ब्रह्मर्षि गुरुदेव श्री गुर्वानंदस्वामी की ७२ दिनों की साधना के बाद भक्तों...

ब्रह्मर्षि गुरुदेव श्री गुर्वानंदस्वामी की ७२ दिनों की साधना के बाद भक्तों को हुए दिव्य दर्शन

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तिरुपति। देश के अनेक भागों से आए भक्तों ने श्री ब्रह्मर्षि श्री गुरुदेव के ७२ दिन की भूमि गर्भस्य दीर्घ साधना के पश्चात दुर्लभ दिव्य दर्शन का लाभ लिया। ब्रह्मर्षि श्री गुर्वानंद स्वामी ‘गुरुदेवÓ अपनी लंबी साधना में लीन थे। आखिर वह पल सामने था जब ७२ दिन की स्थिति में ब्रह्मर्षि श्री गुरुदेव अपनी साधना स्थली से धीरे-धीरे बाहर आए। यह दृश्य देखकर भक्त अचंभित थे तो गुरु के दर्शन पाकर भाव-विभोर भी हो रहे थे। आश्रम में चारों तरफ ब्रह्मर्षि श्री गुरुदेव के जयकारे लगने लगे। ब्रह्मांड की दिव्य दैवीय शक्तियों के रुप में गुरु भगवान के दर्शन पाकर सभी भक्त निहाल हो उठे। इससे पूर्व श्री ब्रह्मर्षि आश्रम, तिरुपति का संपूर्ण वातावण भक्तिमय बन गया। आश्रम में चारों तरफ ‘ओम नम: शिवायÓ एवं ‘नमोकार महामंत्रÓ की ध्वनि गुंजायमान हो रही थी, वहां उपस्थित सैंकड़ो भक्तों ने दैवीय शक्तियों का अनुभव किया। आश्रम में हवन की भीनी-भीनी सुगंध का अहसास कर भक्त रोमांचित थे। भक्तों ने विभिन्न शक्तियों के साथ ब्रह्मर्षि गुरुदेव के दर्शन प्राप्त किए। समय की दिर्घ अवधि के बाद कभी-कभी ऐसे दिव्य मानव पुण्य धरा पर अवतरित होते है। परमात्मा के साथ एकत्व ऐसे सिद्ध पुरुषों के माध्यम से प्रकट होता है। ऐसा भक्तों ने महसूस किया। साधना शकित के महापुंज गुरुदेव ने अनेक सिद्धियां प्राप्त की हैं। इनका उपयोग वह मानव कल्याण के लिए कर रहे हैं।