श्री सम्मेतशिखर तीर्थ / Shree Sammed Shikharji Tirth: called Sammed Śikhar or...

    श्री सम्मेतशिखर तीर्थ / Shree Sammed Shikharji Tirth: called Sammed Śikhar or Sammet Shikhar “peak of concentration” because it is a place where twenty of twenty-four Tirthankaras attained moksha through samadhi (meditative practices)

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    मूलनायक : श्री शामलिया पार्श्वनाथ भगवान, पद्मसनस्थ।
    मार्गदर्शक : यह विश्व प्रसिध्द तीर्थ मधुबन के पास समुद्र की सतह से 4479 फुट उँचे सम्मेतशिखर पहाड पर, जिसे पार्श्वनाथ हिल भी कहते हैं। मधुबन से गिरडीह 25 कि.मी. दूर हैं, जहाँ से बस व टैक्सी की सुविधा है। मधुबन से पहाड़ तक की यात्रा पैदल करनी पड़ती है या डोलियों का साधन उपलब्ध है। गिरडीह डुमरी सड़क मार्ग पर गिरडीह से 26, डुमरी से 12 कि.मी. दूर मधुबन है। मधुबन से 9 कि.मी. पहाड़ की पैदल चढ़ाई है। वैसे घुमावदार मार्ग से 16 कि.मी. की दूरी तय कर वायरलैस सेंटर तक जीप चली जाती है। वहाँ से 1 कि.मी. दूरी पर पार्श्वनाथ भगवान का मन्दिर है। पारसनाथ स्टेशन से मधुबन 12 कि.मी. दूर पड़ता है। वहाँ से मधुबन आने हेतु पेढी द्वारा व्यवस्था की गयी है। अन्य साधन भी मिल जाते हैं।subhash_runwal_and_chanda_runwalयात्रीगण पैदल यात्रा करके अपनी यात्रा को सफल मानते हैं। आवागमन हेतु 200-300 रूपये में डोली भी मिलती है। पहाड़ी की उँची डगर सघन वनों से गुजरती है। अंतिम 3 कि.मी. की चढ़ाई काफी दुरूह है। पहाड़ पर 9 कि.मी . की चढ़ाई, सभी मन्दिरों पर परिक्रमा में 9 कि.मी. तथा उतराई 9 कि.मी. इस प्रकार कुल 27 कि.मी. की पैदल यात्रा हो जाती है। कलकत्ता से इसकी दूरी 300 कि.मी. है। निमइयाघाट 7, गोमो जं. 18, धनबाद 47 कि.मी. है। हजारीबाग रोय्ड 27, कोडरामा 76, गया 152 कि.मी. दूर हैं। पारसनाथ स्टेशन पर लगभग सभी ट्रेनों का ठहराव है। पारसनाथ स्टेशन से 25 कि.मी. दूर मधुबन के लिए बस सेवा उपलब्ध है। दिगम्बर जैन ट्रस्ट की बस सुबह-शाम यहाँ आती-जाती है। जीप एवं प्राइवेट बसों की भी सुविधा है। पूर्व सूचना देने पर श्वेताम्बर की बस भी आ सकती है।
    परिचय: वर्तमान चौबीसी के बीस तीर्थंकर इस पावन भूमि में तपश्चर्या करते हुए अनेक मुनियों के साथ मोक्ष सिधारे हैं। पूर्व चौबीसियों के कई तीर्थकर भी इस पावन भूमि से मोक्ष सिधारे हैं – ऐसी अनुश्रुति है। पहाड पर 31 टेंक स्थित हैं तथा पहाड की तलहटी मधुबन से आठ श्वेताम्बर मन्दिर, दो दादावाडिया व एक भोमियाजी महाराज का मन्दिर है। इसके अतिरिक्त 17 जिनालय व पे भी हैं।
    तीर्थरक्षक देव श्री भोमियाजी महाराज के दर्शन तलहटी में करने के साथ यात्रा का शुभारंभ करें। यहाँ से चलने पर आगे गंधर्व नाला आता है। आगे जाने पर दो मार्ग मिलते हैं, एक से गौतमस्वामी जी के शिखर से जल मंदिर जा सकते हैं, दूसरे मार्ग से डाक बंगला होकर श्री पार्श्वनाथ शिखर पर जाया जा सकता है। पहली बार यात्रा करने वाले तीर्थयात्री और सभी शिखर की यात्रा जल मन्दिर के मार्ग से शुरू करते हैं। इसके आगे सीता नाला आता है। यहीं से चढ़ाई प्रारंभ हो जाती है। पहला शिखर गणधर श्री गौतमस्वामी का आता है। दूसरा 17 वें तीर्थकर श्री कुन्थुनाथ भगवान का है। तीसरा ॠषभानन, चौथा श्री चन्द्रानन शाश्वत जिन का, पांचवां 21 वें तीर्थकर नेमिनाथ भगवान का, छठवां 18 वे तीर्थकर श्री अरनाथ, सातवां 19 वें तीर्थकर श्री मल्लिनाथ भ., आठवां 11 वें तीर्थतर श्री श्रेयांसनाथ भ., नौवा-नौवें तीर्थकर श्री सुविधिनाथ, दसवां छठवें तीर्थंकर श्री पद्मप्रभु, ग्यारहवां 20 वें तीर्थकर श्री मुनिसुव्रतस्वामी और बारहवां आठवे तीर्थंकर श्री चन्द्रप्रभु का है। यहां से चय्ढाई कठीन हो जाती है। तेरहवां शिखर श्री आदिनाथ भगवान, चौदहवां श्री अनंतनाथ भगवान, पंद्रहवा दसवें तीर्थकर श्री शीतलनाथ भगवान, सोलहवां तीसरे तीर्थकर श्री संभवनाथ भगवान, सत्रहवां बारहवें तीर्थकर श्री वासुपूज्य भगवान का है, जिनका निर्वाण चम्पापुरी में हुआ था। अठारहवां शिखर चौथे तीर्थंकर श्री अभिनन्दन स्वामी, उन्नीसवें शिखर पर जल मन्दिर विद्यमान है। यहां पर श्री शामलिया पार्श्वनाथ विराजमान है। यहां पर धर्मशाला एवं सेवापूजा के लिए स्नान की भी अच्छी व्यवस्था है। बीसवें शिखर पर श्री शुभगणधर स्वामी है, इक्कीसवें शिखर पर पंद्रहवें तीर्थंकर श्री धर्मनाथ भगवान की, बाईसवां श्री वारिषेण शाश्वत जिनका, तेईसवां श्री वर्धमान शाश्वत जिनका, चौबीसवां श्री सुमतिनाथ पांचवें तीर्थकर का, पच्चीसवां सोलहवें तीर्थंकर श्री शांतिनाथ का, छब्बीसवां श्री महावीर स्वामी चौबीसवें तीर्थंकर, जिनका मोक्ष पावापुरी में हुआ है, का है। सत्ताइसवां श्री सुपार्श्वनाथ भगवान का अठ्ठाइसवां एवं उन्नतीसवां शिखर श्री अजितनाथ भगवान का है। तीसवां शिखर गिरनार पर मोक्ष प्राप्त करने वाले बाइसवें तीर्थकर श्री नेमीनाथ भगवान का है। अंतिम इकत्तीसवां शिखर तेईसवें तीर्थंकर श्री पार्श्वनाथ भगवान का है। यह भगवान का समाधि स्थल है। यहां आकार तीर्थयात्रा पूर्ण होती है। पहाड पर से नीचे निहारते हैं तो मधुबन के सारे मन्दिरों की निर्माण शैली व कला अत्यंत ही मनोरम लगती है। मधुबन के ऊपर पहाड मुकुट के आकार का प्रतीत होता है। पहाड़ी परिवेश, सघन वन, नैसर्गिक सौन्दर्य मन को शान्ति प्रदान करता है।
    ठहरने की सुविधा : ठहरने के लिए मधुबन में श्वेताम्बर व दिगम्बर धर्मशालाएँ हैं। श्वेताम्बर धर्मशाला में भोजनशाला भी है। मधुबन में दिगम्बर एवं श्वेताम्बर समाज की लगभग एक दर्जन से अधिक धर्मशालाओं में डेढ हजार यात्रियों के ठहरने की व्यवस्था है। भोमिया जी भवन में यात्रियों को जैन धर्म सम्बन्धी साहित्य भी उपलब्ध होता है। धर्मशालाओं के निकट ही बाजार, बैंक आदि सुविधाएँ हैं। दिगम्बर समाज की कोठी का मारवाड़ी बासा भोजन हेतु उत्तम है। पेढी: श्री जैन श्वेताम्बर सोसायटी, कोठी मधुबन, शिखरजी, जिला गिरडीह (झारखण्ड) – 825329
    फोनः 06532-232226/232260