रवास सुखद, सरल और सुगम हो-को अब और व्यापक बना लिया है। अब लक्ष्य है देश के सभी बड़े शहरों से ज्यादा से ज्यादा ट्रेनें चलवाकर राजस्थान से बेहतर कनेक्टिविटी। अहमदाबाद से उदयपुर और मारवाड़-उदयपुर पहाड़ी रेलमार्ग को ब्रॉडगेज में परिवर्तित करवाने, रास्ते के स्टेशनों के विकास और अहमदाबाद-दिल्ली रेलमार्ग डबल लाइन और उसके इलेक्ट्रिफिकेशन के साथ। ‘हमारी कोशिश है कि राजस्थान में एक मीटर भी छोटी लाइन की पटरी न रहे’, संघ के महामंत्री रांका बताते हैं। मीटरगेज से ब्रॉडगेज हुआ तो कनेक्टिविटी आधे से भी कम वक्त की रह गई। जाने-माने पत्रकार निरंजन परिहार बताते हैं, ‘नई लाइन बनने से रास्ते आसान हुए, माल की आवाजाही सीधी हुई और वक्त बहुत कम लगने लगा। राजस्थान में उद्योग लगाने से लोगों की हिचक हटी तो उद्योग-धंधे तेजी से विकसित होने लगे। बीस साल पहले तक राजस्थान से मुंबई में लोग बसने के लिए आते थे। आना अभी भी नहीं रुका, पर व्यापार के काम से। अब यहां बसने के इरादे से बहुत कम लोग आते हैं।’

क्या यह कामयाबी सहज ही मिल गई/ नहीं। लक्ष्य और राह एक जैसे मुश्किल थी। 1979 में स्थापना के बाद कोई वर्ष ऐसा नहीं गया जब धरनों, आंदोलनों और प्रदर्शनों के सिलसिले में राजस्थान मीटरगेज प्रवासी संघ के जुझारूओं ने लाठी-गोली न खाई हो। पर वे लक्ष्य से टस से मस नहीं हुए। 1983 में फालना में प्रवासी संघ के रेल आंदोलन में फायरिंग की नौबत आ गई। महिलाओं व बच्चों तक को जेल में ठूंस दिया गया। जयंती परमार, कांति कीतावत, रमेश शाह, नरेंद्र मांडोत, मूलचंद जैन, पुखराज राठोड़, देवराज जैन, सज्जन रांका, रमेश सी जैन, देवीचंद जैन, विनोद सुराणा, जैसे कार्यकतार्ओं के पास इन यादों का जैसे खजाना है। रांका को याद आ गई 1996 के एक आंदोलन की जब मुंबई से राजस्थान तक हर स्टेशन पर समर्थन का एक सैलाब-सा उतर आया था। संस्था की यह एकता वर्ष-दर-वर्ष मजबूत होती गई, इसके पीछे इस संघर्ष का ही हाथ है। अपने-अपने क्षेत्र में रेल विकास के लिए प्रतिबद्ध देश भर में संस्था के देशव्यापी 1008 सक्रिय सदस्यों में आज भी बहुतायत मुंबई में रहने वालों की है। चंपत मुत्ता संस्था के अध्यक्ष एवं सुकन परमार, सिद्धराज लोढ़ा, कांतिलाल सी. जैन, आदि अन्य पदाधिकारी हैं। रांका बताते हैं, ‘केंद्रीय मंत्री, राजस्थान के मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद पर रहते अशोक गहलोत ने, बल्कि हर राजनीतिक दल और नेता ने हमारे आंदोलन को पूरा समर्थन दिया। बावजूद इसके हमारा मंच आज तक गैर राजनीतिक है ।’ पर ब्राड गेज हो जाने के बावजूद संस्था का नाम ‘राजस्थान मीटरगेज प्रवासी संघ’ कब तक रहेगा/ रांका का जवाब है, ‘यह भावनाएं का मामला है। नाम नहीं बदलेगा।’

वर्तमान कार्यकारिणी

अध्यक्ष श्री चंपत मुथा, उपाध्यक्ष श्री सुकन परमार, महामंत्री श्री विमल रांका, मंत्री श्री निरंजन परिहार, मंत्री श्री सिद्धराज लोढ़ा, कोषाध्यक्ष श्री कांति जैन

कार्यकारिणी सदस्य:

श्री कांति कितावत, श्री रमेश चौपडा, श्री जयंतिलाल परमार, श्री मूलचंद जैन, श्री नरेन्द्र मंडोत, श्री देवराज जैन, श्री पुखराज राठौड़।