नवकार मंत्र नम्रता की शक्ति बताता है

नवकार मंत्र नम्रता की शक्ति बताता है

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Navkar Mantra

मंत्र जीवन का रहस्य होते हैं। इनका संबंध मन से होता है। आत्मशुद्धि मंत्र, मन के मंथन का ही परिणाम है। मन की सोई हुई शक्ति से मंत्र हमें परिचित कराते हैं और उन्हें जगाते हैं, इसीलिए वे असिद्ध को भी सिद्ध कर देते हैं। इसीलिए वे हमारे मनोरथ को पूरा करते हैं। सामान्य मंत्रों की महिमा और शक्ति से बड़ी महिमा वाले मंत्र को महामंत्र कहा जाता है। उसकी शक्ति को शब्दों में परिभाषित करना कठिन है। महामंत्र हमारी चेतना की गति को परिवतिर्त करते हैं। जैन धर्म में नवकार मंत्र को महामंत्र की श्रेणी में रखा गया है।

इसके मंत्र राग या विराग नहीं, बल्कि साधक को वीतराग की ओर ले जाते हैं। जिस प्रकार वैष्णव धर्म में गायत्री मंत्र की एवं बौद्ध धर्म में त्रिसरण या त्रिराम मंत्र की महत्ता है, उसी प्रकार जैन धर्म में णमोकार महामंत्र की अत्यंत महत्ता है। जैन धर्म के अनुसार सभी देवों में श्री वीतराग देव को, सभी तीर्थों में श्री शत्रुजय तीर्थ को और सभी मंत्रों में नवकार मंत्र को श्रेष्ठ माना गया है। नवकार मंत्र का प्रथम शब्द णमो है, जिसका अर्थ है नम जाओ। जो नमता है वही गुणों में रमता है और वही प्रभु को गमता है यानी प्रभु तक पहुँचता है।  णमो शब्द का भावार्थ है अहंकार छोड़ो। इस नवकार मंत्र में कुल नौ पद हैं, इसीलिए इसे नवकार कहा जाता है। लेकिन नवकार का एक आशय नमस्कार भी है, इसलिए इसे नमस्कार मंत्र, महासूत्र या परमेष्ठि आदि नामों से भी जाना जाता है। इसके नौ सूत्रों का अर्थ इस प्रकार है: मैं अरिहंतों को नमस्कार करता हूं, सिद्धों को नमस्कार करता हूं, उपाध्यायों को नमस्कार करता हूं और लोक के सब साधुओं को नमस्कार करता हूं। अरिहंत भगवान को नमस्कार करने से कर्म शत्रु को परास्त करने की, सिद्ध भगवान को नमस्कार करने से देहभाव को छोडऩे की, आचार्य को नमस्कार करने से अनुचित आचरण को छोडऩे की, उपाध्याय को नमस्कार करने से मिथ्या मान्यता को छोडऩे की तथा साधु जन को नमस्कार करने से संसार की ममता छोडऩे की प्रेरणा मिलती है। इस महासूत्र की विशेषता यह है कि यह अहंकार का विसर्जन करता है।