आचार्य श्रीमद विजय रत्नसुंदरसुरिश्वरजी म.सा. की ३००वीं पुस्तक लोकार्पण समारोह में...

आचार्य श्रीमद विजय रत्नसुंदरसुरिश्वरजी म.सा. की ३००वीं पुस्तक लोकार्पण समारोह में उमडा जन सैलाब

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मुंबई। तपागच्छाधिपति पूज्यपाद आचार्य भगवंत विजय प्रेमसूरीश्वरजी म.सा. प्रशांतमूर्ति पूज्यपाद आचार्य भगवंत श्रीमद विजय राजेन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. और सरस्वती लब्धप्रसाद पूज्यपाद आचार्य भगवंत श्रीमद विजय रत्नसुंदरसूरीश्वरजी म.सा. की पावन निश्रा में मुंबई के सोमैया मैदान में नए वर्ष के पहले १० दिनों तक चले महाआयोजन में जैन भक्तों और श्रद्धालुओं ने भक्ति रस में डुबकर अपने नए वर्ष का स्वागत किया। इस कार्यक्रम में जैन श्रद्धालुओं के अलावा कई दिग्गज हस्तियों ने भी शिरकत की। आचार्य श्री विजय रत्नसुंदरसूरिश्वरजी म.सा. द्वारा लिखी गई पुस्तक ‘मारुं भारत, सारुं भारतÓ का लोकार्पण प्रधानमंत्री ने विडियो कॉन्फ्रेसींग द्वारा किया।

acharya ratnasunder suriji१ से १० जनवरी दस दिनों तक चले इस महा समारोह का नाम ‘यात्रा ३००Ó रख गया था। सकारात्मकता और आध्यात्मिकता की बहती गंगा से जन जन का मन पावन हो गया। ‘फील दे चेंजÓ (बदलाव को अनुभव करो) इस पूरे आयोजन का संदेश रहा। प्रतिदिन ७०० साधु भगवंतों ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया। पंडाल में भजन मंडप भी बनाया गया था जिसमें करीब २५००० लोग बैठ कर साधु भगवंतों की अमृत वाणी का आनंद लेते हुए प्रभु भक्ति में लीन होते गए। कार्यक्रम को सफल बनाने में लगभग १०००० युवक युवतियों ने अपनी पूरी मेहनत लगा दी।

इस कार्यक्रम के लिए रजवाडी नक्काशी की उत्तम कला को जीवित करने वाला ४०० फीट लंबा और ६० फीट उंचा भव्यतम प्रवेश द्वारा बताया गया था जिसमें शंखेश्वर तीर्थस्थान था। विशाल प्रवचन मंडप, मां सरस्वती मंदिर, साधु-साध्वी की कुटिर मंडप भी बनाया गया था।

आचार्य श्रीमद् वियज रत्नसुंदर सूरिश्वरजी की ३०० वीं पुस्तक ‘मारुं भारत, सारुं भारतÓ के लोकार्पण के उपलक्ष्य में आयोजित यह समारोह एक भव्य आयोजन रहा। चार भाषाओं में लिखी गई इस पुस्तक का लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विडियों कॉन्फ्रेंसींग द्वारा की। मोदी ने पंडाल में उपस्थित ३० हजार लोगों की भीड़ को संबोधित करते हुए कहा कि भले ही मैं आप से दूर हंू पर मैं दिल से आपके बहुत करीब हंू और आचार्य का चरण स्पर्श करता हंू।

आचार्यश्री की साहित्यीक रचनाओं का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि हर धर्म से उपर अगर कोई धर्म है तो वो राष्ट्र धर्म है। आचार्यश्री लगातार राष्ट्रधर्म जगाकर राष्ट्र की भावना जगाते रहे उन्होंने कहा कि साधु संतों और धार्मिक नेताओं ने विश्व का आध्यात्मिकता दी है। उन्होंने आचार्यश्री को महान समाज सुधारक और आध्यात्मिक नेता बताया जिन्होंने पुस्तकों के जरिए ब्रह्मांड की सभी अवधारणाओं और वस्तुओं के बारे में अपने विचार व्यक्ति किए। इतने बडे समारोह में कई दिग्गज हस्तियों ने हिस्सा लिया और गुरुदेव का आशिर्वाद लिया। इनमें महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस, गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल, छत्तीसगढ के मुख्यमंत्री डॉ रमण सिंह, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, सांसद किरीट सोमैया, सांसद गोपाल शेट्टी, विधायक मंगलप्रभात लोढ़ा, विधायक राज पुरोहित, विधायक आशिष शेल्लार ने शिरकत की। मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस के हाथों से महाराष्ट्र की गौशालाओं को जीवदया निमित ७६ लाख रुपये का अनुदान दिया गया। मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने कहा कि यहां मौजूद रहना भाग्य की बात है।