श्री जैसलमेर तीर्थ / Shree Jaisalmer Tirth: This tirth was also known...

    श्री जैसलमेर तीर्थ / Shree Jaisalmer Tirth: This tirth was also known as Lakshman Vihar

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    श्री जैसलमेर तीर्थ / Shree Jaisalmer Tirth

    पाली जिले के गोडवाड क्षेत्र में जैन संस्कृति कितनी प्राचीन और विस्तार में रही है इसका प्रमाण तो वे तीर्थ दे रहे हैं जहां आज तक एक भी जैन परिवार गांव में नहीं रहता लेकिन वहां प्राचीन जैन तीर्थ विद्यमान है। ऐसा ही एक तीर्थ जोखोड़ा गांव का श्री शांतिनाथ भगवान का वह मंदिर है जिसमें भगवान की पद्मासनस्थ प्रवाल वर्ण की चमत्कारी प्रतिमा बिराजमान है। मंदिर की प्रभु प्रतिमा की अंजनशलाका आचार्य श्री मानतुंगसरीश्वरजी म.सा. की पावन निश्रा में उन्हीं के हाथों सम्पन्न हुई थी। विक्रम की पंद्रहवीं शताब्दी में मेघ कवि द्वारा रचित तीर्थमाला में इस तीर्थ का उल्लेख है मूलनायक की प्रतिमा के परिकर पर सं. १५०४ का लेख उत्कीर्ण है लेकिन इस परिकर के बारे में यह मान्यता है कि यह किसी अन्य मंदिर से श्री पार्श्वनाथ भगवान का परिकर लाकर यहां लगाया गया है। जाखोड़ा गांव के पर्वतों की गोद में शिखरबंद धवल मंदिर एकान्त में होने के बावजूद भी अपने चमत्कारों से यहां के निवासियों को चमत्कृत कर रहा है। कहते हैं गांव में पेयजल का बड़ा संकट था कि मंदिर के अधिष्ठायक देव ने कोलीवाडा के चांदाजी को सपने में मंदिर के निकट ही पानी होने का संकेत दिया, जिससे वहां कुआं खुदवाया गया, जिसमें प्रचुर मात्रा में मीठा पानी मिला। इसी प्रकार के अनेक चमत्कारों के बारे में यहां के लोग बताते हैं। इस तीर्थ पर यात्रियों के ठहरने के लिए धर्मशाला है जहां सभी सुविधाएं सुलभ हैं। जाखोड़ा तीर्थ पाली सुमेरपुर से दस किलोमीटर की दूरी पर सड़क से पांच किलोमीटर पूर्व की ओर अंदर है।