Shree Hathundi Rata Mahavir Swami Tirth: Nearly 135 cms. high, Red –...

    Shree Hathundi Rata Mahavir Swami Tirth: Nearly 135 cms. high, Red – colored idol of Bhagawan Mahavir Swami in the Padmasana posture.

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    श्री हथुण्डी राता महावीर तीर्थ / Shree Hathundi Rata Mahavir Swami Tirth

    मूलनायक :श्री महावीर स्वामी भगवान, लालवर्ण ।
    मार्गदर्शन :फालना से 28 कि.मी. तथा राणकपुर से 32 किलोमीटर दूरी पर यह तीर्थ स्थान है। यह तीर्थ जवाई बांध स्टेशन से सिर्फ 20 कि.मी. है। सिरोही-पाली के राजमार्ग 27 पर बाली होकर सीधे आया जा सकता है। पिंडवाडा, बाली रोड पर स्थित बीजापुर गांव (बस स्टैंड) से 3 कि.मी. दूरी पर यह तीर्थ स्थित है। बीजापुर से आने जाने के लिए पक्का सय्डक मार्ग बना हुआ है। उदयपुर से गोगुंदा-राणकपुर होकर आया जा सकता है।
    परिचय : ईंट, चुना और रेत से बनी लाल रंग (राता वर्ण) की भगवान महावीर स्वामी की प्रतिमा है। अतः यह तीर्त श्री राता महावीर के नाम से भी जाना जाता है। भगवान के लांछन सिंह को हाथी का मस्तक लगा हुआ है, इस प्रकार का चिन्ह अन्यत्र देखने को नहीं मिलता। दो हजार वर्ष पहले हस्तीकुंड नामक यह एक विशाल नगर था। इस मंदिर का निर्माण विक्रम संवत् 370 में आचार्य श्री सिध्दसेनसूरी जी म.सा. की प्रेरणा से यहां के धर्मप्रेमी श्रेष्ठी वीरदेव ने किया है। बाद में विक्रम संवत् 973 में वदिग्धराजा ने जैन धर्म को स्वीकार कर इस मंदिर का जीर्णोध्दर किया। इस राजा के वंशजों ने भी जैन धर्म प्रचार का कार्य किया। मंदिर के नीचे तलघर में गुलाबी संगेमरमर में से तराशी हुई श्री महावीर स्वामी की मूर्ति बहुत ही सुंदर है। प्रमुख मंदिर के चारों ओर चौबीस देरियों में चौबीस तीर्थंकरों की प्रतिमाएं हैं। समय के प्रभाव से यह मंदिर जीर्ण हुआ, तब विक्रम संवत् 1942 में बीजापुर निवासी श्री झवेरचंदजी कामदार तथा अन्य धर्मप्रेमी श्रावकों ने नया कलापूर्ण मंदिर करके विक्रम संवत् 2006 में आचार्य स्री विजयवल्लभ सूरीजी म.सा. के सानिध्य में प्रतिष्ठा करायी। इस मंदिर की दीवारों पर शत्रुंजय, गिरनार, सम्मेतशिखरजी आदि प्रसिध्द तीर्थों के पट तथा भगवान महावीर के जीवन प्रसंग पर आधारित चित्र अंकित हैं। हथुण्डी तीर्थ का सर्वांगीण विकास हो रहा है। प. पू. मुनिराज श्री अरुण विजयजी म.सा. की सत्प्रेरणा से श्री महावीर वाणी समवसरण मंदिर का निर्माण हो रहा है।
    ठहरने की व्यवस्था : मंदिर के पास 32 कमरों वाली दो विशाल धर्मसालाएं हैं। यहां पर एक उपाश्रय भी है। भोजनशाला का उचित प्रबंध है। एक साथ 200-400 यात्रियों के संघ के आने पर भी ठहरने, खाने-पीने की पूरी व्यवस्था हो जाती है।
    पेढ़ी :श्री हथुण्डी राता महावीर जैनतीर्थ पेढ़ी
    मु.पो. : बिजापुर,
    जिला पाली, राजस्थान-306707