श्री किशोरमल खिमावत /Shree Kishore Khimavat : मानवता के प्रतिक, मानवता के...

श्री किशोरमल खिमावत /Shree Kishore Khimavat : मानवता के प्रतिक, मानवता के मसीहा वो कोई और नही, गोडवाड के अवतारी पुरुष, प्रसिद्ध समाजसेवी भामाशाह किशोरमल खिमावत

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श्री किशोरमल खिमावत /Shree Kishore Khimavat

Shree Kishore Khimavat

सान जिसका ईश्वर है, जन-जीवन जिसकी पूजा और सारा सारा हिन्दुस्तान जिसका तीर्थ स्थल है, सादगी, शालीनता व मानवता के प्रतिक, मानवता के मसीहा वो कोई और नही, गोडवाड के अवतारी पुरुष, प्रसिद्ध समाजसेवी भामाशाह किशोरमल खिमावत हैं, जो खिमेल (राज.) की गर्वीली माटी में पले व बढ़े, गोडवाड की राजधानी वरकाणा के प्रमुख शिक्षा केन्द्र श्री पार्श्वनात जैन विद्यालय से दसवीं की शिक्षा पूर्ण कर वर्ष १९६७ में महानगरी मुंबई को आपने कर्मस्थली के रूप में चुना और यहां आकर सर्व प्रथम मुंबई की धड़कन समझे जाने वाले दागिना बाजार में मेसर्स चैनाजी नरसिग प्रतिष्ठान में सतत् छः वर्षों तक नौकरी की यही पर आपने उज्ज्वल भविष्य को सतरंगी रंगों से मुखरित किया। अपनी क्षमता, सूझबूझ कड़े परिश्रम और लोगों के प्रति अपनेपन ने आपको उन्नति के मार्ग का सफल यात्री बना दिया, कार्य के प्रति समर्पित भाव से, पूर्ण संकल्प और परिश्रम की अंगुलियां थामे किशोरमल खिमावत निश्चित तौर पर अपनी मंजिल को प्राप्त करने का विश्वास लिये कदम दर कदम सक्रियता के साथ आगे बढ़ते गये। व्यवसाय की बारीकियों को आत्मसाद कर खिमावत ने स्वयं अपना वजूद स्थापित करते हुए स्वयं के लिए जमीन तैयार की और वर्ष १९७२ उनके जीवन में एक नई आशा का संचार लेकर आया, जब गोडवाड के इस युवा प्रतिभाशाली व्यक्ति ने जवेरी बाजार में वैशाली एक्सपोर्ट नामक प्रतिष्ठान को प्रतिष्ठापित कर हीरा व्यवसाय का अनूठा व लोकप्रिय कार्य प्रारंभ किया। कहते हैं हीरा ही हीरे की पहचान करता है।

गोडवाड के कमोबेश खिमावत पहले इक्का-दुक्का व्यक्तियों में से थे, जिन्होंने हीरा व्यवसाय को गंभीरता से अपनाया व पूरे, मुंबई के सफलतम् हीरा व्यवसायियों की फेहरीस्त में स्वयं को सम्मिलित कर दिया, हीरा व्यवसाय में वैशाली एक्सपोर्ट की तूती बोलने लगी।खिमावत ने मन के मजबूत इरादों, संकल्पकी निष्ठाओं और कर्म के प्रति आस्थाओं को अपने जीवन से बांध कर बिना अविचलित हुए, सक्रियता की तेज हवाओं से दोस्ती कर ली और हवा के तेज झोंकों की तरह व हीरों की चमक की तरह चमकदार बनते गये। सफलताओं का सिलसिला प्रारंभ हुआ तो थमने का नाम नहीं लिया। १९८४ में जवेरी बाजार से ऑपेरा हाऊस स्थित श्रीजी चेम्बर्स की तरफ रुझान किया। यह क्षेत्र सम्पूर्णतया हीरा व्यवसाय से जुडा था, यहां कदम रखते ही व्यवसाय की रफ्तार तेज होने लगी और वैशाली एक्सपोर्ट ने एक के बाद एक नये-नये आयाम स्थापित करते हुए देश के हीरों की चमक विदेश में बिखेरने में कामयाबी हासिल कर श्रेष्ठ हीरा निर्यातकों में अपना नाम दर्ज करवाकर देश को विदेशी मुद्राएं दिलाकर देश की अर्थ व्यवस्था को समृद्ध बनाने में भी सहयोग कर रहे हैं, छः वर्षों तक नौकरी कर व्यवसाय जगत में कदम रखने वाले किशोर खिमावत ने भी कभी नहीं सोचा होगा कि उनके कदम महान कर्मक्षेत्र की उस दिशा में बढ़ रहे हैं, जो न केवल उनके लिये बल्कि समूचे देश के लिए भी गौरवशाली सिद्ध होंगे। वर्ष १९९३ में बैंकाक, १९९६ में ताईवान, चीन (चाईना), मलेशिया, हांगकांग, न्यूयार्क जैसे देशों में वैशाली एक्सपोर्ट की शाखाएं स्थापित कर न केवल व्यवसायिक दायरा बढ़ाया बल्कि गोडवाड क्षेत्र राजस्थान बल्कि सम्पूर्ण भारत का नाम भी उज्ज्वल कर दिया।

पानी के अभाव में नष्ट हो रहा था, गांवों में पेयजल की भारी किल्लत ने इंसानों का जीना दुर्भर कर दिया था, कृषक आत्महत्या जैसे कदम उठाने पर मजबूर हो रहे थे, तब किशोर खिमावत के रूप में सचमुच एक देवता ने अवतार लेकर गोडवाड की धरा को हराभरा करने हेतु ऐसे कारगर कदम उठाये, जिसकी मिशाल शब्दों में बयां नहीं की जा सकती। वर्ष २००१ से २००४ तक के समय में महा मानव किशोर खिमावत ने पाली के ऊर्जावान युवा जिलाधीकारी कुलदीपजी रांका के सफल नेतृत्व व मार्गदर्शन में राष्ट्रीय संत जयंतसेन सुरीश्वरजी म.सा. के आशिर्वाद से गोडवाड में विकास की गंगा बहा दी। अपने आपको श्री खिमावत ने सेवा के उपक्रमों में झोंक दिया, पशु शिविर, सड़क योजना, स्टेशनों का नूतनीकरण, जल केन्द्र, एनीकेट, गार्डन बनवाकर आपने मानवता की महानता के चरम लक्ष्य को प्राप्त कर आसमान की ऊंचाईयों तक उपलब्धियां अर्जित की। आज गोडवाड का चप्पा-चप्पा आफ यशोगान की गूंज से गुंजायमान हो रहा है। किशोर खिमावत तो बस सेवा के पर्याय बन चुके हैं। उनकी उपलब्धियों के बारे में लिखना सूरज को दीपक बताने के समान है। मानव के रूप में मसीहा बन चुके किशोर खिमावत ने परहित सेवा का बीड़ा उठाकर भगवान महावीर के कथन जीओ और जीने दो को सही अर्थों में सार्थक करते हुए सच्चे जैनी होने का पुख्ता प्रमाण प्रस्तुत किया है, ३६ कौम के प्रति आपकी निष्ठा व सेवा भावना वर्तमान परिप्रेक्ष्य में अनबूझी पहेली प्रतीत होती है, लेकिन श्री खिमावत जाती-पाती से परे मनुष्यत्व की परिभाषा को महिमामंडित कर मानवीय संवेदनाओं प मानवसेवा को आधारभूत बनाते हुए हर आंख का आंसू मिटाने हेतु समर्पित हो गये श्री खिमावत ने श्री राज राजेन्द्र वसंतीदेवी किशोरमल खिमावत चेरीटेबल ट्रस्ट की स्थापना की है, जिसके आप चेअरमैन हैं। इस ट्रस्ट के माध्यम से आप, जैन समाज व अन्य समाज के गरीब व अनरक्षित लोगों को जो गहन बीमारियों से जकड़े हुए होते हैं। उन्हें तत्काल चिकित्सा सुविधा मुहैया करवाते हैं, इसके अलावा इस ट्रस्ट द्वारा गरीब मेधावी विद्यार्थियों की शिक्षा के पुख्ता प्रबंध किये जाते हैं। इस ट्रस्ट द्वारा रानी स्टेशन में एक भोजनशाला कई वर्षों से सुचारू रूप से संचालित हो रही है।