श्री बेडा तीर्थ/ Shree Beda Tirth: Dada Parshvanath is also a name...

    श्री बेडा तीर्थ/ Shree Beda Tirth: Dada Parshvanath is also a name of Dokoriya Parshvanath in the tirth of Chandraprabhas Patan and of Sesali Parshvanath

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    श्री बेडा तीर्थ/ Shree Beda Tirth

    गोडवाड के जैन मंदिर अपनी उत्कृष्ट स्थापत्य और शिल्पकाल के कारण पवित्र भावनाओं को जगाने वाले हैं। शहरों की चकाचौंध और कोलाहल से दूर शांत और एकान्त स्थानों पर विद्यमान अनेक जैन मंदिर अपना एक विशिष्ट महत्व लिए हुए हैं जिसमें गोडवाड की छोटी पंच तीर्थी का एक तीर्थ बेडा भी अरावली पर्वत श्रृंखला के बीच प्राकृतिक सौन्दर्य से आध्यात्म परिवेश को अधिक पुष्ट कर रहा है। वर्तमान बेडा गांव कभी यहां से चार किलोमीटर दूर पूर्व की ओर अरावली पर्वत से सटा हुआ था लेकिन किन्ही कारणवश वहां से बस्ती उजड़ गई और बाद में वर्तमान बेड़ा गांव बसा जिसे आज भी लोग नया बेडा के नाम से पुकारते हैं। पुराना बेडा सदियों पूर्व जैन धर्म का बड़ा केन्द्र था लेकिन आज वहां एक जैन मंदिर के अतिरिक्त कोई जैन बस्ती नहीं है। इस प्राचीन मंदिर के भगवान श्री पार्श्वनाथ की सुन्दर प्रतिमा है जिसे चमत्कारी बताया जाता है। इस शिखरबंधी मंदिर का निर्माण कब हुआ उसकी जानकारी तो नहीं है लेकिन मंदिर की स्थापत्य कला को देख कर यह अनुमान लगाया जा रहा है कि इस का निर्माण काल ग्यारहवीं शताब्दी का होना चाहिए। मंदिर तक आने के लिए उबड़ खाबड़ सुनसान रास्ता होने के कारण यहां नियमित रूप से जाने वाले दर्शनार्थी नहीं हैं जिससे यह मंदिर उपेक्षित सा लगता है। लेकिन नया बेडा का जैन मंदिर भव्य तथा विशाल मंदिर के मूल नायक संभवनाथ भगवान हैं। इस मंदिर का निर्माण प्राचीन मंदिरों की शिल्पकला के अनुसार किये जाने के कारण इसे भी ११वीं शताब्दी का माना जा रहा है। लेकिन प्रतिमाओं पर लेखों के आधार पर इस मंदिर के १७ वीं सदी में निर्मित होने की पुष्टी होती है। मंदिर के अंदर दायें बायें एक बड़ा व एक छोटा परिकर और मूर्तियां हैं और गर्भगृह के बाहर दो प्राचीन मूर्तियां हैं। बड़े गोल गुम्बज में पुरानी चित्रकारी इस मंदिर की विशेषता है। बेडा आने के लिए पश्चिमी रेलवे के मोरीबेडा स्टेशन से पांच किलोमीटर दूर तांगा गाडी या टैक्सी से आना पड़ता है। बेडा में यात्रियों के ठहरने के लिए धर्मशाला आदि की व्यवस्था है।