श्री सेसली तीर्थ / Shree Sesli Tirth: A tirth near Bali with...

    श्री सेसली तीर्थ / Shree Sesli Tirth: A tirth near Bali with no Jain family residing

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    श्री सेसली तीर्थ / Shree Sesli Tirth:

    जैन मान्यतानुसार तीर्थ दो प्रकार के बताये गये हैं। पहला सिद्ध क्षेत्र व दूसरा अतिशय क्षेत्र। सिद्ध क्षेत्र तीर्थ वे स्थान कहलाते हैं जहां तीर्थंकर भगवान का जन्म, दीक्षा केवल्यज्ञान, मोक्ष अथवा विहार हुआ हो। अतिशय क्षेत्र तीर्थ पे कहलाते हैं जहां के मंदिर अतिप्राचीन हो, भव्य और कलापूर्ण हो, जहां की मूर्तियां प्रभावित हो, जहां के अधिष्ठायक देव चमत्कारी हो या जहां का प्राकृतिक सौन्दर्य दर्शनीय हों। पाली जिले के लगभग सभी तीर्थ अतिशय में ही आते हैं। इन अतिशय तीर्थों में सेसली का तीर्थ भी अतिप्राचीन है लेकिन मुख्य सड़क पर नहीं होने के कारण जितनी प्रसिद्धी इस तीर्थ को मिलनी चाहिए थी उतनी नहीं मिल पाई। सेसली गांव बाली कस्बे से तीन किलोमीटर दूर पूर्व दिशा में बसा हुआ है। यहां जैनों का एक परिवार भी वास नहीं करता केवल प्राचीन जैन मंदिर एवं धर्मशाला इस बात को प्रमाणित करते हैं कि कभी यहां कई जैन परिवार रहे होंगे। यहां दादा पार्श्वनाथ भगवान का विशाल शिखरबंद मंदिर है जिसका निर्माण वि. सं. ११८७ में होने का उल्लेख मिलता है। इसकी प्रतिष्ठा भट्टारक श्री आन्नसूरीजी ने की थी। इस मंदिर के निर्माता संघवी मांडण थे। जिन्होंने सात लाख मुद्रा व्यय करके इसका निर्माण करवाया था। कहते हैं कि मांडण ढालावत था इसलिए आज भी इस मंदिर पर प्रतिवर्ष इनके वंशजों की ओर से ध्वजा चढ़ाई जाती है। सेसली में पार्श्वनाथ भगवान के इस प्राचीन मंदिर के कारण ही यह तीर्थ का स्वरुप ले सका है। मंदिर में श्वेतवर्णी पार्श्वनाथ भगवान की प्रतिमा बिराजमान है जो सं. १२५२ में प्रतिष्ठित है। ऐसा भी कहते हैं कि यह प्रतिमा बालराई गांव के एक ध्वंस मंदिर से लाकर स्थापित की गई है। इसके परिकर पर सं. १४९३ का लेख है लेकिन मूलनाय की प्रतिमा इससे भी प्राचीन है। मंदिर में कोई विशेष कलाकृति नहीं है फिर भी यह चमत्कारी तीर्थ अपने समृद्ध अतीत की कहानी कह रहा है। सेसली के लिए फालना से बाली तक बस द्वारा और आगे टेक्सी से पहुंचा जा सकता है।